{"_id":"5a916c9d4f1c1ba32a8b939b","slug":"no-light-in-godiyana-even-after-three-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल बाद भी रौशन नहीं हो सका गोड़ियाना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन साल बाद भी रौशन नहीं हो सका गोड़ियाना
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 24 Feb 2018 07:16 PM IST
विज्ञापन
odara
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत ओदारा के मजरा गोड़ियाना और झाला अब तक बिजली की रोशनी से महरूम है। तीन साल पहले बिजली विभाग ने बिजली के खंभे गाड़कर लाइन बिछा दी गई थी, लेकिन अब तक इनमें करंट नहीं दौड़ सका है। ग्राम पंचायत ओदारा विकास के मामले में अब भी काफी पिछड़ी है। यहां केवल दस प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृत मिली है, जिनका निर्माण कार्य प्रगति पर है। ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए गांव में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इस गांव की अधिकांश गलियां अभी कच्ची हैं। अब गांव में विकास की बयार बहना शुरू हुई है।
ओदारा ग्राम पंचायत की आबादी करीब 4000 है जबकि मतदाताओं की संख्या 2829 है। गांव की अधिकांश गलियां कच्ची है। जिन्हें पक्का करने का कार्य किया जा रहा है। गांव को जाने वाली सड़क पर इंटरलॉक लगा है। वहीं, कुछ अन्य गलियों में खड़ंजा लगा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव को खुले में शौच मुक्त करने के लिए 25 ग्रामीणों के घरों में शौचालय का निर्माण हो रहा है, जबकि 350 ग्रामीणों शौचालयों का निर्माण का होना प्रस्तावित है।
ग्राम पंचायत की प्रमुख समस्याएं
गांव में नाली न होने से गांव की गलियों में जलभराव गांव की प्रमुख समस्या है। ग्राम पंचायत में पंचायत घर भी नहीं है। इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने के कारण ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की भी दिक्कत उठानी पड़ रही है। ग्राम सभा और सिंचाई विभाग की जमीन का सीमांकन सही नहीं हो सका है, जिससे कई एकड़ जमीन पर ग्रामसभा और सिंचाई विभाग अपना अधिकार जता रहे हैं, जिससे कई योजनाएं अधर में लटकी हैं।
विज्ञापन
बिजली की राह देख रहे ग्रामीण
ग्रांम पंचायत के मजरा गोड़ियाना में तीन साल पहले बिजली के खंभे लगाकर उन पर तार भी बिछा दिए गए थे। तब से लेकर आज तक बिजली के तारों में करंट दौड़ने की राह देख रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने गांव की लाइन में करंट दौड़ने के बाबत पहल नहीं की।
आवासों की स्वीकृत में जनगणना का अड़ंगा
गांव में अधिकतर लोग झोपड़ी में रह रहे हैं, उन्हें चाह कर भी आवास नहीं दिला सकते। क्योंकि आवास उन्हीं के स्वीकृत किए जा रहे हैं जिनके नाम 2011 की जनगणना सूची में हैं। झोपड़ी में रह रहे लोगों के सूची में नाम ही नहीं है ऐसे में इन लोगों को आवास दिलाने में दिक्कत हो रही है। गांव के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
राम विलास पासवान, ग्राम प्रधान ओदारा
गांव में आवास बन रहे हैं पिछले जनगणना में अधिकांश नाम छूटने के कारण पात्रों को आवास नहीं मिल पा रहा है इस बार सूची बनाकर आवास और शौचालय पात्रों को दिए जाएंगे। गांव के विकास के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के अनुसार काम कराया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि सभी पात्रों को लाभ मिले। - अनुराग पांडे, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अवनीशशुक्ला
विज्ञापन
ओदारा ग्राम पंचायत की आबादी करीब 4000 है जबकि मतदाताओं की संख्या 2829 है। गांव की अधिकांश गलियां कच्ची है। जिन्हें पक्का करने का कार्य किया जा रहा है। गांव को जाने वाली सड़क पर इंटरलॉक लगा है। वहीं, कुछ अन्य गलियों में खड़ंजा लगा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव को खुले में शौच मुक्त करने के लिए 25 ग्रामीणों के घरों में शौचालय का निर्माण हो रहा है, जबकि 350 ग्रामीणों शौचालयों का निर्माण का होना प्रस्तावित है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत की प्रमुख समस्याएं
गांव में नाली न होने से गांव की गलियों में जलभराव गांव की प्रमुख समस्या है। ग्राम पंचायत में पंचायत घर भी नहीं है। इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने के कारण ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की भी दिक्कत उठानी पड़ रही है। ग्राम सभा और सिंचाई विभाग की जमीन का सीमांकन सही नहीं हो सका है, जिससे कई एकड़ जमीन पर ग्रामसभा और सिंचाई विभाग अपना अधिकार जता रहे हैं, जिससे कई योजनाएं अधर में लटकी हैं।
विज्ञापन
बिजली की राह देख रहे ग्रामीण
ग्रांम पंचायत के मजरा गोड़ियाना में तीन साल पहले बिजली के खंभे लगाकर उन पर तार भी बिछा दिए गए थे। तब से लेकर आज तक बिजली के तारों में करंट दौड़ने की राह देख रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने गांव की लाइन में करंट दौड़ने के बाबत पहल नहीं की।
आवासों की स्वीकृत में जनगणना का अड़ंगा
गांव में अधिकतर लोग झोपड़ी में रह रहे हैं, उन्हें चाह कर भी आवास नहीं दिला सकते। क्योंकि आवास उन्हीं के स्वीकृत किए जा रहे हैं जिनके नाम 2011 की जनगणना सूची में हैं। झोपड़ी में रह रहे लोगों के सूची में नाम ही नहीं है ऐसे में इन लोगों को आवास दिलाने में दिक्कत हो रही है। गांव के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
राम विलास पासवान, ग्राम प्रधान ओदारा
गांव में आवास बन रहे हैं पिछले जनगणना में अधिकांश नाम छूटने के कारण पात्रों को आवास नहीं मिल पा रहा है इस बार सूची बनाकर आवास और शौचालय पात्रों को दिए जाएंगे। गांव के विकास के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के अनुसार काम कराया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि सभी पात्रों को लाभ मिले। - अनुराग पांडे, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अवनीशशुक्ला