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60 बरस से अधिक उम्र के लोग अब भी नहीं करवा रहे वैक्सीनेशन
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जिला अस्पताल में कोविड वैक्सीन लगवाने को लगी भीड़।
सिर्फ 35 प्रतिशत लोगों ने ही अब तक लगवाई है अपनी दूसरी डोज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच हाईरिस्क श्रेणी में हैं बुजुर्ग
लखीमपुर खीरी। ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच हाईरिस्क श्रेणी में बुजुर्ग हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 60 पार के 65 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्होंने अब तक अपनी कोरोना प्रतिरक्षण टीके की दूसरी डोज नहीं लगवाई है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक जिले में साठ साल से अधिक उम्र के 73.4 प्रतिशत पहली और 35.7 फीसदी ने दूसरी डोज लगवाई है। जिले में निर्धारित लक्ष्य 27,10,966 के सापेक्ष 22,14,054 लोगों ने ही पहली डोज लगवाई है, जबकि 9,32,827 लोगों के ही दोनों डोज लग सकी हैं।
कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए 16 जनवरी से जिले में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ। शुरूआत हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर से हुई। इसके बाद हाईरिस्क में आने वाले साठ साल से अधिक और 45 साल से अधिक उम्र के गंभीर बीमार लोगों का वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ। इसके लिए जिले का लक्ष्य 27,10,966 निर्धारित हुआ। मगर, 26 दिसंबर यानी रविवार तक 22,14,054 लोगों के पहली डोज लग सकी। वहीं दोनों डोज लगवाने वालों की संख्या मात्र 9,32,827 ही है। इसमें साठ साल से अधिक उम्र के 3,44,831 लोगों में से 2,53,141 ने पहली और 1,23,395 लोगों के ही दोनों डोज लगी हैं। साठ साल की उम्र पार चुके बुजुर्गों के न तो पहली डोज ही शत प्रतिशत लग सकी है और न ही दूसरी डोज।
आंकड़ों के अनुसार 73.4 फीसदी बुजुर्गों के पहली और 35.7 फीसदी के ही दूसरी डोज लग सकी है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरपी दीक्षित बताते हैं कि टीकाकरण में इस तरह की लापरवाही सभी के लिए मुसीबत बन सकती है खासकर बुजुर्गों को ज्यादा भारी पड़ सकता है, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। इसलिए बुजुर्ग बेहद हाईरिस्क में है।
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जनपद में टीकाकरण
आयु वर्ग लक्ष्य पहली डोज दूसरी डोज
18-45 वर्ष 1833989 1433037 (78.1 फीसदी) 538685 (29.4 फीसदी)
46-60 वर्ष 532146 493394 (92.7 फीसदी) 242508 (45.6 फीसदी)
60 वर्ष पार 344831 253141 (73.4 फीसदी) 123395 (35.7 फीसदी)
टीकाकरण लक्ष्य पहली डोज दूसरी डोज
हेल्थ केयर वर्कर 15472 15317 (90 फीसदी) 13062 (85.3 फीसदी)
फ्रंट लाइन वर्कर 22380 19165 (85.6 फीसदी) 15177 (79.2 फीसदी)
दूसरी डोज लगवाने में बुजुर्गों से पीछे रह गए युवा
जिले में टीकारकण का आगाज सबसे पहले हेल्थ केयर वर्कर से हुई। फिर फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीनेशन हुआ। इसके बाद 60 साल से अधिक बुजुर्ग और 45 साल से अधिक गंभीर बीमारी वालों के टीके लगना शुरू हुआ। सबसे बाद मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के टीका लगने की शुरूआत हुई। हालांकि दूसरी डोज में बुजुर्गों का 35.7 प्रतिशत बेहद कम है, लेकिन युवाओं (29.4 फीसदी) को इस मामले में पछाड़ दिया है।
कोरोना से बचाव का उपाय सावधानी और टीकाकरण है। अब तक जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई या फिर पहली लगवाने के बाद दूसरी डोज नहीं लगवाई है। वह लोग दूसरी डोज अवश्य लगवा लें, क्योंकि पहली डोज लग जाने से जहां 96 प्रतिशत मौत होने की आशंका कम हो जाती है तो वहीं दोनो डोज लगने के बाद 98 प्रतिशत।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच हाईरिस्क श्रेणी में हैं बुजुर्ग
