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चढ़ते पारे ने बढ़ाया हीट स्ट्रोक का खतरा, खूब पीयें पानी, लू से बचें

Sun, 15 May 2022 11:53 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 11:53 PM IST
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Rising mercury increases the risk of heat stroke, drink plenty of water, avoid heat stroke
तेज धूप में छाता लेकर जाते लोग।
दोपहर में घर से निकलने से बचें, यदि जाना जरूरी हो तो छाता लेकर जाएं
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लखीमपुर खीरी। पिछले कुछ दिनों से तापमान लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप से पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों जब भी घर से बाहर निकलें तो पानी पीकर निकलें। इससे लू लगने की संभावना कम हो जाती है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) डॉ. एसके सिंह बताते हैं कि इस समय तापमान 45 डिग्री के आसपास है। तेज धूप की तपिश से हवा भी झुलसा रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। अचानक घर से बाहर पैदल एवं बाइक से निकलकर धूप में जाना खतरनाक साबित हो सकता है। गर्म हवा लगने से शरीर का पानी सूख जाता है। इससे पानी की कमी होने से हीट स्ट्रोक एवं डिहाइड्रेशन होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए गर्मी के दिनों में पानी खूब पीयें। हो सके तो हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ का सेवन करते रहें। दोपहर में यदि निकलना बेहद जरूरी हो तो धूप से बचने के लिए छाता लगाकर निकलें या फिर गमछा आदि से सिर और चेहरे को पूरी तरह से ढककर गर्म हवा से सुरक्षित रखें।
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हीट स्ट्रोक होने पर इस तरह करें बचाव
1. फल एवं गन्ने का जूस, नारियल पानी का प्रयोग कराएं।
2. कच्चे आम को भूनकर पना बनाकर पिलाएं, आम के गूदे में इलेक्ट्रोलाइट होता है। यह शरीर में खनिज तत्वों की रिकवरी करता है।
3. नीबू का रस एवं चीनी नमक का घोल बनाकर पिलाएं।
4. छाछ एवं दही का प्रयोग कराएं।

हीट स्ट्रोक के लक्षण
1. शुरूआत में पेट एवं मांसपेशियों में खिंचाव जैसा महसूस हो सकता है।
2. बेचैनी होने के साथ सोचने-समझने की क्षमता बिगड़ जाती है।
3. शरीर गर्म हो जाता है और ऊर्जा की कमी महसूस होने के साथ थकान महसूस होती है।
4. सिरदर्द होने के साथ उल्टी हो सकती है। बेहोशी तक आ सकती है।
5. सांस और दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

इस तरह करें बचाव
1. गर्मी में जूस एवं तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन करें।
2. दिन भर में कम से कम आठ से 10 गिलास पानी पीएं।
3. शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें और दोपहर में घर से निकलने से बचें।
4. गर्मी में बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करने से बचें।
5. कैफीन और एल्कोहल से दूर रहें।
6. धूप से बचने के लिए छाता, गमछा, दुपट्टा एवं हैट का इस्तेमाल करें, जिससे सूरज की सीधी किरणों से बचाव हो सके।
7. अचानक ठंडे से गर्म तापमान में या गर्म से ठंडे तापमान में न जाएं।

बच्चा सुस्त हो तो चिकित्सक को दिखाएं
तेज धूप और लू से बच्चों में डिहाड्रेशन जल्दी होता है। ऐसे में जैसे ही उल्टी-दस्त एवं बुखार आए तो अस्पताल लाकर दिखाएं। दोपहर के समय बच्चों को धूप में बाहर न निकलने दें। यदि किसी कारण वश निकला ही पड़े तो बच्चे को गर्म हवा और सीधी धूप की किरणों से बचाने के लिए छाता लेकर निकलें। इसके अलावा थोड़ी थोड़ी देर पर पानी भी पिलाते रहें।
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- डॉ. आरपी वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ

तेज गर्मी बिगाड़ देती है शरीर का कूलिंग सिस्टम
डॉ. विजय प्रकाश वर्मा बताते हैं कि ज्यादा गर्मी या तापमान, पसीने के रूम में शरीर से बाहर निकलता है, लेकिन हीट स्ट्रोक होने पर शरीर की आंतरिक कूलिंग सिस्टम बिगड़ जाता है। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती है। सामान्य तौर पर शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट होता है। तेज गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है और यह 100 के आसपास पहुंच जाता है, लेकिन 102 डिग्री तक पहुंचने पर यह खतरनाक हो जाता है। कई बार ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति की मानसिक स्थिति खराब हो जाती है और वह अपने में ही बड़बड़ाने लगता है।
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