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फिर बीत गए पांच साल, रोडवेज को नहीं मिल सकी जमीन
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रोडवेज बस अड्डे पर खड़ी बसें
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। पांच साल बीत गए, फिर से मतदान की तिथि करीब आ गई है। मगर, इस बार भी रोडवेज बस अड्डे को जमीन दिलाने का मुद्दा चुनाव से गायब है। जबकि शहर के बीच स्थित रोडवेज बस अड्डा रोजाना नगरवासियों के लिए मुसीबत बन रहा है। बस अड्डे में इतनी जगह तक नहीं है कि वह वहां पर खड़ी हो सकें। वर्कशॉप के अभाव में जिला मुख्यालय बस अड्डा अभी तक उधार की बसों से संचालित है।
चुनाव की बेला आते ही एक बार फिर शहरवासियों की जुबान पर रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने की चर्चा आम हो गई है। जहां भी लोग खड़े होते हैं, वहीं पर नगर के बीचों बीच स्थित बस अड्डे को शहर के बाहर किए जाने पर चर्चा होनी शुरू हो जाती है। व्यापारियों से लेकर युवाओं और महिलाओं का कहना है कि बस अड्डा अब शहर के बाहर जाना चाहिए।
क्योंकि इसकी वजह से बस अड्डे के बाहर ही नहीं, बल्कि खीरी रोड पर जगह-जगह जाम लगता है। बसों के फर्राटा भरने से अक्सर हादसों का डर बना रहता है। इतना ही नहीं, कई कई लोग बसों की चपेट में आकर जान तक गंवा चुके हैं। मगर, शहरवासियों के लिए मुसीबत बन चुके रोडवेज बस अड्डे को नगर के बाहर ले जाने के लिए न तो जिले के आला अफसर गंभीर हैं और न ही माननीय।
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माननीयों की बेरुखी बनी नगरवासियों की मुसीबत
ऐसा नहीं है कि बस अड्डे के सामने लगने वाली जाम में माननीय या अधिकारी नहीं फंसते। इसके बावजूद नगरवासियों को इससे छ़ुटकारा दिलाने के बाबत बेरुखी अपनाए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने एक दो बार प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहा। मगर, माननीय इस समस्या पर चुप्पी साधे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि माननीय चाहें तो इस समस्या से सदैव के लिए निजात मिल सकती है।
सालों से तलाशी जा रही पांच एकड़ जमीन
परिवहन निगम को पांच एकड़ जमीन की तलाश है, जिससे बस अड्डे के साथ वर्कशॉप बन सके। विभागीय लोगों का कहना है कि दिन पर दिन आबादी बढ़ रही है। इसके अनुसार बसों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मगर, वर्कशाप के अभाव में निगम की बसें नहीं मिल रही। इस कारण अभी तक रोडवेज बस अड्डा अनुबंधित बसों के सहारे चल रहा है। विभागीय बताते हैं कि काफी सालों से जमीन तलाशी जा रही है। इस दौरान कुछ जमीनें देखी भी गई। मगर, मानक के अनुसार न होने के कारण रिजक्ट हो गई।
अनुबंधित बस मालिकों की मनमानी बढ़ा रही मुसीबत
बस अड्डे से रोजाना करीब 65 बसों का संचालन होता है। मगर, रात नौ बजे के बाद न तो प्रदेश मुख्यालय के लिए बस है और न ही जिले सहित शाहजहांपुर, बरेली और पीलीभीत के लिए। कई बार रात में सवारियां तक होती हैं, लेकिन बस मालिक कोई न कोई बहाना बनाकर बस भेजने से मना कर देते हैं। अधिकारियों के दबाव बनाने पर तकनीकी खराबी या फिर ड्राइवर का न होना बता देते हैं। इससे रात नौ बजे के बाद जिले से प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचना आसान नहीं रहता।
