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फाइलेरिया की रोकथाम के लिए नाइट ब्लड सर्वे की हुई शुरूआत
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मंगलवार की रात करीब 125 लोगों के लिए सैंपल लिए गए
लखीमपुर खीरी। फाइलेरिया की रोकथाम के लिए मंगलवार से जिले भर में अभियान शुरू हो गया है। मंगलवार रात नगर एवं नकहा क्षेत्र में करीब 125 लोगों के सैंपल लिए गए।
जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे अभियान 20 सितंबर तक चलेगा। इसके लिए टीमें बनाई गई हैं, जो रात में लोगों के खून का सैंपल लेकर फाइलेरिया संक्रमण का पता लगाएंगे, क्योंकि इसका जीवाणु माइक्रोफाइलेरिया रात में सक्रिय होता है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि हर ब्लॉक के दो क्षेत्रों से रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इसमें एक क्षेत्र वह होगा, जिसमें पूर्व में फाइलेरिया रोगी मिले हों। उन्होंने बताया कि इसमें 20 साल से अधिक आयु की महिलाओं एव पुरुषों का सैंपल लिया जाएगा। सैंपल लेकर रक्त पट्टिका बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य फालेरिया रोगी मिलने पर उसका तत्काल इलाज मुहैया कराकर जिले को इस रोग से मुक्त बनाना है।
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लक्षण
1. कई दिन तक रुक-रुक कर बुखार आना।
2. शरीर में दर्द एवं लिम्फ नोड (लसिका ग्रंथियों) में सूजन।
3. हाथ, पैरों में सूजन (हाथी पांव) एवं पुरुषों के अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील)।
4. महिलाओं के ब्रेस्ट में सूजन, पहले दिन में पैरों में सूजन रहती है और रात में आराम करने पर कम हो जाती है।
5. संक्रमित व्यक्ति में बीमारी के लक्षण पांच से 15 साल तक में दिख सकते हैं।
बचाव
1. लक्षण लगने पर समय से जांच कराकर इलाज शुरू कर दें।
2. फाइलेरिया की दवा का सेवन पांच वर्ष तक हर साल कर बचा जा सकता है।
3. फाइलेरिया के मच्छर गंदी जगह पर पनपते हैं। इसलिए मच्छरों से बचाव करें।
4. साफ़ सफाई रखकर मच्छर से बचने के लिए फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।
5. रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
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लखीमपुर खीरी। फाइलेरिया की रोकथाम के लिए मंगलवार से जिले भर में अभियान शुरू हो गया है। मंगलवार रात नगर एवं नकहा क्षेत्र में करीब 125 लोगों के सैंपल लिए गए।
जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे अभियान 20 सितंबर तक चलेगा। इसके लिए टीमें बनाई गई हैं, जो रात में लोगों के खून का सैंपल लेकर फाइलेरिया संक्रमण का पता लगाएंगे, क्योंकि इसका जीवाणु माइक्रोफाइलेरिया रात में सक्रिय होता है।
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जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि हर ब्लॉक के दो क्षेत्रों से रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इसमें एक क्षेत्र वह होगा, जिसमें पूर्व में फाइलेरिया रोगी मिले हों। उन्होंने बताया कि इसमें 20 साल से अधिक आयु की महिलाओं एव पुरुषों का सैंपल लिया जाएगा। सैंपल लेकर रक्त पट्टिका बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य फालेरिया रोगी मिलने पर उसका तत्काल इलाज मुहैया कराकर जिले को इस रोग से मुक्त बनाना है।
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लक्षण
1. कई दिन तक रुक-रुक कर बुखार आना।
2. शरीर में दर्द एवं लिम्फ नोड (लसिका ग्रंथियों) में सूजन।
3. हाथ, पैरों में सूजन (हाथी पांव) एवं पुरुषों के अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील)।
4. महिलाओं के ब्रेस्ट में सूजन, पहले दिन में पैरों में सूजन रहती है और रात में आराम करने पर कम हो जाती है।
5. संक्रमित व्यक्ति में बीमारी के लक्षण पांच से 15 साल तक में दिख सकते हैं।
बचाव
1. लक्षण लगने पर समय से जांच कराकर इलाज शुरू कर दें।
2. फाइलेरिया की दवा का सेवन पांच वर्ष तक हर साल कर बचा जा सकता है।
3. फाइलेरिया के मच्छर गंदी जगह पर पनपते हैं। इसलिए मच्छरों से बचाव करें।
4. साफ़ सफाई रखकर मच्छर से बचने के लिए फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।
5. रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।