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रत्नापुर गांव में बाघ ने बकरे को बनाया निवाला
बिजुआ
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:33 PM IST
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भीरा इलाके के रत्नापुर गांव के खेतों में गन्ना छील रहे एक मजदूर के सामने अचानक पहुंचा बाघ मजदूर के बकरे को उठा ले गया। बाघ आने की दहशत से गांव के लोगों ने गन्ने के खेत को शाम को घेर रखा, लेकिन जिम्मेदार दो घंटे तक पहुंचे ही नहीं। वहीं दो दिन पहले बाघ भीरा-लखीमपुर राजमार्ग पर रात को दो बजे टहलता दिखाई दे चुका है।
भीरा रेंज के रत्नापुर गांव निवासी छोटे गांव के उत्तर पूरब दिशा स्थित खेतों में गन्ना छील रहा था। छोटे अपने साथ अपने बकरे को भी घास चराने के लिए ले गया था। गन्ना छीलने के दौरान उसका बकरा थोड़ी दूर पर खड़ा घास खा रहा था, तभी अचानक पीछे से आए बाघ ने उसके सामने बकरे को उठाकर गन्ने में चला गया। बाघ देखने से बदहवाश छोटे खेत से बाहर आकर लोगों को वारदात की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बाघ की मौजूदगी की सूचना वन विभाग की कर्मियों को दी, साथ ही वनाधिकारियों का इंतजार करने के साथ ही खेत को घेरे रखा।
भीरा रेंजर के बगैर पहुंची उनकी टीम
बाघ की मौजूदगी की खबर मिलने के दो घंटे बाद वन विभाग की टीम में वन दरोगा और दो फारेस्ट गार्ड मौके पर पहुंचे। टीम ने पगमार्क मिलने से इंकार किया है, फिर भी गांव वालों को एहतियात बरतने को कहा गया है। टीम अभी तक इसे लकड़बघ्घा साबित करने में जुटी है।
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शनिवार रात को भीरा राजमार्ग पर घूमे थे वनराज
बिजुआ बरौंछा के पास रोड पर शनिवार-रविवार रात को करीब दो बजे एंबुलेंस लेकर जा रहे कर्मियों ने भी बाघ देखा था। वहीं शनिवार दिन में ही बस्तौला क्रेशर के पीछे गन्ने के खेत में बाघ के नीलगाय के शिकार करने की बात सामने आई थी। इसी दिन सेमरिया गांव के पोला सिंह के झाले के निकट बाघ टहलता दिखा था, जिसे वनकर्मियों ने माना कि बाघ जंगल चला गया है।
दो साल पहले दिसंबर में ही यहीं आया था बाघ
दिसंबर 2014 में के पहली बार रत्नापुर में ही दिखा था, उसके दो महीने बाद बाघ ने पड़ोसी गांव डिमरौल में शौच गए युवक को मार डाला था। करीब पखवाड़ा भर से ज्यादा समय बाघ इलाके के गांवों में घूमता रहा था, बाद में बाघ को लखनऊ से आए ट्रैकुलाइजर एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष ने बेहोश किया था, फिर उसे पकड़कर दुधवा में छोड़ा गया था।
.... तो फिर इलाके में घूम रहे हैं दो-दो बाघ
अधिकारिक रूप से वनविभाग भले बाघों के इलाके में न होने की पुष्टि करता रहे, लेकिन
महकमे के सूत्र बताते हैं कि जंगल से दो बाघों से बाहर आने के निशान मिले हैं, जब कि वापस जाने के एक बाघ के ही निशान मिले हैं।
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भीरा रेंज के रत्नापुर गांव निवासी छोटे गांव के उत्तर पूरब दिशा स्थित खेतों में गन्ना छील रहा था। छोटे अपने साथ अपने बकरे को भी घास चराने के लिए ले गया था। गन्ना छीलने के दौरान उसका बकरा थोड़ी दूर पर खड़ा घास खा रहा था, तभी अचानक पीछे से आए बाघ ने उसके सामने बकरे को उठाकर गन्ने में चला गया। बाघ देखने से बदहवाश छोटे खेत से बाहर आकर लोगों को वारदात की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बाघ की मौजूदगी की सूचना वन विभाग की कर्मियों को दी, साथ ही वनाधिकारियों का इंतजार करने के साथ ही खेत को घेरे रखा।
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भीरा रेंजर के बगैर पहुंची उनकी टीम
बाघ की मौजूदगी की खबर मिलने के दो घंटे बाद वन विभाग की टीम में वन दरोगा और दो फारेस्ट गार्ड मौके पर पहुंचे। टीम ने पगमार्क मिलने से इंकार किया है, फिर भी गांव वालों को एहतियात बरतने को कहा गया है। टीम अभी तक इसे लकड़बघ्घा साबित करने में जुटी है।
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शनिवार रात को भीरा राजमार्ग पर घूमे थे वनराज
बिजुआ बरौंछा के पास रोड पर शनिवार-रविवार रात को करीब दो बजे एंबुलेंस लेकर जा रहे कर्मियों ने भी बाघ देखा था। वहीं शनिवार दिन में ही बस्तौला क्रेशर के पीछे गन्ने के खेत में बाघ के नीलगाय के शिकार करने की बात सामने आई थी। इसी दिन सेमरिया गांव के पोला सिंह के झाले के निकट बाघ टहलता दिखा था, जिसे वनकर्मियों ने माना कि बाघ जंगल चला गया है।
दो साल पहले दिसंबर में ही यहीं आया था बाघ
दिसंबर 2014 में के पहली बार रत्नापुर में ही दिखा था, उसके दो महीने बाद बाघ ने पड़ोसी गांव डिमरौल में शौच गए युवक को मार डाला था। करीब पखवाड़ा भर से ज्यादा समय बाघ इलाके के गांवों में घूमता रहा था, बाद में बाघ को लखनऊ से आए ट्रैकुलाइजर एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष ने बेहोश किया था, फिर उसे पकड़कर दुधवा में छोड़ा गया था।
.... तो फिर इलाके में घूम रहे हैं दो-दो बाघ
अधिकारिक रूप से वनविभाग भले बाघों के इलाके में न होने की पुष्टि करता रहे, लेकिन
महकमे के सूत्र बताते हैं कि जंगल से दो बाघों से बाहर आने के निशान मिले हैं, जब कि वापस जाने के एक बाघ के ही निशान मिले हैं।