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Silkyara Tunnel: भाई के माथे पर लगाऊंगी मंगल तिलक; भैया दूज से इंतजार कर रही सुरंग में फंसे मंजीत की बहन

Sat, 25 Nov 2023 04:18 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 25 Nov 2023 04:18 PM IST
सार

उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों में भैरमपुर गांव का 25 वर्षीय मंजीत भी शामिल है। उसके परिजन बेहद चिंतित हैं। बहन रंजना भैया दूज से भाई के आने की राह देख रही है। 

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Family members praying to God for the safety of Manjeet who trapped in the Silkyara Tunnel
मंजीत की बहन और मां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 श्रमिक बाहर निकले की उम्मीद लगाए हैं। उन्हें बाहर निकालने की पूरी कोशिशें हो रही हैं, लेकिन हर बार मशीन के आगे बाधा आ रही है। सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों में लखीमपुर खीरी का मंजीत भी शामिल है। सिंगाही थाना क्षेत्र के भैरमपुर गांव निवासी मंजीत के परिजन चिंतित हैं। वे श्रमिकों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।  

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भाई दूज पर्व बीत गया, लेकिन सुरंग में फंसे मंजीत की 15 वर्षीय बहन रंजना अभी भाई के आने और उसके माथे पर मंगल तिलक करने का इंतजार कर रही है। रंजना बताती हैं कि उसके भाई मंजीत ने दीपावली के बाद आने को कहा था। लेकिन ऊपर वाले को यह मंजूर नहीं था। सपने में भी नहीं सोचा था कि भाई सुरंग में फंस जाएगा। उसके आने की उम्मीद बरकरार है। 
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भाई को खिलाऊंगी भैया दूज का प्रसाद 
उसका कहना है कि जब उसका भाई आएगा तो तिलक लगाकर भाई दूज का प्रसाद सहित तमाम पकवान खिलाकर स्वागत करेगी। अब तक उसका भाई सुरंग से बाहर नहीं आ पाने से उसका मन बेचैन जरूर है लेकिन आस नहीं छोड़ी है। यह पीड़ा पूरा परिवार भुगत रहा है। मंजीत की मां चौधराइन बताती हैं कि उनके पति चौधरी घटनास्थल पर मौके पर मौजूद हैं। वहां से मोबाइल फोन से जानकारी हो पाती है।

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दिवाली से पहले गया था मंजीत 
मंजीत की मां ने बताया कि उनके बड़े बेटे की मुंबई में एक हादसे में मौत हो गई थी। छोटा बेटा मंजीत मेहनत मजदूरी कर परिवार के भरण पोषण में मदद करता है। वह दिवाली से पहले उत्तराखंड में मजदूरी करने गया था। बता दें कि दिवाली वाले दिन से 41 श्रमिक सुरंग में फंसे हुए हैं। उनको सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे वैसे उनके परिजनों की चिंता भी बढ़ रही है। 
 

एसडीएम ने मंजीत की मां को बंधाया ढांढस 
मंजीत की मां चौधराइन मोबाइल पर अपने दोनों बेटों की फोटो देखकर दुखी हो रही हैं। मंजीत के परिवार को गांव के कोटेदार वीरेंद्र के जरिए राशन उपलब्ध कनाया गया है। एसडीएम अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि मंजीत के परिवार का हाल-चाल जानने के लिए शुक्रवार रात करीब 8:00 बजे वह स्वयं पहुचे।  परिवार को खाने के लिए राशन, दाल, खाद्य तेल समेत अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। उन्हें आश्वासन दिया गया है वह लोग किसी प्रकार की फिक्र न करें।

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