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नेपाली हाथियों को रास आ रहा दुधवा

Thu, 29 Jul 2021 12:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jul 2021 12:15 AM IST
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Nepalese elephants like Dudhwa
दुधवा के जंगल में घूमते नेपाल के हाथी। - फोटो : amar ujala

हाथियों के नेपाल से तराई जंगल आने के हैं कई कॉरीडोर
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दुधवा रिजर्व में 80 से अधिक है जंगली हाथियों की संख्या

लखीमपुर खीरी। दुधवा की वानस्पतिक संरचना नेपाल के जंगलों जैसी ही है। इसके चलते यहां की आबोहवा नेपाल के हाथियों को काफी रास आ रही है। यही कारण है कि नेपाल के जंगलों से निकलकर जंगली हाथी दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में आते हैं। यहां कुछ दिन या कुछ महीने रुकने के बाद लौट जाते हैं। कभी-कभी कुछ हाथी स्थायी रूप से यहीं बस भी जाते हैं।
नेपाल से तराई के जंगल में हाथियों के आने के कई कॉरीडोर हैं। यह कॉरीडोर मौजूदा हाथियों के पुरखे भी इस्तेमाल करते रहे हैं। इनमें से एक कॉरीडोर नेपाल के शुक्लाफांटा से घनाराघाट, टाटरगंज, ट्रांस शारदा क्षेत्र होते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के हरीपुर रेंज तक है। जंगली हाथी यहां से किशनपुर सेंक्चुरी की ओर रुख करते हैं। मौजूदा समय में नेपाल से आए हाथियों के दल ने भी यही कॉरीडोर अपनाया है। इनके अलावा हाथियों के और भी कई कॉरीडोर हैं, जिनका इस्तेमाल हाथी दुधवा के सठियाना रेंज, कतर्निया घाट और महराजगंज के सोहागी बरुआ आने में करते हैं। नेपाल के जंगली हाथी मुख्य रूप से शुक्लाफांटा के अलावा वर्दिया नेशनल पार्क और रॉयल चितवन नेशनल पार्क से चलकर प्रचलित कॉरीडोर से यहां आते हैं। यहां बता दें कि दुधवा टाइगर रिजर्व में मौजूदा समय में 80 से अधिक जंगली हाथी हैं। इनमें अधिकतर ऐसे हाथी हैं जो नेपाल से आकर स्थायी रूप से यहीं बस गए।
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नेपाल में बाढ़ से भी पलायन को मजबूर होते हैं हाथी

नेपाल की नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ के चलते बारिश के मौसम में जंगल के अंदर पानी भर जाता है। जिससे जंगली हाथियों के लिए आवास का संकट पैदा हो जाता है। हाल के वर्षों में देखा गया है कि नेपाल से जंगली हाथी जुलाई अगस्त महीने में आ रहे हैं। वर्ष 2019 में नेपाल के शुक्लाफांटा से आए करीब 20 जंगली हाथियों का दल किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में करीब एक महीने तक रुका था। इन हाथियों ने यहां जमकर उत्पात मचाया था। वर्ष 2020 में भी हाथियों का झुंड नेपाल से आया था लेकिन कुछ दिन ही यहां रहकर वापस चला गया था।
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पुरखों के अपनाए रास्ते पर ही चलते हैं जंगली हाथी

दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर रमेश पांडेय का कहना है कि हाथी हमेशा अपने पूर्वजों के अपनाए गए रास्ते पर ही चलते हैं। नेपाल से यहां हाथियों के आने का क्रम सदियों से चला आ रहा है। आज भी हाथी वही कारीडोर इस्तेमाल कर यहां आ रहे हैं। नेपाल और तराई के जंगलों की जलवायु और वानस्पतिक संरचना में काफी समानता होने के कारण नेपाल के जंगली हाथी यहां आकर लंबा प्रवास करना पसंद करते हैं। यह खुशी की बात है कि दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव और वानस्पतिक विविधता काफी समृद्ध है।

नेपाल से जंगली हाथियों का दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में आने और यहां प्रवास करने का सिलसिला काफी पुराना है। यहां के जंगलों की संरचना नेपाल के जंगलों जैसी ही है। इसलिए नेपाली हाथियों को दुधवा के जंगलों की आबोहवा काफी अनुकूल है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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