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अब बंदियों के लिए महंगे रेट पर खरीदेंगे राशन
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 23 Jul 2015 07:17 PM IST
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शासन ने राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को प्रदेश की जेलों में राशन सप्लाई करने का टेंडर दे दिया है। जिसके बाद बाजार से राशन की खरीदारी पर रोक लग गई है। निगम का टेंडर से होने से कारागार प्रशासन को बंदियों के लिए महंगे रेट पर गेेहूं और चावल खरीदना पड़ेगा।
वर्ष 2014-15 का टेंडर समाप्त होने के बाद राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से चार माह तक राशन की खरीदारी नहीं हुई। बंदियों के लिए बाजार से राशन मंगाया गया। एक अधिकारी के मुताबिक बाजार में गेहूं 14 सौ रुपये से 15 सौ रुपये के बीच मिल जाता है। चावल 19 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाता था लेकिन चार माह बाद निगम का टेंडर होने से कारागार प्रशासन को गेहूं 2003 रुपये और चावल 2335 रुपये में खरीदना पड़ेगा। खास बात यह है कि निगम से मंहगे रेट पर राशन की खरीदारी करने के लिए कारागार प्रशासन को निर्देश दिया गया है। जिसके तहत अब बाजार से राशन खरीदने पर रोक लगा दी गई है। शासन के इस निर्देश सवाल खड़े हो गए हैं कि बंदियों के लिए जब बाजार से सस्ते दर पर वहीं राशन खरीदा जा सकता है तो फिर राज्य कर्मचारी कल्याण निगम का टेंडर कर मंहगे रेट पर राशन की खरीदारी के निर्देश क्यों दिए गए। कहा गया है कि कारागार प्रशासन को हर महीने निगम से गेहूं और चावल की सप्लाई मिल जाया करेगी। जिसके एवज में कारागार अधिकारियों को राशन सप्लाई के हिसाब से निगम द्वारा तय आढ़ती को भुगतान करना है। हालांकि इस सवाल पर जेल अधिकारी कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं जबकि पिछले वर्षों में कई बार घटिया क्वालिटी की वजह से निगम के राशन को कारागार से वापस भी किया जा चुका है। इस बाबत जेलर ज्ञानप्रकाश का कहना है कि राज्य कर्मचारी कल्याण निगम पहले से कारागार में राशन सप्लाई कर रहा है। बीच में टेंडर अवधि समाप्त होने की वजह से तीन-चार महीने सप्लाई बंद रही। इस दौरान विपणन अधिकारी की मौजूदगी में बाजार से राशन की खरीदारी की गई। अब फिर से राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से राशन लेने का निर्देश दिया गया है।
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वर्ष 2014-15 का टेंडर समाप्त होने के बाद राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से चार माह तक राशन की खरीदारी नहीं हुई। बंदियों के लिए बाजार से राशन मंगाया गया। एक अधिकारी के मुताबिक बाजार में गेहूं 14 सौ रुपये से 15 सौ रुपये के बीच मिल जाता है। चावल 19 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाता था लेकिन चार माह बाद निगम का टेंडर होने से कारागार प्रशासन को गेहूं 2003 रुपये और चावल 2335 रुपये में खरीदना पड़ेगा। खास बात यह है कि निगम से मंहगे रेट पर राशन की खरीदारी करने के लिए कारागार प्रशासन को निर्देश दिया गया है। जिसके तहत अब बाजार से राशन खरीदने पर रोक लगा दी गई है। शासन के इस निर्देश सवाल खड़े हो गए हैं कि बंदियों के लिए जब बाजार से सस्ते दर पर वहीं राशन खरीदा जा सकता है तो फिर राज्य कर्मचारी कल्याण निगम का टेंडर कर मंहगे रेट पर राशन की खरीदारी के निर्देश क्यों दिए गए। कहा गया है कि कारागार प्रशासन को हर महीने निगम से गेहूं और चावल की सप्लाई मिल जाया करेगी। जिसके एवज में कारागार अधिकारियों को राशन सप्लाई के हिसाब से निगम द्वारा तय आढ़ती को भुगतान करना है। हालांकि इस सवाल पर जेल अधिकारी कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं जबकि पिछले वर्षों में कई बार घटिया क्वालिटी की वजह से निगम के राशन को कारागार से वापस भी किया जा चुका है। इस बाबत जेलर ज्ञानप्रकाश का कहना है कि राज्य कर्मचारी कल्याण निगम पहले से कारागार में राशन सप्लाई कर रहा है। बीच में टेंडर अवधि समाप्त होने की वजह से तीन-चार महीने सप्लाई बंद रही। इस दौरान विपणन अधिकारी की मौजूदगी में बाजार से राशन की खरीदारी की गई। अब फिर से राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से राशन लेने का निर्देश दिया गया है।
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