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Lakhimpur Kheri News: न अधिग्रहण हुआ मुकम्मल, न किसानों को वापस मिलीं जमीनें

Tue, 04 Mar 2025 11:15 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 04 Mar 2025 11:15 PM IST
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Neither the acquisition was complete nor the farmers got their lands back
लखीमपुर खीरी। भूमि अधिग्रहण संबंधी एक मामला जिले में डेढ़ दशक से अटका पड़ा है। यहां आवास विकास परिषद की ओर से प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी के लिए 2010 में शहर से सटे राजापुर गांव में किसानों की 316.83 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की गई थी। किसान शुरुआत से अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं और परिषद ने चार साल पहले जिला प्रशासन को मुआवजा तक भेज दिया, पर सहमति न बन पाने के कारण योजना अधर में है।
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शहर से लगे सीतापुर फोरलेन हाईवे और पीलीभीत-बस्ती हाईवे के बीच राजापुर गांव में पड़ने वाली इस भूमि पर चार सितंबर 2010 को उप्र आवास एवं विकास परिषद की ओर से राजापुर एलआरपी रोड भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अधिसूचना हुई थी। किसानों के लगातार विरोध के कारण यह योजना अभी शुरू नहीं हो पाई है।
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योजना की जद में 300 से ज्यादा किसान आ रहे हैं। बताते चलें कि दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक बैठक के दौरान निर्देश दिए थे कि 15 मार्च तक लंबित परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण पूरा किया जाए। इसको लेकर यहां हलचल बढ़ गई है। हालांकि परिषद की ओर से लगातार प्रक्रिया चल रही है, पर किसान भूमि देन पर सहमत नहीं हैं। इस कारण कारण अभी तक भौतिक कब्जा परिषद को नहीं मिला है।
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इसलिए हो रहा योजना का विरोध

राजापुर गांव में पूर्व में पिछले 43 वर्षों में अलग-अलग कारणों से पांच बार किसानों की भूमि अधिग्रहण की जा चुकी है। सबसे पहले वर्ष 1972 में मंडी समिति की स्थापना के लिए यहां 36.11 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई। इसके बाद के वर्षों में इसी गांव में आईटीआई, जिला उद्योग केंद्र व इंडस्ट्रियल एरिया, डायट व पुरानी आवास विकास कॉलोनी की स्थापना के लिए यहां भूमि अधिग्रहण हो चुका है। इसी कारण अब इस नई योजना का किसान बराबर विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा परिषद ने भूमि लेने के लिए पूर्व में 17.91 रुपये प्रति वर्ग फिट की दर तय की थी, जिससे विरोध और बढ़ गया।
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पिछले वर्ष जून से बढ़ गया विरोध

बीते वर्ष 2024 के जून माह में किसानों की जमीन को खतौनी पर आवास विकास परिषद ने अपने नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद से किसानों का विरोध बढ़ गया है। किसान पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन, कलक्ट्रेट का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने के अलावा बीते दिनों लखनऊ की गोमती नदी में जल सत्याग्रह भी कर चुके हैं।

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राजापुर गांव में अधिग्रहण को लेकर परिषद की प्रक्रिया करीब-करीब पूरी हो गई है। किसानों के विरोध के कारण अभी भौतिक कब्जा नहीं मिला है। कुछ किसान मुआवजे की रकम बढ़ाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे, जिनके पक्ष में निर्णय हुआ है। तीन महीने का समय दिया गया है। जल्द ही प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

राहुल यादव, अधीक्षण अभियंता, उप्र आवास एवं विकास परिषद


किसानों की सहमति न मिल पाने के कारण योजना लटकी है। अभी भूमि पर भौतिक कब्जा नहीं मिला है। पूर्व में निर्धारित रेट के हिसाब से मुआवजे के लिए वर्ष 2021 में जिला प्रशासन को परिषद की ओर से 60 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं।

कामता प्रसाद, अधिशासी अभियंता, उप्र आवास एवं विकास परिषद
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