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प्राकृतिक संपदा से भरपूर जिले में प्रदूषण का जहर

Thu, 04 Jun 2015 06:54 PM IST
लखीमपुर-खीरी।
लखीमपुर-खीरी। Updated Thu, 04 Jun 2015 06:54 PM IST
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Rich natural resources in the district of pollution poisoning
पर्यावरण के लिहाज से खीरी जिले के लोग बेहद खुशकिस्मत हैं। 7680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले खीरी जिले का 1735 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हरे-भरे जंगलों से आच्छादित है। जंगलों में स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्यजीव, विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षी और नदियों में मिलने वाले जलीय जीव जिले की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। हिमालय की तलहटी में बसे इस जिले में आबादी के बढ़ते दबाव के  कारण अब प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।
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अपनी प्राकृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता की कमी और  विलासिता पूर्ण जीवन की ललक के चलते लोग जिले की जलवायु में जहर घोल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो गनीमत है लेकिन शहरी क्षेत्र में हालत दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। जेनरेटरों और गाड़ियों के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। नदियों में कूड़ा, गंदा पानी और औद्योगिक कचरा पड़ने से पानी विषैला हो रहा है। शहरों में जेनरेटरों के शोर के अलावा प्रचार वाहनों के शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से लोग बहरे हो रहे हैं।
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औद्योगिक कचरे से नदियों का पानी हो रहा जहरीला    
शहर के पास से होकर गुजरने वाली उल्ल और कंडवा नदियों में शहर के कचरे के अलावा औद्योगिक इकाइयों का कचरा डाला जा रहा है। इससे इन नदियों का पानी जहरीला हो गया है। पर्यावरण विज्ञानियों का कहना है कि उल्ल और कंडवा नदियों का पानी पीना तो दूर हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है। इन नदियों से मछलियां और दूसरे जलीय जीव खत्म हो गए हैं। कई बार इन नदियों का पानी पीने से मवेशियों की मौत हो चुकी है।
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पॉलीथिन से बंजर हो रही धरती
पॉलीथिन के इस्तेमाल से जिले की धरती बंजर हो रही है। कई शहरों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लग गया लेकिन जिले में अब तक इस पर रोक नहीं लग सकी है। पॉलीथिन भूमि के अंदर जाकर जमीन को बंजर बना रही है तो नालियों में जाकर पानी के निकास को रोक रही है। खाने पीने की चीजें पॉलीथिन में लाने के बाद फेंकने से अक्सर जानवर इसे खा जाते हैं। इससे आवारा घूमने वाले कई जानवरों की मौत हो चुकी है।
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जहरीले धुएं से बीमार हो रहे लोग
वाहनों की बढ़ती संख्या, और इनसे निकलने वाले धुएं के अलावा शहर में हजारों की संख्या में चलने वाले जेनरेटरों का धुआं वायुमंडल को जहरीला बना रहा है। शहर में कई जगह तो एक साथ कई-कई जेनरेटर रखे हैं। बिजली जाने पर जब यह जेनरेटर चलते हैं तो धुएं के कारण लोगों को सांस तक लेना मुश्किल हो जाता है। वायु प्रदूषण के चलते यहां लोग श्वांस रोगी होते जा रहे हैं।

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शहर में कम नहीं है ध्वनि प्रदूषण
शहर में बड़ी संख्या में चलने वाले जेनरेटरों के शोर, वाहनों के हार्न और सड़कों पर घूमने वाले प्रचार वाहनों का शोर लोगों को बहरा बना रहा है। शहर की सड़कों पर गुजरते समय इतना शोर होता है कि मोबाइल पर बात करना तक मुश्किल हो जाता है। इस शोर के कारण शहर के लोगों की सुनने की शक्ति कम होती जा रही है।
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