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Lakhimpur Kheri News: पिता के वचन की खातिर श्रीराम ने त्यागा राजपाठ
Sat, 17 Oct 2026 12:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:28 AM IST
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मेला मैदान में चल रहा रामलीला मंचन। संवाद
लखीमपुर खीरी। राजपाट से बड़ा पिता का वचन और सुखों से बढ़कर कर्तव्य की मर्यादा। शहर की ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार को राम वनगमन की लीला के मंचन से यही संदेश दिया गया।
श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा के बहकावे में कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने पर राजा दशरथ व्याकुल हो उठे।
पिता को वचन से बंधा देख श्रीराम ने बिना विरोध वनवास स्वीकार कर लिया। माता कौशल्या से विदाई के बाद सीता और लक्ष्मण ने भी उनके साथ वन जाने का संकल्प जताया। राजमहल छोड़ते समय अयोध्यावासियों का दुख और राजा दशरथ की व्याकुलता कलाकारों ने सजीव ढंग से प्रस्तुत की। रामचरितमानस की चौपाइयों ने मंचन को और भावपूर्ण बना दिया।
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मेला मैदान में रामलीला देखने के लिए शहर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। मंचन के बाद राम-लक्ष्मण सहित राजदरबार की परंपरागत सवारी निकाली गई। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती सवारी का लोगों ने जयकारों के साथ स्वागत किया।
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श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा के बहकावे में कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने पर राजा दशरथ व्याकुल हो उठे।
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पिता को वचन से बंधा देख श्रीराम ने बिना विरोध वनवास स्वीकार कर लिया। माता कौशल्या से विदाई के बाद सीता और लक्ष्मण ने भी उनके साथ वन जाने का संकल्प जताया। राजमहल छोड़ते समय अयोध्यावासियों का दुख और राजा दशरथ की व्याकुलता कलाकारों ने सजीव ढंग से प्रस्तुत की। रामचरितमानस की चौपाइयों ने मंचन को और भावपूर्ण बना दिया।
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मेला मैदान में रामलीला देखने के लिए शहर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। मंचन के बाद राम-लक्ष्मण सहित राजदरबार की परंपरागत सवारी निकाली गई। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती सवारी का लोगों ने जयकारों के साथ स्वागत किया।