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Lakhimpur Kheri News: यूपी की पराली को उपयोगी बनाने में पंजाब के कारोबारी आगे

Tue, 31 Dec 2024 11:47 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2024 11:47 PM IST
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Punjab businessmen ahead in making UP's stubble useful
पराली को एकत्र करने वाली रैक मशीन। संवाद
लखीमपुर खीरी। यूपी के पराली प्रबंधन में पंजाब का अहम रोल देखने को मिल रहा है। पंजाब के कारोबारी यूपी में आकर अपनी आधुनिक मशीनों की मदद से पराली एकत्र कर अपने प्रदेश ले जाकर उससे मुनाफा कमा रहे हैं। पंजाब की आधुनिक मशीनें जिले के अलग-अलग हिस्सों में अपना काम कर रहीं हैं। जब से पंजाब के कारोबारियों का दखल हुआ है तब से पराली जलाने की घटनाएं भी कम हो रहीं हैं। वहां के कारोबारी इनसे कप, प्लेट, कटोरी, ग्लास और कंप्रेस बायोगैस बनाते हैं।
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कृषि यंत्रों में बेलर और रैक मशीन पराली प्रबंधन में काफी अहम रोल अदा कर रही है। धान या गन्ने की फसल कटाई के बाद खेतों में फैली पराली या पताई को रैक मशीन लाइनों में इकट्ठा करती है। इसके बाद बेलर मशीन पराली या पताई के 20 से 30 किलो तक के छोटे-छोटे बंडल तैयार करती है।
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बंडल एकत्र होने के बाद ट्राॅला से उनको एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया से खेत की अच्छी तरह सफाई हो जाती है। एक एकड़ खेत की पराली के एक घंटे में बंडल बन जाते हैं। पंजाब से आए कारोबारियों ने बताया कि वह इनको फैक्टरी व निजी कंपनियों को बेचते हैं। पंजाब में इसकी काफी मांग है। ज्यादातर तो इसका इस्तेमाल सीबीजी (कंप्रेस बायोगैस) प्लांट के लिए होता है। वहीं कुछ जगह कप, प्लेट, कटोरी, ग्लास आदि वस्तुएं तैयार की जाती हैं। (संवाद)
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किसानों का एक रुपया भी खर्च नहीं
नकहा ब्लाॅक के ठकुरनपुर सहित कई गांवों के किसानों ने बताया कि इन आधुनिक मशीनों से उन्हें काफी सहूलियत मिली है। पराली प्रबंधन में उनका एक रुपया भी खर्च नहीं होता। अब तक उनको पराली प्रबंधन की काफी चिंता रहती थी। कहीं पराली जलने की घटना हो जाए तो उन पर कार्रवाई हो जाती थी, लेकिन जब से पंजाब के लोग यह मशीनें लेकर आए हैं, तब से काफी सहूलियत हो गई है।

नहीं निकलता ढुलाई का खर्चा, कैसे चलाएं मशीनें
लखीमपुर के साथ ही यूपी के लगभग सभी जिलों में आधुनिक मशीनें हैं, लेकिन लागत अधिक और उचित भाव न मिलने से सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। कृषि अनुदान योजना के तहत जिले के दो किसानों को बेलर और रैक मशीन उपलब्ध कराई गई है, लेकिन ढुलाई का खर्चा तक नहीं निकल पाता। अनुदान के अलावा जिले के चार से पांच किसानों ने अपने निजी खर्चे पर इसको खरीदा है, लेकिन वह भी फायदा नहीं उठा पा रहे।

सीबीजी प्लांट लगे तो बने काम
बदायूं में सीबीजी (कंप्रेस बायोगैस) प्लांट है। प्लांट में पराली और पताई से गैस बनाई जाती है। अगर यह प्लांट जिले में भी लग जाए तो यहां भी पराली की समस्या खत्म हो जाएगी। किसान चाहता है कि उनके खेत में होनी वाली पराली का प्रबंधन हो जाए, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता। कुछ किसान तो पराली में आग लगा देते हैं, जिनको बाद में कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है।


जिले में पराली जलने की घटनाओं में काफी अंकुश लगा है। अब तक 193 सूचना मिलीं, जिसमें 111 सही पाई गईं। अब तक 2.05 लाख रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। जिले के दो किसानों को अनुदान पर बेलर और रैक मशीनें दी जा चुकी हैं। सात से आठ किसान खुद की मशीनें खरीदे हैं, लेकिन लागत नहीं मिल पा रही है। -अरविंद मोहन मिश्रा, उपकृषि निदेशक

पराली को एकत्र करने वाली रैक मशीन। संवाद

पराली को एकत्र करने वाली रैक मशीन। संवाद

पराली को एकत्र करने वाली रैक मशीन। संवाद

पराली को एकत्र करने वाली रैक मशीन। संवाद

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