{"_id":"a5bd09bed1a70de024d64e48084c9f47","slug":"purnagiri-darshnatharthion-sai-trainain-full-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्णागिरि दर्शनार्थियों से ट्रेनें फुल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्णागिरि दर्शनार्थियों से ट्रेनें फुल
बांकेगंज।
Updated Tue, 10 Mar 2015 04:07 PM IST
विज्ञापन
होली निपटते ही टनकपुर में ऊंचे पहाड़ों पर विराजमान मां पूर्णागिरि के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कस्बा सहित क्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ों लोग मां पूर्णागिरि के दर्शन को जा रहे हैं। इससे ट्रेनों में खासी भीड़ है। क्षेत्र के किसान गेहूं की फसल काटने से पहले मां पूर्णागिरी के दर्शन करने जाते हैं।
पौराणिक परंपरा के चलते क्षेत्र के किसान, व्यापारी और आमजन होली जलने के बाद दूसरे दिन जत्थों में बाइक, साइकिल, बस, ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों से परिवार सहित पूर्णागिरी माता के दरबार में जाने के लिए निकल पड़ते हैं। जहां किसान पूजा-अर्चना के बाद मां पूर्णागिरि के चरणों में माथा टेक कर दैवीय आपदा से अपनी फसलों की रक्षा की कामना करते हैं।
छोटी काशी गोला में जलाभिषेक की है परंपरा
किसान मां पूर्णागिरि के दर्शन के बाद छोटी काशी स्थित पौराणिक शिवमंदिर में जलाभिषेक की परंपरा का निर्वहन करते हैं। उनका मानना है कि मां के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद वापसी में भगवान शंकर के मंदिर में जलाभिषेक के बाद ही यात्रा पूर्ण होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पौराणिक परंपरा के चलते क्षेत्र के किसान, व्यापारी और आमजन होली जलने के बाद दूसरे दिन जत्थों में बाइक, साइकिल, बस, ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों से परिवार सहित पूर्णागिरी माता के दरबार में जाने के लिए निकल पड़ते हैं। जहां किसान पूजा-अर्चना के बाद मां पूर्णागिरि के चरणों में माथा टेक कर दैवीय आपदा से अपनी फसलों की रक्षा की कामना करते हैं।
विज्ञापन
छोटी काशी गोला में जलाभिषेक की है परंपरा
किसान मां पूर्णागिरि के दर्शन के बाद छोटी काशी स्थित पौराणिक शिवमंदिर में जलाभिषेक की परंपरा का निर्वहन करते हैं। उनका मानना है कि मां के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद वापसी में भगवान शंकर के मंदिर में जलाभिषेक के बाद ही यात्रा पूर्ण होती है।
विज्ञापन