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ग्राम्य विकास से पंचायती राज के अलग होने के प्रस्ताव पर छिड़ी रार
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:27 PM IST
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पंचायती राज विभाग
- फोटो : अमर उजाला
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ग्राम्य विकास ने महापरिषद का गठन कर पुरजोर विरोध की रणनीति बनाई
महापरिषद में अन्य 10 विभाग हुए शामिल, 10 और 17 जून को दो घंटे अधिक करेंगे कार्य
ग्राम्य विकास विभाग से मुक्त होने के लिए पंचायती राज विभाग ने कोशिशें तेज कर दी हैं, जिसके विरोध में ग्राम्य विकास ने विभिन्न विभागों के साथ मिलकर बुधवार को महापरिषद का गठन किया है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के प्रस्ताव के विरोध में महापरिषद ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर विरोध का एलान कर दिया है। इसके लिए महापरिषद गुरुवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपेगा। इसके अलावा पंचायती राज विभाग के प्रस्तावित 10 और 17 जून को धरना प्रदर्शन के जवाब में इन दिनों में ग्राम्य विकास के अधिकारी और कर्मचारी दो घंटे अधिक कार्य कर विरोध जताएंगे।
डीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि सामुदायिक विकास के लिए 1952 में विकास खंडों की स्थापना की गई थी, जिसमें जनता से जुड़े विभागों कृषि, कृषि रक्षा, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, पंचायत राज, युवा कल्याण, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण, अर्र्थ एवं संख्या और चिकित्सा विभागों का समन्वय किया गया था। इन विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी बीडीओ के नियंत्रण में किए गए थे, क्योंकि ग्राम्य विकास एक विभाग न होकर विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण इकाई हैै। परियोजना निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि कुछ वर्षों से एक सहयोगी विभाग पंचायत राज अपने को विभागवाद के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिशें कर रहा है, जो संविधान की मूल भावना पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान करने के खिलाफ है। केंद्र और राज्य सरकार ने विकास खंड और खंड विकास अधिकारी की क्षमता देखकर ही ऐसा निर्णय लागू किया है। उपायुक्त मनरेगा पीके राय ने कहा कि पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम्य विकास से मुक्त होने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत 10 जून और 17 जून को धरना प्रदर्शन का प्रस्ताव हैै। महापरिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 10 को जिलास्तर और 17 जून को प्रदेश स्तर पर होने वाले प्रदर्शन प्रस्ताव के खिलाफ विरोध जताते हुए दो घंटे अतिरिक्त कार्य किया जाएगा। गांवों के विकास कार्यों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होने दिया जाएगा। इस बैठक में समस्त ब्लाकों के बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी, डीआरडीए सहित अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारी शामिल हुए।
यह विभाग महापरिषद में हुए शामिल
पीडीएस एसोसिएशन, ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, ग्राम्य विकास मिस्टीरियल एसोसिएशन, ग्राम्य विकास लेखासंघ, मनरेगा कार्मिक कल्याण संगठन, नरेगा तकनीकी सहायक एसोसिएशन, डीआरडीए इंप्लाइज, राजकीय वाहन चालक एसोसिएशन, उर्दू अनुवादक संघ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ।
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पहले हो चुके कई विभाग अलग
पंचायती राज विभाग ने ग्राम्य विकास की धारा से मुक्त होने की कोशिशें तेज कर दी हैं, जिसके पीछे निदेशालय स्तर से मुहिम छेड़ने की बात कही जा रही हैै। बताते चलें कि इससे पूर्व भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा जैसे विभाग अलग हो चुके हैं।
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महापरिषद में अन्य 10 विभाग हुए शामिल, 10 और 17 जून को दो घंटे अधिक करेंगे कार्य
ग्राम्य विकास विभाग से मुक्त होने के लिए पंचायती राज विभाग ने कोशिशें तेज कर दी हैं, जिसके विरोध में ग्राम्य विकास ने विभिन्न विभागों के साथ मिलकर बुधवार को महापरिषद का गठन किया है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के प्रस्ताव के विरोध में महापरिषद ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर विरोध का एलान कर दिया है। इसके लिए महापरिषद गुरुवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपेगा। इसके अलावा पंचायती राज विभाग के प्रस्तावित 10 और 17 जून को धरना प्रदर्शन के जवाब में इन दिनों में ग्राम्य विकास के अधिकारी और कर्मचारी दो घंटे अधिक कार्य कर विरोध जताएंगे।
डीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि सामुदायिक विकास के लिए 1952 में विकास खंडों की स्थापना की गई थी, जिसमें जनता से जुड़े विभागों कृषि, कृषि रक्षा, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, पंचायत राज, युवा कल्याण, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण, अर्र्थ एवं संख्या और चिकित्सा विभागों का समन्वय किया गया था। इन विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी बीडीओ के नियंत्रण में किए गए थे, क्योंकि ग्राम्य विकास एक विभाग न होकर विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण इकाई हैै। परियोजना निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि कुछ वर्षों से एक सहयोगी विभाग पंचायत राज अपने को विभागवाद के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिशें कर रहा है, जो संविधान की मूल भावना पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान करने के खिलाफ है। केंद्र और राज्य सरकार ने विकास खंड और खंड विकास अधिकारी की क्षमता देखकर ही ऐसा निर्णय लागू किया है। उपायुक्त मनरेगा पीके राय ने कहा कि पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम्य विकास से मुक्त होने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत 10 जून और 17 जून को धरना प्रदर्शन का प्रस्ताव हैै। महापरिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 10 को जिलास्तर और 17 जून को प्रदेश स्तर पर होने वाले प्रदर्शन प्रस्ताव के खिलाफ विरोध जताते हुए दो घंटे अतिरिक्त कार्य किया जाएगा। गांवों के विकास कार्यों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होने दिया जाएगा। इस बैठक में समस्त ब्लाकों के बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी, डीआरडीए सहित अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारी शामिल हुए।
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यह विभाग महापरिषद में हुए शामिल
पीडीएस एसोसिएशन, ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, ग्राम्य विकास मिस्टीरियल एसोसिएशन, ग्राम्य विकास लेखासंघ, मनरेगा कार्मिक कल्याण संगठन, नरेगा तकनीकी सहायक एसोसिएशन, डीआरडीए इंप्लाइज, राजकीय वाहन चालक एसोसिएशन, उर्दू अनुवादक संघ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ।
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पहले हो चुके कई विभाग अलग
पंचायती राज विभाग ने ग्राम्य विकास की धारा से मुक्त होने की कोशिशें तेज कर दी हैं, जिसके पीछे निदेशालय स्तर से मुहिम छेड़ने की बात कही जा रही हैै। बताते चलें कि इससे पूर्व भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा जैसे विभाग अलग हो चुके हैं।