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Lakhimpur Kheri News: कल से बंद हो जाएगा पैंटून पुल... 30 हजार की आबादी झेलेगी 80 किमी का फेर
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बृजकिशोर शुक्ला
लखीमपुर/बिजुआ। मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोक निर्माण विभाग ने बाढ़ की आशंका के मद्देनजर शारदा नदी के रामनगर घाट का पैंटून पुल 15 जून से बंद करने का निर्णय लिया है। इससे सौ गांवों के ग्रामीणों का शारदा नदी के पार जाना नवंबर तक बंद हो जाएगा। करीब 30 हजार की आबादी को अपने गंतव्य स्थानों को जाने के लिए करीब 80 से 90 किलोमीटर तक फेर झेलना पड़ेगा।
शारदा नदी के रामनगर घाट पर अस्थायी पैंटून (पीपा पुल) दो साल पहले बनाया गया। पुल के सहारे शारदा नदी के किनारे दोनों तरफ बसे लगभग चार सौ गावों के लोगों को पलिया-निघासन आने-जाने में सहूलियत होती हे। शारदा नदी के किनारे तहसील गोला गोकरननाथ, तहसील पलिया, तहसील निघासन तथा तहसील सदर के लगभग चार सौ गांव बसते हैं।
शारदा नदी पर एक स्थायी पुल पलिया तो दूसरा शारदानगर में बना है। दोनों पुलों की एक दूसरे से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी है। इतनी दूरी में शारदा नदी के किनारे के पांच सौ गांवों में 100 ऐसे गांव हैं, जिनके लोगों की खेतीबाड़ी शारदा नदी के दूसरी तरफ पड़ती है। ये ग्रामीण पैंटून पुल के सहारे ही आवागमन करते हैं।
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इस 80 किलोमीटर की दूरी में रामनगर घाट पर अस्थायी पैंटून पुल बना है, जो सिर्फ 15 नवंबर से 15 जून तक ही चलता है। मानसून सत्र में बाढ़ की आशंका पर पुल हटा दिया जाता है। ताकि बाढ़ में बह न जाए। पुल बंद होने पर इन गांवों के निवासियों को बिजुआ, भीरा पलिया होते हुए निघासन तथा तिकुनियां, सिंगाही जाना पड़ता है। या फिर पड़रिया तुला, मालपुर दाउदपुर अंदेशनगर, लखीमपुर, शारदानगर, ढखेरवा चौराहा होते हुए निघासन पहुंच सकते हैं।
दोनों तरफ से दूरी 80 से 90 किलोमीटर पड़ती है, जबकि रामनगर घाट से यही दूरी सिर्फ 30 किलोमीटर पड़ती है। पैंटून पुल का निर्माण 20 दिसंबर 2022 में हुआ था। क्षेत्रवासी दशकों से रामनगर में स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।
क्या कहते हैं पीडब्ल्यूडी के अधिकारी
पीडब्ल्यूडी जेई रामचंद्र वर्मा का कहना है कि अस्थायी पीपा पुल की लागत घटती-बढ़ती रहती है। नदी बरसात में लगभग तीन से चार किलोमीटर की चौड़ाई में बहने लगती है। नवंबर में जहां पर पानी होता है, वहां पर पैंटून पीपे लगाए जाते हैं। इस साल 320 मीटर में पीपे लगाए। दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ किलोमीटर एप्रोच रोड का निर्माण कर उस पर चकर प्लेट बिछाई। प्रतिदिन कच्ची सड़क पर टैंकर से पानी का छिड़काव कर मिट्टी को रोका जाता है। पीडब्ल्यूडी को सिर्फ 50 से 60 मीटर के स्थायी पुल बनाने की अनुमति होती है, इससे बड़े पुलों के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर सेतु निगम निर्माण करता है। शारदा नदी पर लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पुल की आवश्यकता है। अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि वह इस समय बाहर हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
प्रत्येक वर्ष नदी पार करने के चक्कर में चार से पांच लोगों की शारदा नदी में डूबने से मौत हो जाती है। अगर स्थायी पुल का निर्माण हो जाय, तो जानें बचाई जा सकती हैं।
ओमप्रकाश
बाढ़ और कटान की वजह से पांचवीं जगह घर बनाया है। पुल न हाेने से ग्रामीणों को बहुत दिक्कतें होती है। पुल हो जाए तो कटान रुक जाएगा।
बृजकिशोर शुक्ला
स्थायी पुल बन जाने से लोगों की दिक्कतें कम होंगी और क्षेत्र का विकास हो जाएगा। इस लिए पुल बनना बहुत आवश्यक है।
