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Lakhimpur Kheri News: बेलरायां रेंज में दिखा दुर्लभ कॉमन ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक
Sat, 16 May 2026 01:02 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 16 May 2026 01:02 AM IST
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दुधवा की बेलरायां रेंज में दिखा दुर्लभ कॉमन ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक। स्रोत : दुधवा प्रशासन
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की बेलरायां रेंज में दुर्लभ प्रजाति का कॉमन ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक देखा गया है। वन्य जीव विशेषज्ञ इसे दुधवा की समृद्ध जैव-विविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं।
दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन में कार्यरत युवा मोटीवेटर नाजरुन निशा बेलरायां रेंज के ग्रासलैंड क्षेत्र में पक्षियों का सर्वे कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर इस दुर्लभ सर्प पर पड़ी। उन्होंने इसके फोटो और वीडियो सुरक्षित किए। बाद में अध्ययन के बाद इसकी पहचान कॉमन ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक के रूप में हुई।
तांबे जैसे भूरे रंग और पतले शरीर वाला यह सर्प पेड़ों पर रहने और तेज फुर्ती के लिए जाना जाता है। जानकारों के अनुसार, यह प्रजाति बेहद शर्मीली होती है और वातावरण में आसानी से घुल-मिल जाती है, जिससे इसे देख पाना काफी मुश्किल होता है।
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यह सर्प आक्रामक नहीं होता और छोटे कीटों व छिपकलियों का शिकार कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
फील्ड निदेशक डॉ. एच. राजामोहन ने कहा कि गश्त और ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों द्वारा जैव-विविधता पर रखी जा रही नजर वन्य जीव संरक्षण के अभिलेखीकरण में मददगार है। उपनिदेशक जगदीश आर ने कहा कि दुधवा का जंगल वन्य जीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बना हुआ है।
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दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन में कार्यरत युवा मोटीवेटर नाजरुन निशा बेलरायां रेंज के ग्रासलैंड क्षेत्र में पक्षियों का सर्वे कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर इस दुर्लभ सर्प पर पड़ी। उन्होंने इसके फोटो और वीडियो सुरक्षित किए। बाद में अध्ययन के बाद इसकी पहचान कॉमन ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक के रूप में हुई।
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तांबे जैसे भूरे रंग और पतले शरीर वाला यह सर्प पेड़ों पर रहने और तेज फुर्ती के लिए जाना जाता है। जानकारों के अनुसार, यह प्रजाति बेहद शर्मीली होती है और वातावरण में आसानी से घुल-मिल जाती है, जिससे इसे देख पाना काफी मुश्किल होता है।
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यह सर्प आक्रामक नहीं होता और छोटे कीटों व छिपकलियों का शिकार कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
फील्ड निदेशक डॉ. एच. राजामोहन ने कहा कि गश्त और ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों द्वारा जैव-विविधता पर रखी जा रही नजर वन्य जीव संरक्षण के अभिलेखीकरण में मददगार है। उपनिदेशक जगदीश आर ने कहा कि दुधवा का जंगल वन्य जीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बना हुआ है।