{"_id":"69dd363c337f33e45009fe47","slug":"rain-becomes-a-disaster-wheat-rots-in-the-fields-lakhimpur-news-c-4-1-bly1040-863248-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: बारिश बनी आफत, खेतों में सड़ रहा गेहूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: बारिश बनी आफत, खेतों में सड़ रहा गेहूं
Tue, 14 Apr 2026 12:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 14 Apr 2026 12:00 AM IST
विज्ञापन
बांकेगंज ब्लॉक में भीगी फसल को देखता किसान। संवाद
- फोटो : llll
बांकेगंज। अप्रैल में लगातार चार बार हुई बेमौसम बारिश ने क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल भीग जाने से मड़ाई का काम प्रभावित हो गया है, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
ब्लॉक क्षेत्र के बूधरपुर, खंजनपुर, महोलिया, ग्रंट नंबर तीन, नरगढ़ी, जटपुरा और कुकरा समेत कई गांवों में करीब 500 एकड़ गेहूं की फसल जलभराव की चपेट में आ गई। खेतों में घुटनों तक पानी भरने से फसल पूरी तरह भीग गई। किसानों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद तहसील प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
बूधरपुर गांव के किसान बिहारी लाल ने बताया कि उन्हें मजबूर होकर दो एकड़ गेहूं की फसल जोतनी पड़ी। गेंदन लाल, प्रमोद कुमार, चेतराम, श्रीराम, लालाराम, रामस्वरूप, अमर सिंह, राजाराम, गुरविंदर सिंह और नेतराम सहित कई किसानों ने बताया कि लगातार बारिश से फसल गिर गई है और अब धूप निकलने पर गेहूं की नरई काली पड़ने लगी है, जिससे दानों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
खेतों में भरे पानी और नमी के कारण कटाई और मड़ाई का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र खीरी के विशेषज्ञ डॉ. सुहैल के अनुसार, बारिश से भीगी गेहूं की फसल की गुणवत्ता में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। साथ ही ऐसे गेहूं के बीज अगले सीजन में बोने पर अंकुरण भी कमजोर रहेगा, जिसका असर भविष्य की खेती पर पड़ेगा।
विज्ञापन
ब्लॉक क्षेत्र के बूधरपुर, खंजनपुर, महोलिया, ग्रंट नंबर तीन, नरगढ़ी, जटपुरा और कुकरा समेत कई गांवों में करीब 500 एकड़ गेहूं की फसल जलभराव की चपेट में आ गई। खेतों में घुटनों तक पानी भरने से फसल पूरी तरह भीग गई। किसानों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद तहसील प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
बूधरपुर गांव के किसान बिहारी लाल ने बताया कि उन्हें मजबूर होकर दो एकड़ गेहूं की फसल जोतनी पड़ी। गेंदन लाल, प्रमोद कुमार, चेतराम, श्रीराम, लालाराम, रामस्वरूप, अमर सिंह, राजाराम, गुरविंदर सिंह और नेतराम सहित कई किसानों ने बताया कि लगातार बारिश से फसल गिर गई है और अब धूप निकलने पर गेहूं की नरई काली पड़ने लगी है, जिससे दानों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
खेतों में भरे पानी और नमी के कारण कटाई और मड़ाई का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र खीरी के विशेषज्ञ डॉ. सुहैल के अनुसार, बारिश से भीगी गेहूं की फसल की गुणवत्ता में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। साथ ही ऐसे गेहूं के बीज अगले सीजन में बोने पर अंकुरण भी कमजोर रहेगा, जिसका असर भविष्य की खेती पर पड़ेगा।