लखीमपुर खीरी। ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच हाईरिस्क श्रेणी में बुजुर्ग हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 60 पार के 65 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्होंने अब तक अपनी कोरोना प्रतिरक्षण टीके की दूसरी डोज नहीं लगवाई है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक जिले में साठ साल से अधिक उम्र के 73.4 प्रतिशत पहली और 35.7 फीसदी ने दूसरी डोज लगवाई है। जिले में निर्धारित लक्ष्य 27,10,966 के सापेक्ष 22,14,054 लोगों ने ही पहली डोज लगवाई है, जबकि 9,32,827 लोगों के ही दोनों डोज लग सकी हैं।
कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए 16 जनवरी से जिले में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ। शुरूआत हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर से हुई। इसके बाद हाईरिस्क में आने वाले साठ साल से अधिक और 45 साल से अधिक उम्र के गंभीर बीमार लोगों का वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ। इसके लिए जिले का लक्ष्य 27,10,966 निर्धारित हुआ। मगर, 26 दिसंबर यानी रविवार तक 22,14,054 लोगों के पहली डोज लग सकी। वहीं दोनों डोज लगवाने वालों की संख्या मात्र 9,32,827 ही है। इसमें साठ साल से अधिक उम्र के 3,44,831 लोगों में से 2,53,141 ने पहली और 1,23,395 लोगों के ही दोनों डोज लगी हैं। साठ साल की उम्र पार चुके बुजुर्गों के न तो पहली डोज ही शत प्रतिशत लग सकी है और न ही दूसरी डोज।
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आंकड़ों के अनुसार 73.4 फीसदी बुजुर्गों के पहली और 35.7 फीसदी के ही दूसरी डोज लग सकी है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरपी दीक्षित बताते हैं कि टीकाकरण में इस तरह की लापरवाही सभी के लिए मुसीबत बन सकती है खासकर बुजुर्गों को ज्यादा भारी पड़ सकता है, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। इसलिए बुजुर्ग बेहद हाईरिस्क में है।
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जनपद में टीकाकरण
आयु वर्ग लक्ष्य पहली डोज दूसरी डोज
18-45 वर्ष 1833989 1433037 (78.1 फीसदी) 538685 (29.4 फीसदी)
46-60 वर्ष 532146 493394 (92.7 फीसदी) 242508 (45.6 फीसदी)
60 वर्ष पार 344831 253141 (73.4 फीसदी) 123395 (35.7 फीसदी)
टीकाकरण लक्ष्य पहली डोज दूसरी डोज
हेल्थ केयर वर्कर 15472 15317 (90 फीसदी) 13062 (85.3 फीसदी)
फ्रंट लाइन वर्कर 22380 19165 (85.6 फीसदी) 15177 (79.2 फीसदी)
दूसरी डोज लगवाने में बुजुर्गों से पीछे रह गए युवा
जिले में टीकारकण का आगाज सबसे पहले हेल्थ केयर वर्कर से हुई। फिर फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीनेशन हुआ। इसके बाद 60 साल से अधिक बुजुर्ग और 45 साल से अधिक गंभीर बीमारी वालों के टीके लगना शुरू हुआ। सबसे बाद मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के टीका लगने की शुरूआत हुई। हालांकि दूसरी डोज में बुजुर्गों का 35.7 प्रतिशत बेहद कम है, लेकिन युवाओं (29.4 फीसदी) को इस मामले में पछाड़ दिया है।
कोरोना से बचाव का उपाय सावधानी और टीकाकरण है। अब तक जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई या फिर पहली लगवाने के बाद दूसरी डोज नहीं लगवाई है। वह लोग दूसरी डोज अवश्य लगवा लें, क्योंकि पहली डोज लग जाने से जहां 96 प्रतिशत मौत होने की आशंका कम हो जाती है तो वहीं दोनो डोज लगने के बाद 98 प्रतिशत।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