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Lakhimpur Kheri News: जंगल में सैकड़ों पेड़ों की छील डाली छाल
Sat, 21 Jun 2025 11:53 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 21 Jun 2025 11:53 PM IST
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मैलानी वन रेंज की महुरेना बीट के जंगल में जड़ से तने की छाल छिले पेड़। स्रोत : सोशल मीडिया
गोला गोकर्णनाथ। मैलानी वन रेंज की महुरेना बीट में असौवा गांव के नजदीकी जंगल में सैकड़ों पेड़ों की छाल को छील ले जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस काम को मवेशियों को चराने के बहाने जंगल में घुसकर लकड़हारों पर अंजाम देने का शक है। वृक्ष के सूखने के बाद धीरे-धीरे उसकी लकड़ियां ले जाते हैं। वन विभाग के अफसर अन्जान हैं।
जंगली वृक्षों को सुखाने के लिए लकड़हारे अलग-अलग हथकंडे अपनाते हैं। छाल छीलकर धीरे-धीरे पेड़ को सुखा देने का तरीका काफी पुराना है। इसी कारण से आबादी के नजदीकी जंगल का क्षेत्र निरंतर कम होता जा रहा है। जंगल में इस वक्त कई पेड़ सूखे खड़े हैं। कई छिले पेड़ भी दूर से ही दिखाई देते हैं, जबकि वन विभाग को जंगल की सुरक्षा के लिए आबादी के नजदीकी क्षेत्र में व्यापक गश्त करने का निर्देश है। इसमें वनरक्षक (वाचर), फॉरेस्ट गार्ड को नियमित रिपोर्ट देनी होती है। हालांकि, वन विभाग के कर्मचारी चरवाहों का कृत्य बता रहे हैं।
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नष्ट हो जाते हैं जाइलम ऊतक
जीव विज्ञान प्रवक्ता डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वृक्ष की छाल एक सुरक्षात्मक आवरण है। यदि पेड़ की छाल को हटा दें, तो जाइलम ऊतक नष्ट हो जाता है, जिस वजह से वृक्ष को जल व खनिज लवण नहीं प्राप्त होता और संक्रमण व तापमान की वजह से वृक्ष सूख जाएगा। अगर ऐसा हो रहा है तो उसको रोका जाना चाहिए।
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क्या बोले जिम्मेदार
इस मामले में जब रेंजर साजिद अली से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले को दिखवाते हैं। डिप्टी रेंजर संत त्रिपाठी ने कहना है कि सर्दी में चरवाहे आग तपने के लिए पेड़ों की छाल छील ले जाते हैं। अब इस मामले में गंभीरता दिखाई जाएगी।
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जंगली वृक्षों को सुखाने के लिए लकड़हारे अलग-अलग हथकंडे अपनाते हैं। छाल छीलकर धीरे-धीरे पेड़ को सुखा देने का तरीका काफी पुराना है। इसी कारण से आबादी के नजदीकी जंगल का क्षेत्र निरंतर कम होता जा रहा है। जंगल में इस वक्त कई पेड़ सूखे खड़े हैं। कई छिले पेड़ भी दूर से ही दिखाई देते हैं, जबकि वन विभाग को जंगल की सुरक्षा के लिए आबादी के नजदीकी क्षेत्र में व्यापक गश्त करने का निर्देश है। इसमें वनरक्षक (वाचर), फॉरेस्ट गार्ड को नियमित रिपोर्ट देनी होती है। हालांकि, वन विभाग के कर्मचारी चरवाहों का कृत्य बता रहे हैं।
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नष्ट हो जाते हैं जाइलम ऊतक
जीव विज्ञान प्रवक्ता डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वृक्ष की छाल एक सुरक्षात्मक आवरण है। यदि पेड़ की छाल को हटा दें, तो जाइलम ऊतक नष्ट हो जाता है, जिस वजह से वृक्ष को जल व खनिज लवण नहीं प्राप्त होता और संक्रमण व तापमान की वजह से वृक्ष सूख जाएगा। अगर ऐसा हो रहा है तो उसको रोका जाना चाहिए।
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क्या बोले जिम्मेदार
इस मामले में जब रेंजर साजिद अली से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले को दिखवाते हैं। डिप्टी रेंजर संत त्रिपाठी ने कहना है कि सर्दी में चरवाहे आग तपने के लिए पेड़ों की छाल छील ले जाते हैं। अब इस मामले में गंभीरता दिखाई जाएगी।