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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में फल-फूल रहीं जीव और वनस्पतियों की दुर्लभ प्रजातियां
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दुधवा टाइगर रिजर्व में स्वच्छंद विचरण करता गैंडा। स्रोत : वन विभाग
लखीमपुर खीरी। बाघों और गैंडों का घर माने जाने वाले दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीव और वनस्पतियां भी फल फूल रहे हैं। देश में दुधवा ही ऐसा इकलौता वन क्षेत्र है, जहां हिरणों की पांच प्रजातियां तो बहुतायत में मिलती ही हैं, पक्षियों और सरीसृपों की कई विलुप्तप्राय प्रजातियां और दुर्लभ वनस्पतियां भी यहां पाई जाती हैं।
तकरीबन 1284 वर्ग किलोमीटर में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वन्यजीव विहार और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार का क्षेत्र आता है। वैसे तो दुधवा टाइगर रिजर्व का मुख्य आकर्षण बाघ हैं। साथ ही यहां पर गैंडों के पुनर्वासन की चल रही परियोजना भी वन्यजीव प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं। बाघ और गैंडों के अलावा भी दुधवा में भालू, हाथी समेत कई दुर्लभ वन्यजीव देखने को मिलते हैं।
बंगाल फ्लोरिकन है दुधवा की विशेष धरोहर
वैसे तो दुधवा टाइगर रिजर्व में पक्षियों की करीब 450 प्रजातियां पाई जाती हैं, इसमें 10 प्रजातियां ऐसी हैं जो विलुप्तप्राय श्रेणी में आती हैं। इनमें विलुप्तप्राय बंगाल फ्लोरिकन दुधवा की खास धरोहर है। इनकी संख्या दुधवा में कितनी है इसका ठीकठाक आंकलन तो नहीं है, पर समय-समय पर इस दुर्लभ पक्षी की उपस्थिति दुधवा में दर्ज की गई है।
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गिद्धों की छह विलुप्तप्राय प्रजातियां भी दुधवा में
दो वर्ष पहले वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने दुधवा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की छह विलुप्तप्राय प्रजातियों की उपस्थिति को रिकॉर्ड किया था। इसमें इंडियन वल्चर, व्हाइट राम्पड, स्लेंडर बिल्ड, हिमालयन, सिनेरियस और यूरेशियन ग्रिफॉन शामिल हैं।
सरीसृपों का भी भरा पूरा कुनबा
दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ सरीसृपों का भी भरा पूरा कुनबा है। मगरमच्छ व घड़ियाल के साथ ही यहां पर कछुआ की 15 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो सभी दुर्लभ श्रेणी में आती हैं। इतना ही नहीं भारतवर्ष में पाई जाने वाली सर्प की 270 प्रजातियों में 15 प्रजातियां दुधवा में पाई जाती हैं। हाल ही में दो और नई प्रजातियां दुधवा में सांपों की दर्ज की गई हैं।
दुर्लभ वनस्पतियां भी हैं दुधवा में
दुर्गा टाइगर रिजर्व वैसे तो साल के घने जंगलों में फैला हुआ है, पर यहां कई दुर्लभ वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। इसमें ग्राउंड ऑर्किड और यूलोपिया प्रमुख हैं, जो विलुप्तप्राय वनस्पति की श्रेणी में आती हैं। दुधवा में इनकी उपस्थिति यहां की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ और गैंडा के अलावा दुर्लभ व विलुप्तप्राय वन्यजीवों की करीब 12 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें प्रमुख बंगाल फ्लोरिकन पक्षी और ग्रीन वाइन व ब्राउन वाइन सर्प प्रजातियां भी शामिल हैं। दुधवा में वन्यजीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के पूरे प्रयास हो रहे हैं। यहां गैंडों के पुनर्वासन की दो परियोजनाएं चल रही हैं।
डॉ. एच राजामोहन, एनफडी दुधवा टाइगर रिजर्व
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तकरीबन 1284 वर्ग किलोमीटर में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वन्यजीव विहार और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार का क्षेत्र आता है। वैसे तो दुधवा टाइगर रिजर्व का मुख्य आकर्षण बाघ हैं। साथ ही यहां पर गैंडों के पुनर्वासन की चल रही परियोजना भी वन्यजीव प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं। बाघ और गैंडों के अलावा भी दुधवा में भालू, हाथी समेत कई दुर्लभ वन्यजीव देखने को मिलते हैं।
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बंगाल फ्लोरिकन है दुधवा की विशेष धरोहर
वैसे तो दुधवा टाइगर रिजर्व में पक्षियों की करीब 450 प्रजातियां पाई जाती हैं, इसमें 10 प्रजातियां ऐसी हैं जो विलुप्तप्राय श्रेणी में आती हैं। इनमें विलुप्तप्राय बंगाल फ्लोरिकन दुधवा की खास धरोहर है। इनकी संख्या दुधवा में कितनी है इसका ठीकठाक आंकलन तो नहीं है, पर समय-समय पर इस दुर्लभ पक्षी की उपस्थिति दुधवा में दर्ज की गई है।
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गिद्धों की छह विलुप्तप्राय प्रजातियां भी दुधवा में
दो वर्ष पहले वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने दुधवा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की छह विलुप्तप्राय प्रजातियों की उपस्थिति को रिकॉर्ड किया था। इसमें इंडियन वल्चर, व्हाइट राम्पड, स्लेंडर बिल्ड, हिमालयन, सिनेरियस और यूरेशियन ग्रिफॉन शामिल हैं।
सरीसृपों का भी भरा पूरा कुनबा
दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ सरीसृपों का भी भरा पूरा कुनबा है। मगरमच्छ व घड़ियाल के साथ ही यहां पर कछुआ की 15 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो सभी दुर्लभ श्रेणी में आती हैं। इतना ही नहीं भारतवर्ष में पाई जाने वाली सर्प की 270 प्रजातियों में 15 प्रजातियां दुधवा में पाई जाती हैं। हाल ही में दो और नई प्रजातियां दुधवा में सांपों की दर्ज की गई हैं।
दुर्लभ वनस्पतियां भी हैं दुधवा में
दुर्गा टाइगर रिजर्व वैसे तो साल के घने जंगलों में फैला हुआ है, पर यहां कई दुर्लभ वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। इसमें ग्राउंड ऑर्किड और यूलोपिया प्रमुख हैं, जो विलुप्तप्राय वनस्पति की श्रेणी में आती हैं। दुधवा में इनकी उपस्थिति यहां की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ और गैंडा के अलावा दुर्लभ व विलुप्तप्राय वन्यजीवों की करीब 12 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें प्रमुख बंगाल फ्लोरिकन पक्षी और ग्रीन वाइन व ब्राउन वाइन सर्प प्रजातियां भी शामिल हैं। दुधवा में वन्यजीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के पूरे प्रयास हो रहे हैं। यहां गैंडों के पुनर्वासन की दो परियोजनाएं चल रही हैं।
डॉ. एच राजामोहन, एनफडी दुधवा टाइगर रिजर्व