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Lakhimpur Kheri News: पुराने स्वरूप में लौटेगी सरायन नदी, तालाब व झीलों से जुड़ेगी
Sun, 12 Oct 2025 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 12 Oct 2025 11:32 PM IST
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सरायन नदी के जीर्णोद्धार का उद्घाटन करते हुए तत्कालीन सीडीओ अनिल कुमार। फाइल फोटो
लखीमपुर खीरी। खीरी की पौराणिक सरायन नदी पुराने स्वरूप में लौटेगी। नमामि गंगे योजना के तहत जिला प्रशासन इसका जीर्णोद्धार कराएगा।नदी के दोनों तरफ 500 मीटर के दायरे में आने वाले तालाब और झीलों को नदी से जोड़ा जाएगा।
सरायन नदी सीतापुर और लखीमपुर के लिए जीवनरेखा का काम करती है। जिले में इसकी सीमा करीब 92 किलोमीटर है। यह गोमती नदी की सहायक नदी है, जिसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। ब्लाॅक बांकेगंज के ग्रंट नंबर 18 के बिसोखर में नदी का उद्गम स्थल है। यह नदी गोला, मोहम्मदी, मितौली होते हुए सीतापुर से गुजरने के बाद गोमती में मिल जाती है।
उपायुक्त मनरेगा अमित परिहार ने बताया कि मनरेगा के तहत सरायन नदी का जीर्णोद्धार जल्द ही शुरू होने जा रहा है। इस काम में सिंचाई विभाग से तकनीकी मदद लेकर प्राकृतिक जल प्रवाह किया जाएगा।
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सरायन नदी के 92 किलोमीटर हिस्से में कई जगह पर अवैध कब्जा हो चुके हैं। राजस्व व पुलिस की मदद से जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाएगा, जो चिह्नित किया जा चुका है। पहले नोटिस की कार्रवाई होगी। इसके बाद जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएंगे।
नदी के जीर्णोद्धार में करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है। ऐसे में मनरेगा के अलावा इसमें सीआरएस फंड की मदद ली जाएगी। सीआरएस फंड निजी संस्थाओं से एकत्र की जानी वाली धनराशि होती है, जो जिला प्रशासन की खाते में जमा होती है। इसके लिए निजी संस्थाओं से सहयोग की भी अपील की जाएगी।
दो साल पहले हो चुका उद्घाटन
सरायन नदी के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल पहले शुरू हो गई थी। तत्कालीन सीडीओ अनिल सिंह, तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा विपिन चौधरी, पूर्व एसडीएम गोला रत्नाकर मिश्रा ने उद्गम स्थल पर पहुंचकर जीर्णोद्धार की शुरुआत की थी। किन्हीं कारणों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अब जिला प्रशासन इस काम को आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।
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सरायन नदी सीतापुर और लखीमपुर के लिए जीवनरेखा का काम करती है। जिले में इसकी सीमा करीब 92 किलोमीटर है। यह गोमती नदी की सहायक नदी है, जिसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। ब्लाॅक बांकेगंज के ग्रंट नंबर 18 के बिसोखर में नदी का उद्गम स्थल है। यह नदी गोला, मोहम्मदी, मितौली होते हुए सीतापुर से गुजरने के बाद गोमती में मिल जाती है।
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उपायुक्त मनरेगा अमित परिहार ने बताया कि मनरेगा के तहत सरायन नदी का जीर्णोद्धार जल्द ही शुरू होने जा रहा है। इस काम में सिंचाई विभाग से तकनीकी मदद लेकर प्राकृतिक जल प्रवाह किया जाएगा।
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सरायन नदी के 92 किलोमीटर हिस्से में कई जगह पर अवैध कब्जा हो चुके हैं। राजस्व व पुलिस की मदद से जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाएगा, जो चिह्नित किया जा चुका है। पहले नोटिस की कार्रवाई होगी। इसके बाद जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएंगे।
नदी के जीर्णोद्धार में करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है। ऐसे में मनरेगा के अलावा इसमें सीआरएस फंड की मदद ली जाएगी। सीआरएस फंड निजी संस्थाओं से एकत्र की जानी वाली धनराशि होती है, जो जिला प्रशासन की खाते में जमा होती है। इसके लिए निजी संस्थाओं से सहयोग की भी अपील की जाएगी।
दो साल पहले हो चुका उद्घाटन
सरायन नदी के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल पहले शुरू हो गई थी। तत्कालीन सीडीओ अनिल सिंह, तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा विपिन चौधरी, पूर्व एसडीएम गोला रत्नाकर मिश्रा ने उद्गम स्थल पर पहुंचकर जीर्णोद्धार की शुरुआत की थी। किन्हीं कारणों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अब जिला प्रशासन इस काम को आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।