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सर्द मौसम में रहें सावधान, मुसीबत में डाल सकती है धुंध
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अमीरनगर में सुबह 10 बजे तक धुंध छाई रही, जिस कारण वाहन चालकों को लाइट जलाकर सफर तय करना पड़ा। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। बारिश के बाद सुधरी जिले की आबोहवा मौसम सर्द होने और धुंध बढ़ने के साथ फिर से बिगड़ने लगी है। सुबह और शाम छाने वाली धुंध लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। कोहरे के बीच प्रदूषण सभी के लिए मुसीबत बन सकता है। इसलिए ऐसे मौसम से सावधान रहने की जरूरत है। इससे बचाव का सबसे बेहतर उपाय गुणवत्ता वाला मास्क है। जो स्मॉग के साथ कोरोना संक्रमण से बचाने में कारगर है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि धुंध से सबसे ज्यादा दिक्कत सांस रोगियों को होती है, क्योंकि सांस लेने पर धुंध फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे फेफड़ों में संक्रमण और सांस नली में सूजन होने की आशंका रहती है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एसके मिश्रा का कहना है कि वायु प्रदूषण शरीर को कई तरह से प्रभावित करता है। इसलिए इससे सुरक्षित रहने के लिए सावधानी बरतें।
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सुबह की सैर हुई खतरनाक
सुबह की सैर खतरनाक हो गई है,क्योंकि प्रदूषण का बढ़ता स्तर धुंध की स्थिति पैदा कर रहा है। सांस के माध्यम से स्मॉग फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे सांस संबंधी बीमारिया होने की आशंका बनती हैं, जिसमें फेफड़े, हृदय, सांस नली के रोग प्रमुख हैं। मगर, सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने वाली बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीजों को हो रही है। सीओपीडी फेफड़े से जुड़ी बीमारी है जो सांसों को अवरुद्ध करती है। इससे सांस लेने में मुश्किल होती है। हालांकि सीओपीडी अब तक बीड़ी, सिगरेट पीने वालों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह बीमारी उन लोगों में भी तेजी से हो रही जो स्मोकिंग नहीं करते। इसका कारण खतरनाक होता वायु प्रदूषण और धुंध है।
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ये होती है धुंध
जानकार बताते हैं कि हवा में मौजूद खतरनाक गैसें और कोहरे के मेल से धुंध बनती है। गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड सहित अन्य खतरनाक गैसें जब कोहरे के संपर्क में आती हैं तो धुंध बनती है। इसका असर कई दिनों तक हो सकता है। तेज हवा चलने या बारिश के बाद ही धुंध का असर खत्म होता है।
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धुंध से होने वाली दिक्कत
खांसी, ब्रॉन्काइटिस, हृदय एवं त्वचा संबंधी रोग, बाल झड़ना, आंखों में जलन सहित नाक, कान, गला, फेफड़े में संक्रमण होने के साथ ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या हो सकती है।
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मास्क लगाकर करें बचाव
-अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क लें, जो पीएम 2.5 कण रोकने में सक्षम हो।
- एन-95 या झ्/100 रेस्पीरेटर मास्क पहनकर ही बाहर निकलें
-फिटिंग चेक करके देख लें कि उसमें गैप न हो।
-बच्चों के लिए छोटा मास्क लें।
-सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह से मास्क लें।
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उचित खानपान है जरूरी
जिला अस्पताल की आहार विशेषज्ञ दिव्या चतुर्वेदी बताती हैं कि सर्दी के मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखें। इसमें सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ धुंध आदि से तमाम दिक्कत होने का खतरा बना रहता है। इसलिए ऐसे में मौसमी सब्जियों और फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। सुबह नाश्ते में फल, बथुआ पराठा व टमाटर का सूप ले सकते हैं। इससे शरीर गर्म रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। दोपहर लंच में हरी सब्जियां और रोटी, रात के भोजन में फल का जूस, रोटी, दाल व सब्जी ज्यादा लें।
