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छह कस्बों को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव शासन में अटके
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लखीमपुर खीरी। जनपद के छह कस्बों को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित पड़े हैं। जिला प्रशासन से भीरा, मितौली, मैगलगंज, जंगबहादुरगंज, तिकुनिया और महेवागंज को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं लेकिन किसी मामले में पूर्ण सफलता नहीं मिल पाई है। सिर्फ भीरा को नगर पंचायत का दर्जा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भीरा की अनंतिम अधिसूचना का प्रकाशन 10 दिसंबर 2020 को किया जा चुका है। अब इसकी अंतिम अधिसूचना का प्रकाशन किया जाना है, जिसमें शासन स्तर से देरी हो रही है।
करीब 50 लाख आबादी वाला यह जनपद नगरीय विकास के मामले में अभी काफी पिछड़ा हुआ है, क्योंकि बड़ी आबादी वाले कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। जनप्रतिनिधि से लेकर आला अधिकारी भी कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों खासकर बड़ी आबादी वाले कस्बों में हालात बदतर बने हुए हैं। कस्बे की साफ-सफाई से लेकर विकास कार्यों के मामले में इस कारण अपेक्षित तेजी नहीं आ रही है।
वर्तमान में कुल 11 नगर निकाय हैं, जिसमें चार नगर पालिका परिषद और सात नगर पंचायतें हैं। कई दशकों बाद पिछले वर्ष निघासन को नगर पंचायत का दर्जा मिला था। वहीं बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के कस्बा भीरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के प्रयासों को अब तक आंशिक सफलता मिल पाई है, क्योंकि शासन ने 10 दिसंबर 2020 को अनंतिम अधिसूचना का प्रकाशन कर दिया था। तब करीब तीन आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थीं, जिनका निस्तारण भी कराया जा चुका है। एडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि भीरा को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए अब अंतिम अधिसूचना का प्रकाशन शासन स्तर से किया जाना है, जिसका प्रकाशन होने के साथ ही भीरा के नगर पंचायत का गठन स्वीकृत हो जाएगा। वहीं अन्य पांच कस्बों मितौली, मैगलगंज, जंगबहादुरगंज, तिकुनिया, महेवागंज को नगर पंचायत बनाने की फाइलें शासन के ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
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भीरा को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव में यह गांव हुए शामिल
वर्तमान में ग्राम पंचायत भीरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव में कुल 22036 लोगों की आबादी को शामिल किया गया है। इसमें कस्बा भीरा के साथ ही गांव सलामतनगर तांगिया, चक, पसियापुर, सुजानटांडा, फार्म टांडा, मन्ना टांडा, रामकुमार टांडा, खैरा फार्म, बिंदुआ फार्म, नौगवां, संतगढ़ फार्म, पंचवटी फार्म को शामिल किया गया है।
नगर पंचायत बनने पर तेजी से होगा गांवों का विकास
नगर पंचायत सरकार की स्थायी इकाई होती है। यह अपने अधिकार क्षेत्र के सभी गांवों पर समान रूप से कार्य करती है। इसे प्रशासनिक ब्लॉक भी कहते हैं। ग्राम पंचायतों के पास सीमित संसाधन होते हैं, जबकि नगर पंचायत को नगरीय विकास के आधार पर बजट आवंटित होता है। इसलिए काफी समय से बड़ी आबादी (20 हजार से अधिक आबादी) वाली ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने की मांग होती रही है। ग्राम पंचायतों में सड़कों की चौड़ाई व अतिक्रमण को लेकर कोई मानक निर्धारित नहीं है, जिससे अतिक्रमण गंभीर समस्या बना हुआ है। नगर पंचायत बनने पर अतिक्रमण की समस्या पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है।
जनपद के छह कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव शासन के पास लंबित हैं, जिसमें भीरा ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने के लिए शासन द्वारा 2020 में अनंतिम अधिसूचना का प्रकाशन कराया जा चुका है। अब भीरा की अंतिम अधिसूचना जारी होनी है, जिससे 12वीं नगर पंचायत बनने की दौड़ में भीरा सबसे आगे है। अन्य पांच कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। - संजय कुमार सिंह, एडीएम
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करीब 50 लाख आबादी वाला यह जनपद नगरीय विकास के मामले में अभी काफी पिछड़ा हुआ है, क्योंकि बड़ी आबादी वाले कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। जनप्रतिनिधि से लेकर आला अधिकारी भी कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों खासकर बड़ी आबादी वाले कस्बों में हालात बदतर बने हुए हैं। कस्बे की साफ-सफाई से लेकर विकास कार्यों के मामले में इस कारण अपेक्षित तेजी नहीं आ रही है।
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वर्तमान में कुल 11 नगर निकाय हैं, जिसमें चार नगर पालिका परिषद और सात नगर पंचायतें हैं। कई दशकों बाद पिछले वर्ष निघासन को नगर पंचायत का दर्जा मिला था। वहीं बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के कस्बा भीरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के प्रयासों को अब तक आंशिक सफलता मिल पाई है, क्योंकि शासन ने 10 दिसंबर 2020 को अनंतिम अधिसूचना का प्रकाशन कर दिया था। तब करीब तीन आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थीं, जिनका निस्तारण भी कराया जा चुका है। एडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि भीरा को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए अब अंतिम अधिसूचना का प्रकाशन शासन स्तर से किया जाना है, जिसका प्रकाशन होने के साथ ही भीरा के नगर पंचायत का गठन स्वीकृत हो जाएगा। वहीं अन्य पांच कस्बों मितौली, मैगलगंज, जंगबहादुरगंज, तिकुनिया, महेवागंज को नगर पंचायत बनाने की फाइलें शासन के ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
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भीरा को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव में यह गांव हुए शामिल
वर्तमान में ग्राम पंचायत भीरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव में कुल 22036 लोगों की आबादी को शामिल किया गया है। इसमें कस्बा भीरा के साथ ही गांव सलामतनगर तांगिया, चक, पसियापुर, सुजानटांडा, फार्म टांडा, मन्ना टांडा, रामकुमार टांडा, खैरा फार्म, बिंदुआ फार्म, नौगवां, संतगढ़ फार्म, पंचवटी फार्म को शामिल किया गया है।
नगर पंचायत बनने पर तेजी से होगा गांवों का विकास
नगर पंचायत सरकार की स्थायी इकाई होती है। यह अपने अधिकार क्षेत्र के सभी गांवों पर समान रूप से कार्य करती है। इसे प्रशासनिक ब्लॉक भी कहते हैं। ग्राम पंचायतों के पास सीमित संसाधन होते हैं, जबकि नगर पंचायत को नगरीय विकास के आधार पर बजट आवंटित होता है। इसलिए काफी समय से बड़ी आबादी (20 हजार से अधिक आबादी) वाली ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने की मांग होती रही है। ग्राम पंचायतों में सड़कों की चौड़ाई व अतिक्रमण को लेकर कोई मानक निर्धारित नहीं है, जिससे अतिक्रमण गंभीर समस्या बना हुआ है। नगर पंचायत बनने पर अतिक्रमण की समस्या पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है।
जनपद के छह कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव शासन के पास लंबित हैं, जिसमें भीरा ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने के लिए शासन द्वारा 2020 में अनंतिम अधिसूचना का प्रकाशन कराया जा चुका है। अब भीरा की अंतिम अधिसूचना जारी होनी है, जिससे 12वीं नगर पंचायत बनने की दौड़ में भीरा सबसे आगे है। अन्य पांच कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। - संजय कुमार सिंह, एडीएम