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यही दुआ, ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचे महिला हॉकी टीम
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लखीमपुर खीरी। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के इतिहास रचते हुए पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद पूरे देश में हॉकी टीम के लिए दुआओं और शुभकामनाओं का दौर जारी है। भारत ने सोमवार को क्वॉर्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की टीम को 1-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। जिले की महिला हॉकी खिलाड़ियों ने टीम को फाइनल में प्रवेश कर गोल्ड मेडल जीत कर इतिहास रचने की शुभकामनाएं भेजी हैं।
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गोला की इमलिया निवासी हॉकी खिलाड़ी नीशू मिश्रा कहतीं हैं कि भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है, यह देश के लिए गौरव की बात है। हमारी हॉकी खिलाड़ियों ने उम्दा प्रदर्शन किया है। इसी का परिणाम है कि टीम सेमीफाइनल में पहुंच गई है। पूरा विश्वास है कि हमारी टीम सेमीफाइनल ही नहीं बल्कि फाइनल भी जीतेगी। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस उन्हें निखारने की जरूरत है। सरकार को खेलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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गोला के बिझौली निवासी हॉकी खिलाड़ी रानी देवी ने कहा कि अच्छी सुविधाओं एवं कोच के बिना खिलाड़ी आगे नहीं निकल पाते। खिलाड़ियों के लिए शासन स्तर से विशेष सुविधाएं और योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। ओलंपिक में महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है, जिससे नवोदित महिला खिलाड़ियों को काफी प्रेरणा मिली है। उम्मीद है कि टीम न सिर्फ फाइनल में प्रवेश करेगी बल्कि गोल्ड मेडल भी जीतेगी। यहां बता दें कि रानी देवी कई बार लखीमपुर की हॉकी टीम से खेल चुकीं हैं। इस समय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमपीएड कर रहीं हैं।
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मोहल्ला मिश्राना निवासी हॉकी की नेशनल खिलाड़ी रहीं तृप्ति अवस्थी कहती हैं कि पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचने पर हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों को बधाई। ईश्वर से यही कामना है कि फाइनल में पहुंचकर टीम विजयी हो और देश का नाम रोशन करे।
उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही खेल के प्रति लगाव था। इसके चलते अंडर-12 में चयन होने पर पटियाला खेलने गईं। 1988 में नेशनल के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण में चयन हुआ। 1991 में सब जूनियर नेशनल हिसार (हरियाणा) में और 1993 में जूनियर नेशनल खेला। इसके बाद 1994 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेला। इसके बाद मां के बीमार होने के कारण खेलना बंद हो गया। तृप्ति अवस्थी ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए आज न तो शिक्षक जागरूक हैं और न ही अभिभावक।
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राज्य स्तर पर खेल चुकीं हॉकी खिलाड़ी मनीषा शर्मा कहतीं हैं कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस जरूरत है तो उन्हें जागरूक कर आगे लाकर निखारने की। भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है, अब बस यही कामना है कि वे न सिर्फ फाइनल में प्रवेश करें बल्कि गोल्ड मेडल भी जीतें।
मनीषा ने बताया कि उन्होंने 14 साल की उम्र में खेलना शुरू किया था। इसके लिए आर्यकन्या इंटर कॉलेज की शिक्षक इंदु मिश्रा ने प्रेरणा दी और विष्णु प्रकाश शर्मा ने खेल की बारीकियां सिखाई। 1988 में स्टेट खेलने का मौका मिला। इसके बाद 1993 में नेशनल जूनियर खेलने के लिए जालंधर गईं। शादी के बाद पति की मृत्यु होने पर बीपीएड कर डॉन बास्को स्कूल में पीटीई की शिक्षक बन छात्र छात्राओं को खेलना सिखा रहीं हूं। संवाद
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गोला की इमलिया निवासी हॉकी खिलाड़ी नीशू मिश्रा कहतीं हैं कि भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है, यह देश के लिए गौरव की बात है। हमारी हॉकी खिलाड़ियों ने उम्दा प्रदर्शन किया है। इसी का परिणाम है कि टीम सेमीफाइनल में पहुंच गई है। पूरा विश्वास है कि हमारी टीम सेमीफाइनल ही नहीं बल्कि फाइनल भी जीतेगी। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस उन्हें निखारने की जरूरत है। सरकार को खेलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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गोला के बिझौली निवासी हॉकी खिलाड़ी रानी देवी ने कहा कि अच्छी सुविधाओं एवं कोच के बिना खिलाड़ी आगे नहीं निकल पाते। खिलाड़ियों के लिए शासन स्तर से विशेष सुविधाएं और योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। ओलंपिक में महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है, जिससे नवोदित महिला खिलाड़ियों को काफी प्रेरणा मिली है। उम्मीद है कि टीम न सिर्फ फाइनल में प्रवेश करेगी बल्कि गोल्ड मेडल भी जीतेगी। यहां बता दें कि रानी देवी कई बार लखीमपुर की हॉकी टीम से खेल चुकीं हैं। इस समय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमपीएड कर रहीं हैं।
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मोहल्ला मिश्राना निवासी हॉकी की नेशनल खिलाड़ी रहीं तृप्ति अवस्थी कहती हैं कि पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचने पर हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों को बधाई। ईश्वर से यही कामना है कि फाइनल में पहुंचकर टीम विजयी हो और देश का नाम रोशन करे।
उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही खेल के प्रति लगाव था। इसके चलते अंडर-12 में चयन होने पर पटियाला खेलने गईं। 1988 में नेशनल के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण में चयन हुआ। 1991 में सब जूनियर नेशनल हिसार (हरियाणा) में और 1993 में जूनियर नेशनल खेला। इसके बाद 1994 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेला। इसके बाद मां के बीमार होने के कारण खेलना बंद हो गया। तृप्ति अवस्थी ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए आज न तो शिक्षक जागरूक हैं और न ही अभिभावक।
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राज्य स्तर पर खेल चुकीं हॉकी खिलाड़ी मनीषा शर्मा कहतीं हैं कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस जरूरत है तो उन्हें जागरूक कर आगे लाकर निखारने की। भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है, अब बस यही कामना है कि वे न सिर्फ फाइनल में प्रवेश करें बल्कि गोल्ड मेडल भी जीतें।
मनीषा ने बताया कि उन्होंने 14 साल की उम्र में खेलना शुरू किया था। इसके लिए आर्यकन्या इंटर कॉलेज की शिक्षक इंदु मिश्रा ने प्रेरणा दी और विष्णु प्रकाश शर्मा ने खेल की बारीकियां सिखाई। 1988 में स्टेट खेलने का मौका मिला। इसके बाद 1993 में नेशनल जूनियर खेलने के लिए जालंधर गईं। शादी के बाद पति की मृत्यु होने पर बीपीएड कर डॉन बास्को स्कूल में पीटीई की शिक्षक बन छात्र छात्राओं को खेलना सिखा रहीं हूं। संवाद