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धुंध सेहत के लिए खतरनाक है। इससे बचाव बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी भी लापरवाही सेहत के लिए मुसीबत बन सकती है। सुबह की सैर पर जाने से बचें। घर से मास्क लगाकर ही निकलें। सांस आदि संबंधी दिक्कत होने पर अस्पताल आकर दिखाएं।
- डॉ. आईके राम चंदानी, चेस्ट स्पेशलिस्ट जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि धुंध से सबसे ज्यादा दिक्कत सांस रोगियों को होती है, क्योंकि सांस लेने पर धुंध फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे फेफड़ों में संक्रमण और सांस नली में सूजन होने की आशंका रहती है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एसके मिश्रा का कहना है कि वायु प्रदूषण शरीर को कई तरह से प्रभावित करता है। इसलिए इससे सुरक्षित रहने के लिए सावधानी बरतें।
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सुबह की सैर हुई खतरनाक
सुबह की सैर खतरनाक हो गई है,क्योंकि प्रदूषण का बढ़ता स्तर धुंध की स्थिति पैदा कर रहा है। सांस के माध्यम से स्मॉग फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे सांस संबंधी बीमारिया होने की आशंका बनती हैं, जिसमें फेफड़े, हृदय, सांस नली के रोग प्रमुख हैं। मगर, सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने वाली बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीजों को हो रही है। सीओपीडी फेफड़े से जुड़ी बीमारी है जो सांसों को अवरुद्ध करती है। इससे सांस लेने में मुश्किल होती है। हालांकि सीओपीडी अब तक बीड़ी, सिगरेट पीने वालों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह बीमारी उन लोगों में भी तेजी से हो रही जो स्मोकिंग नहीं करते। इसका कारण खतरनाक होता वायु प्रदूषण और धुंध है।
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ये होती है धुंध
जानकार बताते हैं कि हवा में मौजूद खतरनाक गैसें और कोहरे के मेल से धुंध बनती है। गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड सहित अन्य खतरनाक गैसें जब कोहरे के संपर्क में आती हैं तो धुंध बनती है। इसका असर कई दिनों तक हो सकता है। तेज हवा चलने या बारिश के बाद ही धुंध का असर खत्म होता है।
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धुंध से होने वाली दिक्कत
खांसी, ब्रॉन्काइटिस, हृदय एवं त्वचा संबंधी रोग, बाल झड़ना, आंखों में जलन सहित नाक, कान, गला, फेफड़े में संक्रमण होने के साथ ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या हो सकती है।
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मास्क लगाकर करें बचाव
-अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क लें, जो पीएम 2.5 कण रोकने में सक्षम हो।
- एन-95 या झ्/100 रेस्पीरेटर मास्क पहनकर ही बाहर निकलें
-फिटिंग चेक करके देख लें कि उसमें गैप न हो।
-बच्चों के लिए छोटा मास्क लें।
-सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह से मास्क लें।
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उचित खानपान है जरूरी
जिला अस्पताल की आहार विशेषज्ञ दिव्या चतुर्वेदी बताती हैं कि सर्दी के मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखें। इसमें सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ धुंध आदि से तमाम दिक्कत होने का खतरा बना रहता है। इसलिए ऐसे में मौसमी सब्जियों और फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। सुबह नाश्ते में फल, बथुआ पराठा व टमाटर का सूप ले सकते हैं। इससे शरीर गर्म रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। दोपहर लंच में हरी सब्जियां और रोटी, रात के भोजन में फल का जूस, रोटी, दाल व सब्जी ज्यादा लें।
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धुंध सेहत के लिए खतरनाक है। इससे बचाव बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी भी लापरवाही सेहत के लिए मुसीबत बन सकती है। सुबह की सैर पर जाने से बचें। घर से मास्क लगाकर ही निकलें। सांस आदि संबंधी दिक्कत होने पर अस्पताल आकर दिखाएं।
- डॉ. आईके राम चंदानी, चेस्ट स्पेशलिस्ट जिला अस्पताल