रोडवेज बस अड्डा अब शहर से बाहर जाना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से खीरी रोड से निकलना मुश्किल हो जाता है। बस अड्डे के सामने अक्सर जाम लगी रहती है। इसके लिए माननीयों को ध्यान देना चाहिए। काजी जमीन अहमद, कचेहरी रोड
हर बार चुनाव आते ही विकास के बड़े बड़े वादे होने लगते हैं। मगर, रोडवेज बस अड्डे के लिए पर्याप्त जमीन दिलाने का मुद्दा हर बार गायब रहता है। शहर के बीच स्थित बस अड्डा नगरवासियों के लिए मुसीबत बन रहा है। - कृति अवस्थी एडवोकेट हाईकोर्ट, सेठघाट चौराहा
शहर के लिए रोडवेज बस अड्डा एक बड़ी समस्या है। इससे निजात मिलना बेहद जरूरी है। शहर के बाहर जमीन मिलने से वर्कशाप का निर्माण होने से निगम की बसें मिल सकेगी। इससे शहरवासियों की कई समस्याओं कम होंगी। - नीलम शर्मा गृहणी, शास्त्रीनगर
जिला मुख्यालय का बस अड्डा, फिर भी रात नौ बजे के बाद लखनऊ, सीतापुर के लिए एक बस तक नहीं है। अनुबंधित बसों का स्टाफ मनमानी कर यात्रियों के लिए मुसीबतें खड़ी करते हैं। निगम की बसें होने से यात्रियों की दिकक्तें कम होंगी। - पूनम मिश्रा बाजपेई कॉलेनी
रोडवेज बस अड्डे का शहर के बाहर जाना अत्यंत जरूरी है। इससे जाम की समस्या से तो निजात मिलेगी ही। इसी के साथ दुर्घटना होने की आशंका भी कम होगी। शहर के लिए रोडवेज बस अड्डा एक बड़ी समस्या बन चुका है। - जितेंद्र बरनवाल, कराटे प्रशिक्षक
डिपो में जितनी बसें लगी हैं उन्हें खड़ा करने के लिए वहां पर जगह तक नहीं है। अन्य जिलों से भी दर्जनों बसें आती है। जगह न होने से परिचालक बस रोड पर खडी कर यात्री बैठाते हैं, जिससे जाम लगती है। इसका एक ही उपाय है कि बस अड्डा शहर के बाहर के जाए। - प्रदीप जायसवाल, मेडिकल व्यापारी रोडवेज बस अड्डा रोड
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चुनाव की बेला आते ही एक बार फिर शहरवासियों की जुबान पर रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने की चर्चा आम हो गई है। जहां भी लोग खड़े होते हैं, वहीं पर नगर के बीचों बीच स्थित बस अड्डे को शहर के बाहर किए जाने पर चर्चा होनी शुरू हो जाती है। व्यापारियों से लेकर युवाओं और महिलाओं का कहना है कि बस अड्डा अब शहर के बाहर जाना चाहिए।
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क्योंकि इसकी वजह से बस अड्डे के बाहर ही नहीं, बल्कि खीरी रोड पर जगह-जगह जाम लगता है। बसों के फर्राटा भरने से अक्सर हादसों का डर बना रहता है। इतना ही नहीं, कई कई लोग बसों की चपेट में आकर जान तक गंवा चुके हैं। मगर, शहरवासियों के लिए मुसीबत बन चुके रोडवेज बस अड्डे को नगर के बाहर ले जाने के लिए न तो जिले के आला अफसर गंभीर हैं और न ही माननीय।
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माननीयों की बेरुखी बनी नगरवासियों की मुसीबत
ऐसा नहीं है कि बस अड्डे के सामने लगने वाली जाम में माननीय या अधिकारी नहीं फंसते। इसके बावजूद नगरवासियों को इससे छ़ुटकारा दिलाने के बाबत बेरुखी अपनाए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने एक दो बार प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहा। मगर, माननीय इस समस्या पर चुप्पी साधे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि माननीय चाहें तो इस समस्या से सदैव के लिए निजात मिल सकती है।
