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सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो /लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 04 Jul 2016 11:12 PM IST
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somwati
- फोटो : amar ujala
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- महिलाओं ने पीपल पूजन कर सोमवती दान किया
- हर हर महादेव के जयघोष से गूंजते रहे शिवालय
सोमवती अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। बाद में गरीबों और ब्राह्मणों का दान देकर पुण्य अर्जित किया। इस मौके पर शिव मंदिरों और नदियों किनारे मेला लगा। महिलाओं ने पीपल की पूजा, परिक्रमा कर सोमवती का दान किया।
शहर से करीब नौ किलोमीटर दूर प्राचीन लिलौटीनाथ मंदिर में दिनभर मेला लगा रहा। श्रद्धालुओं ने उल्ल और कंडवा नदियों में स्नान करने के बाद गरीबों, रोगियों और ब्राह्मणों को दान दिया। लिलौटीनाथ के प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक किया। शहर के भुइफोरवानाथ, जंगलीनाथ मंदिर भी श्रद्धालुओं की दिन भर भीड़ रही। मोहम्मदी क्षेत्र के टेढ़ेनाथ मंदिर, निघासन के मोटे बाबा, मढ़ियाघाट पर भी दर्शनार्थियों का दिन भर जमावड़ा रहा।
गोला गोकर्णनाथ। सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पौराणिक शिव मंदिर में पूजन कर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनकर दान पुण्य किया। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही पुजारी दिनेशचंद्र मिश्र ने मंदिर के कपाट खोल दिए। दूर दराज से आए श्रद्धालु गोकर्ण तीर्थ में स्नान कर हाथों में फूल, भांग, धतूरा, अक्षत आदि पूजन सामग्री लेकर लाइन में लग गए। भक्तों ने बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव का अभिषेक किया।
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पूरा मंदिर परिसर जयकारों और घंटानिनाद से गुंजायमान रहा। महिलाओं और युवतियों ने पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा कर पूजन किया और कन्याओं को शृंगार सामग्री और अन्न दान, दक्षिणा देकर पुण्य कमाया।
धौरहरा खीरी। आषाढ़ मास की सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई एवं महिलाओं ने पीपल की पूजा कर परिक्रमा की। सोमवती दान किया। सुबह से ही खराब मौसम के बावजूद लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। धौरहरा के जालिमनगर स्थित पवित्र सरयू नदी पर एक दिन पहले से लोग पहुंच जाते हैं। रात भर कीर्तन, भजन करते हैं। पूरे क्षेत्र से हजारों लोग पवित्र सरयू नदी पहुंच कर जल लेकर आते हैं, जिसे नरैनाबाबा, लीलानाथ नागेश्वर मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र सरयू नदी में हजारों लोगों ने स्नान किया। सरयू नदी से कांवड़ लेकर शिवमंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।
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- हर हर महादेव के जयघोष से गूंजते रहे शिवालय
सोमवती अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। बाद में गरीबों और ब्राह्मणों का दान देकर पुण्य अर्जित किया। इस मौके पर शिव मंदिरों और नदियों किनारे मेला लगा। महिलाओं ने पीपल की पूजा, परिक्रमा कर सोमवती का दान किया।
शहर से करीब नौ किलोमीटर दूर प्राचीन लिलौटीनाथ मंदिर में दिनभर मेला लगा रहा। श्रद्धालुओं ने उल्ल और कंडवा नदियों में स्नान करने के बाद गरीबों, रोगियों और ब्राह्मणों को दान दिया। लिलौटीनाथ के प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक किया। शहर के भुइफोरवानाथ, जंगलीनाथ मंदिर भी श्रद्धालुओं की दिन भर भीड़ रही। मोहम्मदी क्षेत्र के टेढ़ेनाथ मंदिर, निघासन के मोटे बाबा, मढ़ियाघाट पर भी दर्शनार्थियों का दिन भर जमावड़ा रहा।
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गोला गोकर्णनाथ। सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पौराणिक शिव मंदिर में पूजन कर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनकर दान पुण्य किया। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही पुजारी दिनेशचंद्र मिश्र ने मंदिर के कपाट खोल दिए। दूर दराज से आए श्रद्धालु गोकर्ण तीर्थ में स्नान कर हाथों में फूल, भांग, धतूरा, अक्षत आदि पूजन सामग्री लेकर लाइन में लग गए। भक्तों ने बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव का अभिषेक किया।
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पूरा मंदिर परिसर जयकारों और घंटानिनाद से गुंजायमान रहा। महिलाओं और युवतियों ने पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा कर पूजन किया और कन्याओं को शृंगार सामग्री और अन्न दान, दक्षिणा देकर पुण्य कमाया।
धौरहरा खीरी। आषाढ़ मास की सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई एवं महिलाओं ने पीपल की पूजा कर परिक्रमा की। सोमवती दान किया। सुबह से ही खराब मौसम के बावजूद लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। धौरहरा के जालिमनगर स्थित पवित्र सरयू नदी पर एक दिन पहले से लोग पहुंच जाते हैं। रात भर कीर्तन, भजन करते हैं। पूरे क्षेत्र से हजारों लोग पवित्र सरयू नदी पहुंच कर जल लेकर आते हैं, जिसे नरैनाबाबा, लीलानाथ नागेश्वर मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र सरयू नदी में हजारों लोगों ने स्नान किया। सरयू नदी से कांवड़ लेकर शिवमंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।