Uttarkashi Tunnel: सुरंग में फंसे मंजीत का फोटो देख रो पड़ती हैं मां, एसडीएम से बोलीं- मेरा बेटा कब आएगा साहब
उत्तरकाशी में 12 नवंबर से 41 श्रमिक सुरंग में फंसे हुए हैं। इनमें लखीमपुर खीरी के गांम भैरमपुर निवासी मंजीत भी शामिल है। जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे वैसे परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। मंजीत की मां का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों में लखीमपुर खीरी के गांम भैरमपुर निवासी 25 वर्षीय मंजीत भी शामिल है। सुरंग से बाहर निकालने में हो रही देरी से परिवार वाले बेहद चिंतित हैं। मंजीत के पिता उत्तरकाशी में ही हैं। यहां मां बेटे की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही हैं। मोबाइल पर बेटे का फोटो देखकर फफक पड़ती हैं। शुक्रवार रात एसडीएम अश्विनी कुमार सिंह मंजीत के घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया।
मंजीत की मां चौधराइन ने बताया कि उनके बड़े बेटे की मुंबई में एक हादसे में मौत हो गई थी। छोटा बेटा मंजीत मेहनत मजदूरी कर परिवार के भरण पोषण में मदद करता है। वह दिवाली से पहले उत्तराखंड में मजदूरी करने गया था। सुरंग हादसे की जानकारी मिलने के बाद से ही उनका रो-रोकर बुरा हाल है। मंजीत के पिता उत्तरकाशी में घटनास्थल पर ही मौजूद हैं।
कोटेदार ने उपलब्ध कराया राशन
मंजीत के परिवार को गांव के कोटेदार वीरेंद्र के जरिए राशन उपलब्ध कराया गया है। एसडीएम अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि मंजीत के परिवार का हाल-चाल जानने के लिए शुक्रवार रात करीब 8:00 बजे वह स्वयं पहुचे। परिवार को खाने के लिए राशन, दाल, खाद्य तेल समेत अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
उन्हें आश्वासन दिया गया है वह लोग किसी प्रकार की फिक्र न करें। इस बीच मोबाइल पर अपने बेटे की फोटो देखते हुए मंजीत की मां चौधराइन ने कहा कि साहब अब बर्दाश्त के बाहर है। मेरा बेटा कब आएगा। एक-एक दिन इंतजार कराया जा रहा है, क्या सरकार के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि जल्दी से जल्दी उनके बेटे सहित सभी फंसे मजदूरों को बाहर निकाला जा सके।
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'भाई के माथे पर लगाऊंगी तिलक'
भाई दूज पर्व बीत गया, लेकिन सुरंग में फंसे मंजीत की 15 वर्षीय बहन रंजना भाई के आने और उसके माथे पर मंगल तिलक करने का इंतजार कर रही है। रंजना बताती हैं कि उसके भाई मंजीत ने दीपावली के बाद आने को कहा था। लेकिन सपने में भी नहीं सोचा था कि भाई सुरंग में फंस जाएगा। उसका मन बेचैन जरूर है, लेकिन उसका भाई वापस आएगा। जब भाई घर आएगा तो तिलक लगाकर स्वागत करूंगी।