सालों से तलाशी जा रही पांच एकड़ जमीन
परिवहन निगम को पांच एकड़ जमीन की तलाश है, जिससे बस अड्डे के साथ वर्कशॉप बन सके। विभागीय लोगों का कहना है कि दिन पर दिन आबादी बढ़ रही है। इसके अनुसार बसों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मगर, वर्कशाप के अभाव में निगम की बसें नहीं मिल रही। इस कारण अभी तक रोडवेज बस अड्डा अनुबंधित बसों के सहारे चल रहा है। विभागीय बताते हैं कि काफी सालों से जमीन तलाशी जा रही है। इस दौरान कुछ जमीनें देखी भी गई। मगर, मानक के अनुसार न होने के कारण रिजक्ट हो गई।
अनुबंधित बस मालिकों की मनमानी बढ़ा रही मुसीबत
बस अड्डे से रोजाना करीब 65 बसों का संचालन होता है। मगर, रात नौ बजे के बाद न तो प्रदेश मुख्यालय के लिए बस है और न ही जिले सहित शाहजहांपुर, बरेली और पीलीभीत के लिए। कई बार रात में सवारियां तक होती हैं, लेकिन बस मालिक कोई न कोई बहाना बनाकर बस भेजने से मना कर देते हैं। अधिकारियों के दबाव बनाने पर तकनीकी खराबी या फिर ड्राइवर का न होना बता देते हैं। इससे रात नौ बजे के बाद जिले से प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचना आसान नहीं रहता।
रोडवेज बस अड्डा अब शहर से बाहर जाना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से खीरी रोड से निकलना मुश्किल हो जाता है। बस अड्डे के सामने अक्सर जाम लगी रहती है। इसके लिए माननीयों को ध्यान देना चाहिए। काजी जमीन अहमद, कचेहरी रोड
हर बार चुनाव आते ही विकास के बड़े बड़े वादे होने लगते हैं। मगर, रोडवेज बस अड्डे के लिए पर्याप्त जमीन दिलाने का मुद्दा हर बार गायब रहता है। शहर के बीच स्थित बस अड्डा नगरवासियों के लिए मुसीबत बन रहा है। - कृति अवस्थी एडवोकेट हाईकोर्ट, सेठघाट चौराहा
शहर के लिए रोडवेज बस अड्डा एक बड़ी समस्या है। इससे निजात मिलना बेहद जरूरी है। शहर के बाहर जमीन मिलने से वर्कशाप का निर्माण होने से निगम की बसें मिल सकेगी। इससे शहरवासियों की कई समस्याओं कम होंगी। - नीलम शर्मा गृहणी, शास्त्रीनगर
जिला मुख्यालय का बस अड्डा, फिर भी रात नौ बजे के बाद लखनऊ, सीतापुर के लिए एक बस तक नहीं है। अनुबंधित बसों का स्टाफ मनमानी कर यात्रियों के लिए मुसीबतें खड़ी करते हैं। निगम की बसें होने से यात्रियों की दिकक्तें कम होंगी। - पूनम मिश्रा बाजपेई कॉलेनी
रोडवेज बस अड्डे का शहर के बाहर जाना अत्यंत जरूरी है। इससे जाम की समस्या से तो निजात मिलेगी ही। इसी के साथ दुर्घटना होने की आशंका भी कम होगी। शहर के लिए रोडवेज बस अड्डा एक बड़ी समस्या बन चुका है। - जितेंद्र बरनवाल, कराटे प्रशिक्षक
डिपो में जितनी बसें लगी हैं उन्हें खड़ा करने के लिए वहां पर जगह तक नहीं है। अन्य जिलों से भी दर्जनों बसें आती है। जगह न होने से परिचालक बस रोड पर खडी कर यात्री बैठाते हैं, जिससे जाम लगती है। इसका एक ही उपाय है कि बस अड्डा शहर के बाहर के जाए। - प्रदीप जायसवाल, मेडिकल व्यापारी रोडवेज बस अड्डा रोड