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अपनों को सताया तो बसपा को जनता ने ठुकराया
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 15 Mar 2017 12:32 AM IST
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jugul
- फोटो : amar ujala
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- जनसमर्थन हासिल करने में कामयाब हुए बसपा के बागी
2012 में जिले की तीन सीटों पर कब्जा करने वाली बसपा को इस चुनाव में जनता ने पूरी तरह से ठुकरा दिया। आलम यह हुआ कि जिले की आठ में से किसी भी सीट पर बसपा दूसरा स्थान भी हासिल नहीं कर पाई। वहीं, बसपा से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले नेता रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए।
जिले में एक ऐसा आवरण तैयार किया गया कि बसपा के सामान्य कार्यकर्ता पार्टी के बड़े नेताओं से दूर होते गए। अनुशासन के नाम पर भी बसपा सिपहसलारों ने ऐसे नियम बनाए कि पार्टी की लोकतांत्रिक व्यवस्था ही ध्वस्त होती चली गई। सबसे पहले बसपा के बिहार प्रदेश प्रभारी रहे चुके कद्दावर नेता जुगुल किशोर ने बगावत छेड़ी। उन्होंने मायावती को दौलत की बेटी करार देते हुए कांशीराम के मिशन को समाप्त करने का आरोप लगाते हुए बसपा का खात्मा कर देने का एलान किया था। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे सौरभ सिंह सोनू को भाजपा की सदस्यता दिलाई, फिर एक-एक कर बसपाई दिग्गज पलिया विधायक रोमी साहनी, मोहम्मदी विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने भाजपा ज्वाइन कर ली। इसके बाद लोकसभा चुनाव हार चुके अरविंद गिरि ने भी भगवा धारण कर लिया। माना जाने लगा कि जुगुल किशोर ने ऐसी रणनीति बनाई कि बसपा के सभी दिग्गज टूट गए। विधानसभा परिणाम आए तो जुगुल किशोर ने न सिर्फ बेटे सौरभ सिंह सोनू को कस्ता सीट से चुनाव जितवा लिया, बल्कि बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधायक रोमी साहनी भी रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए। वहीं मोहम्मदी छोड़कर धौरहरा से चुनाव मैदान में उतरे बाला प्रसाद अवस्थी ने बसपा विधायक शमशेर बहादुर को तीसरे पायदान पर पटखनी देते हुए सपा के यशपाल चौधरी से दोबारा चुनाव जीत गए। वहीं अरविंद गिरि ने भी रिकार्ड मतों से जीतकर विधायक बन गए। अरविंद चौथी पर विधायक बने हैं।
मिशन कामयाब हुआ: जुगुल
पूर्व राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता जुगुल किशोर का कहना है कि कांशीराम बहुजन समाज के मसीहा थे, जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए एक मिशन बनाया था, लेकिन मायावती ने दौलत के लिए उस मिशन को नष्ट कर दिया। इसी से आहत होकर उन्होंने पार्टी छोड़ी थी और यह ठान लिया था कि बहुजन समाज के उत्थान को भूलने वाली इस पार्टी को खत्म कर दूंगा। आज बसपा का खात्मा हो चुका है, जिससे उनका मिशन कामयाब हुआ है।
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2012 में जिले की तीन सीटों पर कब्जा करने वाली बसपा को इस चुनाव में जनता ने पूरी तरह से ठुकरा दिया। आलम यह हुआ कि जिले की आठ में से किसी भी सीट पर बसपा दूसरा स्थान भी हासिल नहीं कर पाई। वहीं, बसपा से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले नेता रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए।
जिले में एक ऐसा आवरण तैयार किया गया कि बसपा के सामान्य कार्यकर्ता पार्टी के बड़े नेताओं से दूर होते गए। अनुशासन के नाम पर भी बसपा सिपहसलारों ने ऐसे नियम बनाए कि पार्टी की लोकतांत्रिक व्यवस्था ही ध्वस्त होती चली गई। सबसे पहले बसपा के बिहार प्रदेश प्रभारी रहे चुके कद्दावर नेता जुगुल किशोर ने बगावत छेड़ी। उन्होंने मायावती को दौलत की बेटी करार देते हुए कांशीराम के मिशन को समाप्त करने का आरोप लगाते हुए बसपा का खात्मा कर देने का एलान किया था। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे सौरभ सिंह सोनू को भाजपा की सदस्यता दिलाई, फिर एक-एक कर बसपाई दिग्गज पलिया विधायक रोमी साहनी, मोहम्मदी विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने भाजपा ज्वाइन कर ली। इसके बाद लोकसभा चुनाव हार चुके अरविंद गिरि ने भी भगवा धारण कर लिया। माना जाने लगा कि जुगुल किशोर ने ऐसी रणनीति बनाई कि बसपा के सभी दिग्गज टूट गए। विधानसभा परिणाम आए तो जुगुल किशोर ने न सिर्फ बेटे सौरभ सिंह सोनू को कस्ता सीट से चुनाव जितवा लिया, बल्कि बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधायक रोमी साहनी भी रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए। वहीं मोहम्मदी छोड़कर धौरहरा से चुनाव मैदान में उतरे बाला प्रसाद अवस्थी ने बसपा विधायक शमशेर बहादुर को तीसरे पायदान पर पटखनी देते हुए सपा के यशपाल चौधरी से दोबारा चुनाव जीत गए। वहीं अरविंद गिरि ने भी रिकार्ड मतों से जीतकर विधायक बन गए। अरविंद चौथी पर विधायक बने हैं।
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मिशन कामयाब हुआ: जुगुल
पूर्व राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता जुगुल किशोर का कहना है कि कांशीराम बहुजन समाज के मसीहा थे, जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए एक मिशन बनाया था, लेकिन मायावती ने दौलत के लिए उस मिशन को नष्ट कर दिया। इसी से आहत होकर उन्होंने पार्टी छोड़ी थी और यह ठान लिया था कि बहुजन समाज के उत्थान को भूलने वाली इस पार्टी को खत्म कर दूंगा। आज बसपा का खात्मा हो चुका है, जिससे उनका मिशन कामयाब हुआ है।
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