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Lakhimpur Kheri News: जरूरतमंदों के लिए उम्मीद बन रहीं नेहा राज और उनकी टीम
Sat, 07 Feb 2026 11:50 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:50 PM IST
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बुजुर्ग महिला को अपने हाथ से खाना खिलाती नेहा। स्रोत: स्वयं
लखीमपुर खीरी। जब इरादे नेक और जज्बा मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी भी राह नहीं रोक पाती। शहर निवासी नेहा राज ने यही साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपनी साथी महिलाओं के साथ मिलकर एक छोटी टीम बनाई और समाज के उन लोगों तक मदद पहुंचाने निकल पड़ीं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इंटर तक पढ़ीं नेहा राज सामाजिक संस्था दिशा परिवर्तन फाउंडेशन की सचिव हैं। उनके साथ इस सेवा यात्रा में संकटा देवी मोहल्ले की गुड़िया, कमलापुर की सृष्टि सिंह और शैलेंद्री कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। चारों महिलाओं ने यह संकल्प लिया है कि वे जरूरतमंदों को सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि भोजन, कपड़े, इलाज और सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाने का प्रयास करेंगी।
पिछले छह महीनों से यह टीम लगातार शहर के रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही है। साथ ही राजापुर स्थित वीरबाबा मंदिर के सामने झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले परिवारों तक राशन, कपड़े और जरूरी सामान पहुंचा रही हैं। कभी भूखे को खाना, कभी ठंड से ठिठुरते बुजुर्ग को कंबल, तो कभी किसी बीमार की दवा, इनके लिए सेवा कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इंसानियत का जीवंत रूप है। इन चारों महिलाओं की यह पहल न सिर्फ जरूरतमंदों की मदद कर रही है, बल्कि समाज को संवेदनशील बनने का संदेश भी दे रही है।
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बुजुर्ग पवन शर्मा ने बताया कि वे काफी समय से आंखों की समस्या से परेशान थे और इलाज कराने की हैसियत नहीं थी। नेहा बिटिया और उनकी टीम ने उनकी सुध ली, जिससे अब आंखों के इलाज की उम्मीद जगी है।
गीता देवी और संतोषी ने बताया कि दिशा परिवर्तन फाउंडेशन की टीम अक्सर उनके पास खाना और कपड़े लेकर आती है। कई बार खाने तक का इंतजाम नहीं होता, ऐसे में यह मदद बच्चों का पेट भरने का सहारा बनती है।
रेलवे स्टेशन और ओवरब्रिज के नीचे रात गुजारने वाले पुत्तन ने बताया कि ठंड और भूख में जब कोई पूछने वाला नहीं होता, तब ये लोग आकर खाना और कपड़े देते हैं। इससे लगता है कि इंसानियत अभी जिंदा है।
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सोशल मीडिया पर नेहा राज के वीडियो देखकर वह उनसे प्रभावित हुईं और उनकी टीम से जुड़ीं। जब किसी भूखे इंसान को हम खाना देते हैं तो मेरे चेहरे पर सुकून दिखता है। यह सेवा उन्हें अंदर से मजबूत बनाती है।
-गुड़िया, निवासी, संकटा देवी मोहल्ला
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बीएससी करने के बाद मैं केजीएमयू लखनऊ से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हूं। लोगों की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है। इसी सोच के साथ मैं मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ रही हूं, ताकि और अधिक लोगों की सेवा कर सकें।
-सृष्टि सिंह, निवासी कमलापुर
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नेहा ने जब मुझे अपनी टीम का हिस्सा बनाया, तो उनके साथ जाकर मुझे लोगों की सेवा करना अच्छा लगा। अगर महिलाएं ठान लें, तो समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। हम चारों बस यही चाहती हैं कि कोई भी इंसान भूखा, बीमार या बेसहारा न रहे।
-शैलेंद्री, निवासी, कमलापुर मोहल्ला
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इंटर तक पढ़ीं नेहा राज सामाजिक संस्था दिशा परिवर्तन फाउंडेशन की सचिव हैं। उनके साथ इस सेवा यात्रा में संकटा देवी मोहल्ले की गुड़िया, कमलापुर की सृष्टि सिंह और शैलेंद्री कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। चारों महिलाओं ने यह संकल्प लिया है कि वे जरूरतमंदों को सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि भोजन, कपड़े, इलाज और सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाने का प्रयास करेंगी।
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पिछले छह महीनों से यह टीम लगातार शहर के रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही है। साथ ही राजापुर स्थित वीरबाबा मंदिर के सामने झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले परिवारों तक राशन, कपड़े और जरूरी सामान पहुंचा रही हैं। कभी भूखे को खाना, कभी ठंड से ठिठुरते बुजुर्ग को कंबल, तो कभी किसी बीमार की दवा, इनके लिए सेवा कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इंसानियत का जीवंत रूप है। इन चारों महिलाओं की यह पहल न सिर्फ जरूरतमंदों की मदद कर रही है, बल्कि समाज को संवेदनशील बनने का संदेश भी दे रही है।
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बुजुर्ग पवन शर्मा ने बताया कि वे काफी समय से आंखों की समस्या से परेशान थे और इलाज कराने की हैसियत नहीं थी। नेहा बिटिया और उनकी टीम ने उनकी सुध ली, जिससे अब आंखों के इलाज की उम्मीद जगी है।
गीता देवी और संतोषी ने बताया कि दिशा परिवर्तन फाउंडेशन की टीम अक्सर उनके पास खाना और कपड़े लेकर आती है। कई बार खाने तक का इंतजाम नहीं होता, ऐसे में यह मदद बच्चों का पेट भरने का सहारा बनती है।
रेलवे स्टेशन और ओवरब्रिज के नीचे रात गुजारने वाले पुत्तन ने बताया कि ठंड और भूख में जब कोई पूछने वाला नहीं होता, तब ये लोग आकर खाना और कपड़े देते हैं। इससे लगता है कि इंसानियत अभी जिंदा है।
सोशल मीडिया पर नेहा राज के वीडियो देखकर वह उनसे प्रभावित हुईं और उनकी टीम से जुड़ीं। जब किसी भूखे इंसान को हम खाना देते हैं तो मेरे चेहरे पर सुकून दिखता है। यह सेवा उन्हें अंदर से मजबूत बनाती है।
-गुड़िया, निवासी, संकटा देवी मोहल्ला
बीएससी करने के बाद मैं केजीएमयू लखनऊ से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हूं। लोगों की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है। इसी सोच के साथ मैं मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ रही हूं, ताकि और अधिक लोगों की सेवा कर सकें।
-सृष्टि सिंह, निवासी कमलापुर
नेहा ने जब मुझे अपनी टीम का हिस्सा बनाया, तो उनके साथ जाकर मुझे लोगों की सेवा करना अच्छा लगा। अगर महिलाएं ठान लें, तो समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। हम चारों बस यही चाहती हैं कि कोई भी इंसान भूखा, बीमार या बेसहारा न रहे।
-शैलेंद्री, निवासी, कमलापुर मोहल्ला

बुजुर्ग महिला को अपने हाथ से खाना खिलाती नेहा। स्रोत: स्वयं

बुजुर्ग महिला को अपने हाथ से खाना खिलाती नेहा। स्रोत: स्वयं

बुजुर्ग महिला को अपने हाथ से खाना खिलाती नेहा। स्रोत: स्वयं