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वन स्टॉप सेंटर ने नेपाली महिला को उसकी बेटियों से मिलाया
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अपने परिवार के साथ नेपाली महिला।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
नेपाल से आई महिला रास्ता भटककर पहुंची थी बेहजम
पुलिस ने महिला को वन स्टॉप सेंटर में दिलाया था आश्रय
लखीमपुर खीरी। वन स्टॉप सेंटर ने एक भटकी हुई महिला को उसके परिवार से मिलवा दिया।
एक जून 2022 को चौकी प्रभारी बेहजम ने वन स्टॉप सेंटर को सूचना दी थी कि एक महिला कस्बा बेहजम में लावारिस अवस्था में घूम रही है। पुलिस की सहायता से महिला को रेस्क्यू कर तत्काल वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिलाया गया।
महिला का चिकित्सीय परीक्षण एवं काउंसलिंग वन स्टॉप सेंटर की टीम द्वारा की गई। काउंसलर विजेता गुप्ता ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान ज्ञात हुआ कि सुनीता थाना लाली बाजार जिला वर्दिया नेपाल की रहने वाली है। वह अवसाद की स्थिति में अपने घर से निकलकर लखीमपुर खीरी आ गई। महिला सुनीता द्वारा अपने पुत्री आशा थापा एवं सुषमा थापा का बार-बार नाम लिया जा रहा था। धीरे-धीरे सामान्य होने पर महिला द्वारा बताया गया कि उसकी दोनों पुत्रियां थाना भीमताल जिला नैनीताल में रहती हैं। वन स्टॉप सेंटर की सखी टीम द्वारा महिला की बेटियों एवं दामाद से संपर्क स्थापित कर केंद्र बुलवाया गया। हर तरह से जांच पड़ताल करने के बाद सुनीता को उसकी पुत्रियों के हवाले किया गया। अपनी बिछड़ी मां से मिलकर बेटी एवं दामाद खुश नजर आए।
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पुलिस ने महिला को वन स्टॉप सेंटर में दिलाया था आश्रय
लखीमपुर खीरी। वन स्टॉप सेंटर ने एक भटकी हुई महिला को उसके परिवार से मिलवा दिया।
एक जून 2022 को चौकी प्रभारी बेहजम ने वन स्टॉप सेंटर को सूचना दी थी कि एक महिला कस्बा बेहजम में लावारिस अवस्था में घूम रही है। पुलिस की सहायता से महिला को रेस्क्यू कर तत्काल वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिलाया गया।
महिला का चिकित्सीय परीक्षण एवं काउंसलिंग वन स्टॉप सेंटर की टीम द्वारा की गई। काउंसलर विजेता गुप्ता ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान ज्ञात हुआ कि सुनीता थाना लाली बाजार जिला वर्दिया नेपाल की रहने वाली है। वह अवसाद की स्थिति में अपने घर से निकलकर लखीमपुर खीरी आ गई। महिला सुनीता द्वारा अपने पुत्री आशा थापा एवं सुषमा थापा का बार-बार नाम लिया जा रहा था। धीरे-धीरे सामान्य होने पर महिला द्वारा बताया गया कि उसकी दोनों पुत्रियां थाना भीमताल जिला नैनीताल में रहती हैं। वन स्टॉप सेंटर की सखी टीम द्वारा महिला की बेटियों एवं दामाद से संपर्क स्थापित कर केंद्र बुलवाया गया। हर तरह से जांच पड़ताल करने के बाद सुनीता को उसकी पुत्रियों के हवाले किया गया। अपनी बिछड़ी मां से मिलकर बेटी एवं दामाद खुश नजर आए।
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