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सर्दी में कैसे हो सफर: बसों में फॉग लाइट न खिड़कियों में शीशे
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रोडवेज बस अड्डे पर बिना फॉग लाइट खड़ी अनुबंधित बस। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिले में सर्दी ने दस्तक दे दी है। सुबह के समय कोहरे का भी दिखने लगा है। मगर, रोडवेज बसों में अभी तक न तो फॉग लाइट ही लगी हैं और न ही सर्द हवाएं रोकने के लिए खिड़कियां ही दुरुस्त की गई हैं। यात्रियों से लेकर चालक परिचालकों की सुरक्षा के लिए न तो परिवहन निगमके अधिकारी गंभीर हैं और न ही अनुबंधित बसों के मालिक। यह स्थित तब है जब यातायात सप्ताह मनाकर लोगों को सड़क दुर्घटना से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
सर्दी के मौसम में सुबह और रात में कोहरे पड़ता है। ऐसे में घना कोहरा होने पर थोड़ी दूर का स्पष्ट नहीं दिखता है। हालांकि सर्दी शुरू होने से पहले ही बसों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो जाती है। इसके तहत बसों में कोहरे के लिए फॉग लाइट, खिड़की, दरवाजों के साथ शीशे दुरुस्त कराए जाते हैं, जिससे सफर के दौरान यात्रियों को सर्द हवा से बचाया जा सके। लेकिन अभी भी लखीमपुर और गोला डिपो की अधिकतर बसों में न तो अभी तक फॉग लाइट लगी है और न ही खिड़की, दरवाजे ठीक कर उनमें शीशे लगवाए गए हैं।
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लखीमपुर डिपो
संचालित होने वाली अनुबंधित बसें- 67
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गोला डिपो
निगम की बसें-74
अनुबंधित बसें-40
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हैवीलाइट से चला रहे काम
बसों में फॉग लाइट तो नहीं है, लेकिन हैवी लाइट लगी है। चालकों का कहना है कि इसी से काम चला रहे हैं। हालांकि चालक भी कोहरे में बस संचालन के लिए फॉग लाइट को उपयोगी मानते हैं। इनका कहना है कि हम लोग तो बस अधिकारियों और बस मालिकों से कह ही सकते हैं। लगवाने की जिम्मेदारी एआरएम और बस मालिकों की है।
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खिड़कियों से हैंडिल तक गायब
कुछ बसों के जहां शीशे गायब हैं तो वहीं कुछ बसों की खिड़कियों के हेंडिल भी गायब हैं। इससे सुबह और रात के दौरान सफर करने वाले मुसाफिर सर्द हवा सहने को मजबूर हैं। खिड़कियों की रबर ढीली और हेंडिल न होने से यात्रियों को बार-बार उन्हें बंद करने में दिक्कत होती है।
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ब्रेक लगाने पर खुल जा रहे शीशे
निगम से लेकर अनुबंधित बसों की हालत इतनी खराब है कि इनमें सफर करना किसी मुसीबत से कम नहीं है। खिड़कियों में लगे शीशे की रबर इतनी ढीली हो गई है कि चालक के ब्रेक लगाते ही शीशे खुल जाते हैं, जिससे लंबी दूरी पर जाने वाले यात्रियों को बार-बार शीशे बंद करने पड़ते हैं।
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लखीमपुर अनुबंधित बसों का डिपो है। सर्दी के मौसम को लेकर मालिकों को बसें दुरुस्त कराने के लिए कहा जा चुका है। इसके बावजूद जिन बसों में फॉग लाइट नहीं होगी उसका संचालन रोक दिया जाएगा।
-एसपी सिंह, एआरएम लखीमपुर डिपो
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सर्दी के मौसम में सुबह और रात में कोहरे पड़ता है। ऐसे में घना कोहरा होने पर थोड़ी दूर का स्पष्ट नहीं दिखता है। हालांकि सर्दी शुरू होने से पहले ही बसों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो जाती है। इसके तहत बसों में कोहरे के लिए फॉग लाइट, खिड़की, दरवाजों के साथ शीशे दुरुस्त कराए जाते हैं, जिससे सफर के दौरान यात्रियों को सर्द हवा से बचाया जा सके। लेकिन अभी भी लखीमपुर और गोला डिपो की अधिकतर बसों में न तो अभी तक फॉग लाइट लगी है और न ही खिड़की, दरवाजे ठीक कर उनमें शीशे लगवाए गए हैं।
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लखीमपुर डिपो
संचालित होने वाली अनुबंधित बसें- 67
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गोला डिपो
निगम की बसें-74
अनुबंधित बसें-40
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हैवीलाइट से चला रहे काम
बसों में फॉग लाइट तो नहीं है, लेकिन हैवी लाइट लगी है। चालकों का कहना है कि इसी से काम चला रहे हैं। हालांकि चालक भी कोहरे में बस संचालन के लिए फॉग लाइट को उपयोगी मानते हैं। इनका कहना है कि हम लोग तो बस अधिकारियों और बस मालिकों से कह ही सकते हैं। लगवाने की जिम्मेदारी एआरएम और बस मालिकों की है।
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खिड़कियों से हैंडिल तक गायब
कुछ बसों के जहां शीशे गायब हैं तो वहीं कुछ बसों की खिड़कियों के हेंडिल भी गायब हैं। इससे सुबह और रात के दौरान सफर करने वाले मुसाफिर सर्द हवा सहने को मजबूर हैं। खिड़कियों की रबर ढीली और हेंडिल न होने से यात्रियों को बार-बार उन्हें बंद करने में दिक्कत होती है।
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ब्रेक लगाने पर खुल जा रहे शीशे
निगम से लेकर अनुबंधित बसों की हालत इतनी खराब है कि इनमें सफर करना किसी मुसीबत से कम नहीं है। खिड़कियों में लगे शीशे की रबर इतनी ढीली हो गई है कि चालक के ब्रेक लगाते ही शीशे खुल जाते हैं, जिससे लंबी दूरी पर जाने वाले यात्रियों को बार-बार शीशे बंद करने पड़ते हैं।
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लखीमपुर अनुबंधित बसों का डिपो है। सर्दी के मौसम को लेकर मालिकों को बसें दुरुस्त कराने के लिए कहा जा चुका है। इसके बावजूद जिन बसों में फॉग लाइट नहीं होगी उसका संचालन रोक दिया जाएगा।
-एसपी सिंह, एआरएम लखीमपुर डिपो

अनुबंधित बस की खिड़की का टूटा शीशा। संवाद- फोटो : LAKHIMPUR