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नेताजी के नक्शेकदम पर अखिलेश: जहां मिली करारी हार, वहीं से दे रहे चुनावी अभियान को धार; इन्हें साधने की कवायद

Wed, 07 Jun 2023 12:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 07 Jun 2023 12:19 PM IST
सार

हमेशा पिछड़ों की राजनीति के सहारे दिल्ली तक की सल्तनत को अपनी मर्जी से चलाने वाले समाजवादी नेता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव अब उनके ही नक्शेकदम पर चलते हुए आगे बढ़ रहे हैं। अभी तक बसपा से गठजोड़ कर चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में रहे अखिलेश ने दलितों को भी साध रहे हैं।

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Samajwadi Party President Akhilesh Yadav started Lok Jagran Yatra from Lakhimpur Kheri
अखिलेश यादव की लोक जागरण यात्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी जिले में दो-दो बार आठों विधानसभा और दोनों लोकसभा खीरी और धौरहरा सीटों समेत प्रदेश में करारी हार मिलने के बाद भी सपा मुखिया ने खीरी से ही लोक जागरण यात्रा की शुरुआत की है। अभी तक पिछड़ों और मुस्लिम वोटों के सहारे सत्ता का स्वाद चखती रही सपा ने इस बार पूरी रणनीति ही बदल दी है। 
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हमेशा एमवाई (मुस्लिम और यादव) की राजनीति करने वाली सपा ने दलितों को भी साधने की कवायद शुरू की है। हमेशा पिछड़ों की राजनीति के सहारे दिल्ली तक की सल्तनत को अपनी मर्जी से चलाने वाले समाजवादी नेता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव अब उनके ही नक्शेकदम पर चलते हुए आगे बढ़ रहे हैं। 
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अभी तक बसपा से गठजोड़ कर चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में रहे अखिलेश ने दलितों को भी साध रहे हैं। वर्ष 2024 की तैयारियों को लेकर खीरी से शुरू हुई लोक जागरण यात्रा के जरिये अखिलेश ने एलान किया कि वह पिछड़ों और दलितों को साथ-साथ लेकर चलेंगे। लंबे समय से सत्ता से दूर बसपा धीरे धीरे भाजपा की ओर शिफ्ट हो रही है। 

भाजपा की जीत और सपा की हार का यह सबसे बड़ा कारण रहा है। इसलिए अब तक बसपा के साथ गठजोड़ कर चुनाव में उतरे अखिलेश यादव ने इस बार बिना गठजोड़ के ही एलान किया कि वह कांशीराम के विचारों में आस्था रखते हैं। और कोशिश करेंगे कि उनकी विचारधारा के लोग समाजवादी विचारधारा के साथ मिलकर तानाशाह ताकतों से लड़ें। 

बता दें कि लखीमपुर में पिछड़ी जाति के लोग अधिक हैं। ऐसे में मुस्लिम और यादव के साथ सपा जहां कुर्मी वोट को जोड़कर अपनी नैया पार लगाना चाहती है, वहीं बसपा के कोर वोटर पर भी नजरें गड़ा दी हैं।

नहीं था यात्रा का कार्यक्रम, अचानक मैदान पर पहुंचा रथ

मंगलवार को देवकली स्थित आदर्श जनता महाविद्यालय में सपा के प्रशिक्षण शिविर लोक जागरण अभियान के समापन पर लोक जागरण यात्रा का रथ पहुंचा तो लोगों को सपा की रथ यात्रा का पता चला। इससे पहले समाजवादियों के पास इसकी कोई सूचना नहीं थी। अखिलेश यादव के कार्यालय से जारी कार्यक्रम तक में भी इसका जिक्र नहीं था। हालांकि, सुबह करीब नौ बजे समाजवादी पार्टी के ट्विटर हैंडल पर देवकली से धौरहरा तक इस यात्रा के बारे में ट्वीट किया गया।

समाजवादियों का गढ़ रहा है खीरी, चाहते हैं दोबारा बने
दो दिन से खीरी की सियासी नब्ज समझ रहे अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादियों की कोशिश होगी कि खीरी से शुरू हुई यह यात्रा पूरे प्रदेश में निकाली जाए। यात्रा के लिए खीरी को चुने जाने पर बोले- खीरी से इस कार्यक्रम की शुरुआत करने का खास मकसद है। खीरी पूर्व में समाजवादियों का गढ़ रहा है। यहां पर जितने नेता और कार्यकर्ता हैं, इन्होंने पार्टी के मुद्दे पर आपको समझाया होगा। तमाम जानकारियां भी आपको दी होंगी। इस कार्यक्रम का मकसद यही है कि खीरी समाजवादियों का गढ़ दोबारा बन जाए। यहां के नेता बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से वाकिफ हैं।

पहले दिन नदारद, दूसरे दिन मंच पर दिखे रवि वर्मा
सप्ताह भर पहले लखनऊ में हुई कुर्मी समाज की बैठक में लोकसभा चुनाव के टिकट को लेकर हुई रार के बाद पार्टी के महासचिव रवि वर्मा मंच पर दिखाई दिए। इससे पहले वह अखिलेश के दौरे को लेकर सोमवार को नदारद रहे थे। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अमर उजाला में अंदरूनी गुटबाजी की खबरें प्रकाशित होने के बाद पूर्व सांसद रवि वर्मा को पार्टी में सब ठीक दिखाने के लिए बुलवाया गया। हालांकि, तमाम अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में अभी भी असंतोष है। 

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पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि स्थानीय नेताओं ने भले ही अखिलेश यादव को सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश की हो, लेकिन दो दिन के प्रवास से वह यहां की स्थितियां भाप गए हैं। पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं लगा। अखिलेश यादव की डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कितनी कामयाब हुई, यह आने वाले दिनों में पता चल जाएगा।
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