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Lakhimpur Kheri News: एमएसपी 2441 रुपये, किसानों को आढ़तों पर 1950 में बेचना पड़ रहा धान
Sat, 17 Oct 2026 12:22 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:22 AM IST
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राजापुर मंडी में आढ़त पर धान की हो रही तौल। संवाद
लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद शुरू न होने से किसानों को आढ़तों पर कम दाम में फसल बेचनी पड़ रही है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि शुक्रवार को मंडी में किसानों को 1950 रुपये तक भाव मिला। लगातार बारिश के कारण धान में 24 से 29 प्रतिशत तक नमी होने से सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
धान खरीद के लिए जिले में पांच क्रय एजेंसियों के 160 केंद्र बनाए गए हैं। इस बार कॉमन धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये और ग्रेड-ए का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 72 रुपये अधिक है। इसके बावजूद किसान सरकारी केंद्रों पर खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रों पर नमी की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही धान खरीदा जा रहा है। शुक्रवार को जिले में कहीं भी सरकारी खरीद होने की सूचना नहीं मिली।
आढ़तों पर कम कीमत मिलने के बावजूद किसान फसल बेच रहे हैं। किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि वह 200 क्विंटल धान लेकर आढ़त पहुंचे थे। सुबह बोली शुरू हुई तो अच्छे भाव की उम्मीद थी, लेकिन बोली 1950 रुपये प्रति क्विंटल पर रुक गई। दोबारा ढुलाई के खर्च से बचने के लिए उन्हें कम कीमत पर धान बेचना पड़ा।
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पलिया के सुखविंदर ने बताया कि धान में हल्की नमी थी। सरकारी केंद्रों पर फसल बेचने के लिए कई स्तरों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि आढ़तों पर आसानी से धान बेचने के साथ नकद रुपये भी मिल जाते हैं। ऐसे में किसान कब तक धान सूखने का इंतजार करें?
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बारिश के कारण धान में नमी ज्यादा है। दो-तीन दिन में खरीद शुरू हो जाएगी। किसान साफ और धूप में सुखाकर सरकारी क्रय केंद्रों पर धान लाएं, ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का लाभ मिल सके।
-नमन पांडेय, डिप्टी आरएमओ
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धान खरीद के लिए जिले में पांच क्रय एजेंसियों के 160 केंद्र बनाए गए हैं। इस बार कॉमन धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये और ग्रेड-ए का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 72 रुपये अधिक है। इसके बावजूद किसान सरकारी केंद्रों पर खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रों पर नमी की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही धान खरीदा जा रहा है। शुक्रवार को जिले में कहीं भी सरकारी खरीद होने की सूचना नहीं मिली।
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आढ़तों पर कम कीमत मिलने के बावजूद किसान फसल बेच रहे हैं। किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि वह 200 क्विंटल धान लेकर आढ़त पहुंचे थे। सुबह बोली शुरू हुई तो अच्छे भाव की उम्मीद थी, लेकिन बोली 1950 रुपये प्रति क्विंटल पर रुक गई। दोबारा ढुलाई के खर्च से बचने के लिए उन्हें कम कीमत पर धान बेचना पड़ा।
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पलिया के सुखविंदर ने बताया कि धान में हल्की नमी थी। सरकारी केंद्रों पर फसल बेचने के लिए कई स्तरों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि आढ़तों पर आसानी से धान बेचने के साथ नकद रुपये भी मिल जाते हैं। ऐसे में किसान कब तक धान सूखने का इंतजार करें?
बारिश के कारण धान में नमी ज्यादा है। दो-तीन दिन में खरीद शुरू हो जाएगी। किसान साफ और धूप में सुखाकर सरकारी क्रय केंद्रों पर धान लाएं, ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का लाभ मिल सके।
-नमन पांडेय, डिप्टी आरएमओ