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टूटने की कगार पर पहुंचा परवतिया घाट में बना बंधा
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Thu, 10 Aug 2017 11:01 PM IST
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अस्तित्व खतरे में
- फोटो : अमर उजाला
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प्रशासन से नहीं मिला सहयोग तो ग्रामीण खुद करने लगे कार्य
परवतिया घाट से लोहरा तक बने लगभग चार किलोमीटर का बड़ा बंधा टूटने की कगार पर पहुंच गया है। प्रशासन की अनदेखी के कारण सैकड़ों गांव का अस्तित्व खतरे में बना हुआ है। हालांकि इसकी मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने खुद ही बेड़ा उठाया है लेकिन प्रशासन की मदद के बगैर बंधा के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।
बुद्घापुरवा गांव के पास परवतिया घाट से लोहरा घाट तक चार किलोमीटर बंधा बनाया गया है। बंधा काफी पुराना है तथा कई जगह से जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों ने इस बारे में कई बार शिकायती पत्र देकर प्रशासन को अवगत भी कराया। लेकिन बंधे का निर्माण नहीं कराया जा सका। इसके बाद हल्का से पानी बढ़ने से बंधा क्षतिग्रस्त होने लगा है। जिससे सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं। अपने गांव का अस्तित्व बचाने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही कारसेवा कर मिट्टी बोरियों में भरकर बंधा का निर्माण शुरू किया है। प्रशासन से कोई मदद व सहयोग न मिलने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने बंधे का नवनिर्माण कराने की मांग प्रशासन से की है।
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परवतिया घाट से लोहरा तक बने लगभग चार किलोमीटर का बड़ा बंधा टूटने की कगार पर पहुंच गया है। प्रशासन की अनदेखी के कारण सैकड़ों गांव का अस्तित्व खतरे में बना हुआ है। हालांकि इसकी मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने खुद ही बेड़ा उठाया है लेकिन प्रशासन की मदद के बगैर बंधा के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।
बुद्घापुरवा गांव के पास परवतिया घाट से लोहरा घाट तक चार किलोमीटर बंधा बनाया गया है। बंधा काफी पुराना है तथा कई जगह से जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों ने इस बारे में कई बार शिकायती पत्र देकर प्रशासन को अवगत भी कराया। लेकिन बंधे का निर्माण नहीं कराया जा सका। इसके बाद हल्का से पानी बढ़ने से बंधा क्षतिग्रस्त होने लगा है। जिससे सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं। अपने गांव का अस्तित्व बचाने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही कारसेवा कर मिट्टी बोरियों में भरकर बंधा का निर्माण शुरू किया है। प्रशासन से कोई मदद व सहयोग न मिलने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने बंधे का नवनिर्माण कराने की मांग प्रशासन से की है।
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