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आरटीई : 370 विद्यार्थियों को स्कूल आवंटित, जल्द मिलेंगे स्वीकृति पत्र
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लखीमपुर खीरी। शिक्षा के अधिकारी अधिनियम (आरटीई) को लेकर इस बार एक दिसंबर से आवेदन मांगे गए थे। 19 दिन चली आवेदन प्रक्रिया के दौरान विभाग को कुल 835 आवेदन मिले। पात्रता की जांच के बाद 370 छात्र-छात्राओं को विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं।
एक दिसंबर से 19 दिसंबर तक आरटीई के तहत आवेदन मांगे गए थे। इस बार 825 आवेदन विभाग को मिले थे। जांच के बाद 370 छात्र-छात्राएं योजना के लिए पात्र पाए गए थे। यहां बता दें कि आरटीई योजना के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर निर्धन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। जिले में 825 स्कूल पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में 5387 सीटों पर प्रवेश होने हैं।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि सत्यापन के दौरान कई ऐसे अभिभावकों ने आवेदन कर दिया था जो इस योजना के लिए पात्र नहीं थे। इसलिए जांच के बाद उन्हें अपात्र कर दिया गया है। पात्र पाए गए सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को सहमति प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
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बीएसए ने स्कूल संचालकों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि योजना में चयनित छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेना सुनिश्चित करें। किसी भी तरह की कोई समस्या आने पर वह विभाग में शिकायत कर सकता है। इस योजना में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े इसको लेकर हर साल पांच हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। इस धनराशि से अभिभावक बच्चों को ड्रेस, जूता मोजा, बैग, किताबें और स्टेशनरी आदि खरीदते हैं।
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एक दिसंबर से 19 दिसंबर तक आरटीई के तहत आवेदन मांगे गए थे। इस बार 825 आवेदन विभाग को मिले थे। जांच के बाद 370 छात्र-छात्राएं योजना के लिए पात्र पाए गए थे। यहां बता दें कि आरटीई योजना के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर निर्धन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। जिले में 825 स्कूल पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में 5387 सीटों पर प्रवेश होने हैं।
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बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि सत्यापन के दौरान कई ऐसे अभिभावकों ने आवेदन कर दिया था जो इस योजना के लिए पात्र नहीं थे। इसलिए जांच के बाद उन्हें अपात्र कर दिया गया है। पात्र पाए गए सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को सहमति प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
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बीएसए ने स्कूल संचालकों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि योजना में चयनित छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेना सुनिश्चित करें। किसी भी तरह की कोई समस्या आने पर वह विभाग में शिकायत कर सकता है। इस योजना में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े इसको लेकर हर साल पांच हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। इस धनराशि से अभिभावक बच्चों को ड्रेस, जूता मोजा, बैग, किताबें और स्टेशनरी आदि खरीदते हैं।