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नेपाली हाथियों ने वन विभाग की झोंपड़ी तोड़ी, कई पेड़ उखाड़े

Tue, 20 Jul 2021 12:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 12:05 AM IST
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Nepalese elephants broke forest department's hut, uprooted many trees
मड़हा जंगल में हाथियों के डेरा डालने से किसानों की नींद उड़ी
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बांकेगंज। नेपाल के शुक्ला फांटा वन्यजीव विहार से निकलकर दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में पहुंचे हाथियों के दल ने मड़हा जंगल में रविवार रात को काफी उत्पात मचाया। हाथियों ने वन विभाग की एक झोंपड़ी समेत कई पेड़ों को उखाड़ फेंका है। हाथियों के उपद्रव से आसपास के गांवों में किसानों की नींद उड़ गई है। नेपाल के शुक्ला फांटा वन्यजीव विहार से निकलकर नेपाली हाथियों का झुंड पहले पीलीभीत टाइगर रिजर्व के हरीपुर रेंज फिर बफरजोन के भीरा रेंज की महराजनगर बीट जंगल से होकर फूटा कुंआ पहुंचा। यहां से मैलानी रेंज की पिपरा सुल्तानपुर बीट के गढ़ा होते हुए बड़ी नहर पार कर मड़हा जंगल पहुंच गया है। यहां यह हाथी दो दिन से डेरा डाले हुए हैं।
रविवार रात करीब आठ बजे हाथियों का दल भीरा-पलिया हाईवे के पास से होता हुआ बड़ी नहर के पुल पर पहुंचा। जहां से इन हाथियों ने खेतों की ओर तो रुख नहीं किया, लेकिन छप्पन चौराहे के पास वन विभाग की झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया। कई पेड़ों को भी उखाड़ फेंका है।
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मैलानी रेंज जंगल के आसपास बसे गांवों के करीब पहुंचकर इन हाथियों ने वहां बांस, गूलर और बरगद के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है। रात भर इधर-उधर भटकने के बाद फिर भोर में करीब पांच बजे मड़हा जंगल ठिकाने पर लौट आए हैं। निगरानी टीमों के मुताबिक, हाथियों का दल इस वक्त जंगल के बीच में बने तालाब की ओर जाता देखा गया है। झुंड में 10 से 12 हाथी होने का अनुमान है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। जंगल और बड़ी नहर की पटरी पर वयस्क हाथियों और उनके बच्चों के मिले पगचिन्हों से इस बात की पुष्टि हुई है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक /फील्ड निदेशक संजय पाठक ने निगरानी टीमों को हाथियों की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने जंगल के आसपास बसे किसानों से अपील की है कि हाथियों से फसलों के बचाव के लिए ढोल-नगाड़े बजाएं। हाथियों के आने की आहट मिलते ही खेतों के आसपास आग जलाएं, उनके नजदीक कतई न जाएं। हाथियों के आने पर इसकी सूचना तत्काल वन कर्मियों को दें।
नेपाल से आए जंगली हाथियों के मड़हा जंगल में होने की पुष्टि हुई है। रात में इन हाथियों ने वन विभाग की झोंपड़ी और कई पेड़ों को काफी नुकसान पहुंचाया है। इनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
- मनोज सोनकर, वन संरक्षक/ प्रभारी उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
किसानों की चिंता : कहीं हाथी उजाड़ न दें घर की खुशियां
बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के आसपास बसे गांव के किसानों के सामने नेपाली हाथियों के रूप में बड़ी आफत सामने आई है। उनके खेतों में धान, गन्ने और केले की फसलें खड़ी हैं। गन्ना और केला हाथियों का पसंदीदा भोजन होता है। ऐसे में जंगली हाथियों के आने से किसानों को अपनी फसलों के उजड़ने का डर सताने लगा है। इन फसलों पर न केवल किसानों की उम्मीदें, बल्कि घर गृहस्थी का खर्च चलाने की खुशियां भी टिकी हैं।
पहाड़ नगर निवासी किसान धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि गांव से सटे मड़हा जंगल में डेरा डाले जंगली हाथियों से उनकी फसलें रौंदने का खतरा पैदा हो गया है। दो साल पहले पहुंचे इन हाथियों ने उनकी धान और गन्ने की फसलें तहस-नहस कर दी थीं।
पहाड़ नगर गांव निवासी किसान दिलबाग सिंह का कहना है कि मड़हा जंगल में दो दिन से डेरा डाले नेपाली हाथियों के डर से उनकी आंखों की नींद उड़ी है। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि इन उत्पाती हाथियों के खेतों की ओर रुख करने से उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी।
पहाड़ नगर गांव निवासी किसान लाडी सिंह का कहना है गांव से चंद कदमों की दूरी पर मड़हा जंगल में डेरा जमाए बैठे जंगली हाथियों के झुंड का उनके खेतों तक पहुंचने का खतरा मंडराने लगा है। दो साल पहले आए जंगली हाथियों ने अपने पैरों तले उनकी फसलों को रौंद का बर्बाद कर दिया था।

पूरनपुर गांव निवासी किसान संदीप सिंह का कहना है कि मड़हा जंगल में मौजूद नेपाली हाथियों का झुंड किसानों की आफत बन गया है। हाथी दिन में आराम करते हैं और रात में निकलने पर जंगल से सटे खेतों में पहुंचकर किसानों की फसलों को तबाह करते हैं। इसको लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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