महेश सिंह, ग्राम प्रधान
शारदा नदी पर स्थायी पुल होना बहुत आवश्यक है। दोनों तरफ खेती होती है किसानों का आना जाना लगा रहता है। पुल बन जाने से किसानों को आसानी होगी।
अरविंद शुक्ला, शिक्षक
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शारदा नदी के रामनगर घाट पर अस्थायी पैंटून (पीपा पुल) दो साल पहले बनाया गया। पुल के सहारे शारदा नदी के किनारे दोनों तरफ बसे लगभग चार सौ गावों के लोगों को पलिया-निघासन आने-जाने में सहूलियत होती हे। शारदा नदी के किनारे तहसील गोला गोकरननाथ, तहसील पलिया, तहसील निघासन तथा तहसील सदर के लगभग चार सौ गांव बसते हैं।
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शारदा नदी पर एक स्थायी पुल पलिया तो दूसरा शारदानगर में बना है। दोनों पुलों की एक दूसरे से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी है। इतनी दूरी में शारदा नदी के किनारे के पांच सौ गांवों में 100 ऐसे गांव हैं, जिनके लोगों की खेतीबाड़ी शारदा नदी के दूसरी तरफ पड़ती है। ये ग्रामीण पैंटून पुल के सहारे ही आवागमन करते हैं।
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इस 80 किलोमीटर की दूरी में रामनगर घाट पर अस्थायी पैंटून पुल बना है, जो सिर्फ 15 नवंबर से 15 जून तक ही चलता है। मानसून सत्र में बाढ़ की आशंका पर पुल हटा दिया जाता है। ताकि बाढ़ में बह न जाए। पुल बंद होने पर इन गांवों के निवासियों को बिजुआ, भीरा पलिया होते हुए निघासन तथा तिकुनियां, सिंगाही जाना पड़ता है। या फिर पड़रिया तुला, मालपुर दाउदपुर अंदेशनगर, लखीमपुर, शारदानगर, ढखेरवा चौराहा होते हुए निघासन पहुंच सकते हैं।
दोनों तरफ से दूरी 80 से 90 किलोमीटर पड़ती है, जबकि रामनगर घाट से यही दूरी सिर्फ 30 किलोमीटर पड़ती है। पैंटून पुल का निर्माण 20 दिसंबर 2022 में हुआ था। क्षेत्रवासी दशकों से रामनगर में स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।
क्या कहते हैं पीडब्ल्यूडी के अधिकारी
पीडब्ल्यूडी जेई रामचंद्र वर्मा का कहना है कि अस्थायी पीपा पुल की लागत घटती-बढ़ती रहती है। नदी बरसात में लगभग तीन से चार किलोमीटर की चौड़ाई में बहने लगती है। नवंबर में जहां पर पानी होता है, वहां पर पैंटून पीपे लगाए जाते हैं। इस साल 320 मीटर में पीपे लगाए। दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ किलोमीटर एप्रोच रोड का निर्माण कर उस पर चकर प्लेट बिछाई। प्रतिदिन कच्ची सड़क पर टैंकर से पानी का छिड़काव कर मिट्टी को रोका जाता है। पीडब्ल्यूडी को सिर्फ 50 से 60 मीटर के स्थायी पुल बनाने की अनुमति होती है, इससे बड़े पुलों के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर सेतु निगम निर्माण करता है। शारदा नदी पर लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पुल की आवश्यकता है। अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि वह इस समय बाहर हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
प्रत्येक वर्ष नदी पार करने के चक्कर में चार से पांच लोगों की शारदा नदी में डूबने से मौत हो जाती है। अगर स्थायी पुल का निर्माण हो जाय, तो जानें बचाई जा सकती हैं।
ओमप्रकाश
बाढ़ और कटान की वजह से पांचवीं जगह घर बनाया है। पुल न हाेने से ग्रामीणों को बहुत दिक्कतें होती है। पुल हो जाए तो कटान रुक जाएगा।
बृजकिशोर शुक्ला
स्थायी पुल बन जाने से लोगों की दिक्कतें कम होंगी और क्षेत्र का विकास हो जाएगा। इस लिए पुल बनना बहुत आवश्यक है।
महेश सिंह, ग्राम प्रधान
शारदा नदी पर स्थायी पुल होना बहुत आवश्यक है। दोनों तरफ खेती होती है किसानों का आना जाना लगा रहता है। पुल बन जाने से किसानों को आसानी होगी।
अरविंद शुक्ला, शिक्षक

बृजकिशोर शुक्ला

बृजकिशोर शुक्ला

बृजकिशोर शुक्ला

बृजकिशोर शुक्ला