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1670 तालाबों का मत्स्य पालन के लिए हुआ चयन
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pond select of fisheries
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लखीमपुर खीरी। मत्स्य पालन के लिए जनपद के सभी ब्लॉकों में 1670 तालाब उपयुक्त पाए गए हैं, जिनका आवंटन करने के लिए सीडीओ अरविंद सिंह ने तिथियां भी घोषित कर दी हैं। तहसील लखीमपुर, मितौली, मोहम्मदी में 15 अक्तूबर 2020 को और तहसील धौरहरा, गोला, निघासन, पलिया में 16 अक्तूबर को कैंप लगाए जाएंगे।
ऑपरेशन चतुर्भुज के तहत सीडीओ अरविंद सिंह ने मनरेगा से वर्ष 2019-20 और 2020-21 में तालाबों का विकास और जीर्णोद्धार कराया था। अब इनका उपयोग मत्स्य पालकों के जीविकोपार्जन और उनकी आय में बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इन तालाबों को 10 वर्ष के लिए मत्स्य पालकों को पट्टे पर दिया जाएगा। सीडीओ ने बताया कि नए बनाए गए तालाबों का तहसीलों से गाटा संख्या आवंटित कराकर सूची तैयार कराई गई है। वहीं पूर्व से सृजित जिन तालाबों का अभी तक किसी कारणवश पट्टा नहीं हो सका था, उनकी सूची भी तहसीलों में एसडीएम को भेजी गई है। सीडीओ ने बताया कि 1670 चयनित तालाबों का आवंटन तहसीलों में लगने वाले विशेष कैंप में किया जाएगा। इसमें मछुआ समुदाय/अनुसूचित जाति के व्यक्तियों और अन्य को राजस्व संहिता-2016 में वर्णित व्यवस्था के अनुसार मत्स्य पालन के लिए पट्टा दिया जाएगा। आवंटित मत्स्य पट्टाधारकों को मत्स्य पालन का प्रशिक्षण और उनका क्रेडिट कार्ड भी बनवाया जाएगा। इस अभियान से 1670 मत्स्य पालकों के एकमुश्त जुड़ने की संभावना है, जिससे मत्स्य पालक के परिवारों में औसतन पांच-पांच सदस्यों को रोजगार मिल सकेगा। सीडीओ ने कहा कि इनमें से 75 प्रतिशत तालाबों में सही ढंग से मत्स्य पालन होने लगे, तो जनपद में मत्स्य पालन व्यवसाय में हब बन सकता है। इसे कुटीर उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कुपोषण को दूर करने में मिलेगी मदद
मत्स्य पालन की अच्छी संभावनाएं और संसाधन उपलब्ध होने के चलते इसे कुटीर उद्योग के रूप में विकसित होने से मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, तो वहीं कुपोषण की समस्या दूर करने भी मदद मिलेगी। भरपूर उत्पादन होने से लोगों को ताजी मछली के रूप में पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्राप्त हो सकेगा।
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जनपद मत्स्य पालन का हब बनता है, तो बड़े व्यापारी लखनऊ/बरेली से स्वत: यहां आकर बिजनेस लिंक स्थापित करेंगे। दूसरा पहलू यह भी है कि राजस्व के तालाबों की सुरक्षा और अवैध कब्जे की समस्या दूर होगी और तालाबों को जीवित रखने में यह पट्टा स्वरूप सहभागी बनेगा।
अरविंद सिंह, सीडीओ
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ऑपरेशन चतुर्भुज के तहत सीडीओ अरविंद सिंह ने मनरेगा से वर्ष 2019-20 और 2020-21 में तालाबों का विकास और जीर्णोद्धार कराया था। अब इनका उपयोग मत्स्य पालकों के जीविकोपार्जन और उनकी आय में बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इन तालाबों को 10 वर्ष के लिए मत्स्य पालकों को पट्टे पर दिया जाएगा। सीडीओ ने बताया कि नए बनाए गए तालाबों का तहसीलों से गाटा संख्या आवंटित कराकर सूची तैयार कराई गई है। वहीं पूर्व से सृजित जिन तालाबों का अभी तक किसी कारणवश पट्टा नहीं हो सका था, उनकी सूची भी तहसीलों में एसडीएम को भेजी गई है। सीडीओ ने बताया कि 1670 चयनित तालाबों का आवंटन तहसीलों में लगने वाले विशेष कैंप में किया जाएगा। इसमें मछुआ समुदाय/अनुसूचित जाति के व्यक्तियों और अन्य को राजस्व संहिता-2016 में वर्णित व्यवस्था के अनुसार मत्स्य पालन के लिए पट्टा दिया जाएगा। आवंटित मत्स्य पट्टाधारकों को मत्स्य पालन का प्रशिक्षण और उनका क्रेडिट कार्ड भी बनवाया जाएगा। इस अभियान से 1670 मत्स्य पालकों के एकमुश्त जुड़ने की संभावना है, जिससे मत्स्य पालक के परिवारों में औसतन पांच-पांच सदस्यों को रोजगार मिल सकेगा। सीडीओ ने कहा कि इनमें से 75 प्रतिशत तालाबों में सही ढंग से मत्स्य पालन होने लगे, तो जनपद में मत्स्य पालन व्यवसाय में हब बन सकता है। इसे कुटीर उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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कुपोषण को दूर करने में मिलेगी मदद
मत्स्य पालन की अच्छी संभावनाएं और संसाधन उपलब्ध होने के चलते इसे कुटीर उद्योग के रूप में विकसित होने से मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, तो वहीं कुपोषण की समस्या दूर करने भी मदद मिलेगी। भरपूर उत्पादन होने से लोगों को ताजी मछली के रूप में पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्राप्त हो सकेगा।
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जनपद मत्स्य पालन का हब बनता है, तो बड़े व्यापारी लखनऊ/बरेली से स्वत: यहां आकर बिजनेस लिंक स्थापित करेंगे। दूसरा पहलू यह भी है कि राजस्व के तालाबों की सुरक्षा और अवैध कब्जे की समस्या दूर होगी और तालाबों को जीवित रखने में यह पट्टा स्वरूप सहभागी बनेगा।
अरविंद सिंह, सीडीओ