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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को विशेषज्ञों ने किया मंथन
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:41 PM IST
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कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
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कार्यशाला में वनाधिकारियों को संघर्ष रोकने के बताए गुर
तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए विश्व प्रकृति निधि के सौजन्य से उत्तर खीरी और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के संयुक्त संयोजन में कार्यशाला का आयोजन वन नीलाम हॉल में किया गया। इसमें उत्तर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के फील्ड कर्मचारियों के साथ जिले के पशु चिकित्साधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर एवं मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला रहे। इस मौके पर डीएफओ साउथ अखिलेश पांडेय ने बताया कि हाल ही में खीरी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। इस कार्यशाला के आयोजन से स्टाफ की क्षमता बढ़ेगी और समय से स्टाफ वन्यजीवों को नियंत्रित कर सकेगा।
डीएफओ नार्थ दिव्या ने बताया कि वन्यजीवों की निगरानी करके संघर्ष को कम किया जा सकता है। बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व के पास वाले क्षेत्रों में भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इन घटनाओं को विशेषज्ञों के सुझाए प्रयासों से कम किया जा सकता है। मुख्य प्रशिक्षक डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन और डॉ. कमलेश मौर्या ने तराई में मानव-वन्यजीवों में संघर्ष की स्थिति, कारण और निवारण के बारे में बताया। साथ ही पगमार्क की पहचान, ट्रैकिंग और मानीटरिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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रिसोर्स पर्सन डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने स्टाफ को मानव-वन्य जीव संषर्ष में उत्तर प्रदेश की घटनाओं के अनुभव बताए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सावधानियां, सुरक्षा और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। इसके अलावा वन्यजीवों को ट्रैंकुलाइज करने की तकनीक, दवा का कॉंबीनेशन और फील्ड प्रैक्टिस भी कराई।
कार्यशाला एसडीओ पलिया डीबी सिंह, एसडीओ गोला आरएन मिश्रा, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. सीबी कश्यप, डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. प्रवीण सचान, डॉ. राजेंद्र कुमार, रेंज अधिकारी पलिया आरके दीक्षित, रेंज अधिकारी निघासन रणवीर मिश्र, उत्तर निघासन रेंज के एमएन सिंह, धौरहरा रेंज एसएस यादव समेत दोनो वन प्रभागों के फील्ड कर्मचारी मौजूद रहे।
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तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए विश्व प्रकृति निधि के सौजन्य से उत्तर खीरी और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के संयुक्त संयोजन में कार्यशाला का आयोजन वन नीलाम हॉल में किया गया। इसमें उत्तर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के फील्ड कर्मचारियों के साथ जिले के पशु चिकित्साधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर एवं मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला रहे। इस मौके पर डीएफओ साउथ अखिलेश पांडेय ने बताया कि हाल ही में खीरी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। इस कार्यशाला के आयोजन से स्टाफ की क्षमता बढ़ेगी और समय से स्टाफ वन्यजीवों को नियंत्रित कर सकेगा।
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डीएफओ नार्थ दिव्या ने बताया कि वन्यजीवों की निगरानी करके संघर्ष को कम किया जा सकता है। बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व के पास वाले क्षेत्रों में भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इन घटनाओं को विशेषज्ञों के सुझाए प्रयासों से कम किया जा सकता है। मुख्य प्रशिक्षक डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन और डॉ. कमलेश मौर्या ने तराई में मानव-वन्यजीवों में संघर्ष की स्थिति, कारण और निवारण के बारे में बताया। साथ ही पगमार्क की पहचान, ट्रैकिंग और मानीटरिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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रिसोर्स पर्सन डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने स्टाफ को मानव-वन्य जीव संषर्ष में उत्तर प्रदेश की घटनाओं के अनुभव बताए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सावधानियां, सुरक्षा और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। इसके अलावा वन्यजीवों को ट्रैंकुलाइज करने की तकनीक, दवा का कॉंबीनेशन और फील्ड प्रैक्टिस भी कराई।
कार्यशाला एसडीओ पलिया डीबी सिंह, एसडीओ गोला आरएन मिश्रा, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. सीबी कश्यप, डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. प्रवीण सचान, डॉ. राजेंद्र कुमार, रेंज अधिकारी पलिया आरके दीक्षित, रेंज अधिकारी निघासन रणवीर मिश्र, उत्तर निघासन रेंज के एमएन सिंह, धौरहरा रेंज एसएस यादव समेत दोनो वन प्रभागों के फील्ड कर्मचारी मौजूद रहे।