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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का सांप
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दुधवा में के घास मैदान में मिला दुर्लभ सांप। स्रोत-वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व का किशनपुर अभयारण्य एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बना है। यहां 12 मई को लंबी थूथन वाला वाइन स्नेक अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्टि्रस की ब्राउन मॉर्फ प्रजाति (वाइन स्नेक) की खोज की गई है। भारतवर्ष में पहली बार इसकी जीवित उपस्थिति दुधवा में दर्ज की गई है।
यह दुर्लभ और छिपकर रहने वाली प्रजाति की वास भूमि और जंगल की मिली-जुली पारिस्थितिकी में देखा गया। इसका फोटो भी लिया गया। उप्र में इस प्रजाति का दूसरा जीवित दस्तावेजीकरण है। पहली बार इसकी ग्रीन मॉर्फ प्रजाति वर्ष 2024 में दक्षिण सोनारीपुर रेंज में देखी गई थी।
ब्राउन मॉर्फ प्रजाति के इस दुर्लभ सांप को किशनपुर अभयारण्य में बाघ निगरानी की गश्त के दौरान देखा गया। इस सांप की खोज करने वाली टीम में दुधवा के जीव विज्ञानी विपिन कपूर सैनी, अपूर्व गुप्ता, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ जीव विज्ञानी रोहित रवी, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. तल्हा, फार्मासिस्ट संदीप, फील्ड स्टॉफ भागीराम और नबी शेरखान शामिल हैं।
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गश्त के दौरान विपिन कपूर सैनी ने इस पतले और लंबे शरीर वाले सांप को घास मैदान के किनारे से जंगल की ओर जाते हुए देखा। टीम ने इसका फोटोग्रॉफिक डाक्यूमेंटेशन और स्वास्थ्य परीक्षण किया। स्वास्थ्य परीक्षण में सांप पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। बाद में इसे किशनपुर अभयारण्य के वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद अयूब की निगरानी में रखा गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने कहा कि दुधवा केवल बाघ, हाथी या गैंडे तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम अनदेखी और पारिस्थितिकी दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियों का खजाना है। अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्टि्रस की यह ब्राउन मॉर्फ प्रजाति इससे पहले भारत में कहीं दर्ज नहीं की गई।
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यह दुर्लभ और छिपकर रहने वाली प्रजाति की वास भूमि और जंगल की मिली-जुली पारिस्थितिकी में देखा गया। इसका फोटो भी लिया गया। उप्र में इस प्रजाति का दूसरा जीवित दस्तावेजीकरण है। पहली बार इसकी ग्रीन मॉर्फ प्रजाति वर्ष 2024 में दक्षिण सोनारीपुर रेंज में देखी गई थी।
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ब्राउन मॉर्फ प्रजाति के इस दुर्लभ सांप को किशनपुर अभयारण्य में बाघ निगरानी की गश्त के दौरान देखा गया। इस सांप की खोज करने वाली टीम में दुधवा के जीव विज्ञानी विपिन कपूर सैनी, अपूर्व गुप्ता, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ जीव विज्ञानी रोहित रवी, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. तल्हा, फार्मासिस्ट संदीप, फील्ड स्टॉफ भागीराम और नबी शेरखान शामिल हैं।
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गश्त के दौरान विपिन कपूर सैनी ने इस पतले और लंबे शरीर वाले सांप को घास मैदान के किनारे से जंगल की ओर जाते हुए देखा। टीम ने इसका फोटोग्रॉफिक डाक्यूमेंटेशन और स्वास्थ्य परीक्षण किया। स्वास्थ्य परीक्षण में सांप पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। बाद में इसे किशनपुर अभयारण्य के वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद अयूब की निगरानी में रखा गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने कहा कि दुधवा केवल बाघ, हाथी या गैंडे तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम अनदेखी और पारिस्थितिकी दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियों का खजाना है। अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्टि्रस की यह ब्राउन मॉर्फ प्रजाति इससे पहले भारत में कहीं दर्ज नहीं की गई।

दुधवा में के घास मैदान में मिला दुर्लभ सांप। स्रोत-वन विभाग।