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Lakhimpur Kheri News: अधिकांश नलकूप बंद, कहीं मोटर खराब तो कहीं ऑपरेटर नहीं
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मोहम्मदी के बौआ के दुवाहा गांव में खराब पड़ा सरकारी नलकूप। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले के अधिकांश सरकारी नलकूप खराब हैं। किसी का मोटर खराब है तो कहीं नालियां क्षतिग्रस्त हैं। किसी की केबल खराब हो चुकी है। सरकारी नलकूप बंद होने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान पंपिंग सेट या अन्य साधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं।
नलकूप को दुरस्त किए जाने के लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्र के तमाम किसान अक्सर शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन ब्लाॅक से लेकर जिला मुख्यालय के अफसरों पर कोई असर नहीं पड़ा। कई नलकूप एक से दो एक सालों से खराब पड़े हैं। अनदेखी में कई नलकूप खंडहर हो गए हैं, लेकिन विभागीय अफसरों से कोई भी लेना-देना नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में 826 सरकारी नलकूप हैं। 198 सीतापुर और 628 लखीमपुर से संचालित हैं।
जिले में बड़ी संख्या में नलकूप हैं, लेकिन ऑपरेटर मात्र 120 ही हैं। एक-एक ऑपरेटर पर आठ से 10 नलकूप की जिम्मेदारी है। नलकूप अधिक और ऑपरेटरों की संख्या कम होने से दिन पर दिन उनकी स्थिति खराब होती जा रही है। सरकारी नलकूपों को लेकर एक और बड़ी समस्या बनी है। अनदेखी में अधिकांश नलकूपों के आसपास झाड़ियां उग गई हैं।
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कोई एक तो कोई दो साल से खराब
उचौलिया के बरखेरा और कल्लुआ का नलकूप कई वर्षों से खराब है। बरखेरा निवासी रामकुमार दीक्षित ने बताया कि सिंचाई कार संकट है। कल्लुआ में कई वर्षों से नलकूप खराब है। दिनेश अवस्थी ने बताया कि काफी समय से उनको नलकूप का पानी नहीं मिल सका। बालदेवता का नलकूप भी बंद है। मोहम्मदी के केहुआ और बौआ मजरा दुवाहा का नलकूप का मोटर खराब है।
बरबर के भौनापुर मार्ग के पास नलकूप पिछले काफी समय से बंद है। अमीरनगर के लखमीपुर हार का नलकूप दो वर्षों से खराब पड़ा है। किसान मोहम्मद उमर खां ने बताया कि फसलों की सिंचाई में दिक्कतें आ रही हैं। ममरी के लंदनपुर ग्रांट में पांच सरकारी नलकूप है, जिसमें से ग्राम गोबराचाठ का एक नलकूप बरसों से बंद पड़ा है।
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अफसरों की गैर मौजूदगी में बेलगाम कर्मचारी
नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता आशुतोष सिंह हैं, जिनके पास कई जनपदों का चार्ज है। ऐसे में वह बहुत कम ही यहां पहुंच पाते हैं। हफ्ते या 10 दिन में मुश्किल से एक दिन ही यहां आ पाते हैं। अधिकांश समय कर्मचारी ही कार्यालय चलाते हैं। मुख्य अफसर की गैर मौजूदगी में कर्मचारी जब चाहते हैं तब आते हैं। कोई फरियादी पहुंचता है तो उसकी सुनने वाला भी कोई नहीं है, जो एक बड़ी लापरवाही है।
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सरकारी नलकूप के मामले में विभागीय अफसरों से बात की जाएगी। खराब नलकूपों को दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि किसानों को सिंचाई का पानी मिल सके।
अभिषेक कुमार, सीडीओ
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नलकूप को दुरस्त किए जाने के लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्र के तमाम किसान अक्सर शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन ब्लाॅक से लेकर जिला मुख्यालय के अफसरों पर कोई असर नहीं पड़ा। कई नलकूप एक से दो एक सालों से खराब पड़े हैं। अनदेखी में कई नलकूप खंडहर हो गए हैं, लेकिन विभागीय अफसरों से कोई भी लेना-देना नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में 826 सरकारी नलकूप हैं। 198 सीतापुर और 628 लखीमपुर से संचालित हैं।
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जिले में बड़ी संख्या में नलकूप हैं, लेकिन ऑपरेटर मात्र 120 ही हैं। एक-एक ऑपरेटर पर आठ से 10 नलकूप की जिम्मेदारी है। नलकूप अधिक और ऑपरेटरों की संख्या कम होने से दिन पर दिन उनकी स्थिति खराब होती जा रही है। सरकारी नलकूपों को लेकर एक और बड़ी समस्या बनी है। अनदेखी में अधिकांश नलकूपों के आसपास झाड़ियां उग गई हैं।
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कोई एक तो कोई दो साल से खराब
उचौलिया के बरखेरा और कल्लुआ का नलकूप कई वर्षों से खराब है। बरखेरा निवासी रामकुमार दीक्षित ने बताया कि सिंचाई कार संकट है। कल्लुआ में कई वर्षों से नलकूप खराब है। दिनेश अवस्थी ने बताया कि काफी समय से उनको नलकूप का पानी नहीं मिल सका। बालदेवता का नलकूप भी बंद है। मोहम्मदी के केहुआ और बौआ मजरा दुवाहा का नलकूप का मोटर खराब है।
बरबर के भौनापुर मार्ग के पास नलकूप पिछले काफी समय से बंद है। अमीरनगर के लखमीपुर हार का नलकूप दो वर्षों से खराब पड़ा है। किसान मोहम्मद उमर खां ने बताया कि फसलों की सिंचाई में दिक्कतें आ रही हैं। ममरी के लंदनपुर ग्रांट में पांच सरकारी नलकूप है, जिसमें से ग्राम गोबराचाठ का एक नलकूप बरसों से बंद पड़ा है।
अफसरों की गैर मौजूदगी में बेलगाम कर्मचारी
नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता आशुतोष सिंह हैं, जिनके पास कई जनपदों का चार्ज है। ऐसे में वह बहुत कम ही यहां पहुंच पाते हैं। हफ्ते या 10 दिन में मुश्किल से एक दिन ही यहां आ पाते हैं। अधिकांश समय कर्मचारी ही कार्यालय चलाते हैं। मुख्य अफसर की गैर मौजूदगी में कर्मचारी जब चाहते हैं तब आते हैं। कोई फरियादी पहुंचता है तो उसकी सुनने वाला भी कोई नहीं है, जो एक बड़ी लापरवाही है।
सरकारी नलकूप के मामले में विभागीय अफसरों से बात की जाएगी। खराब नलकूपों को दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि किसानों को सिंचाई का पानी मिल सके।
अभिषेक कुमार, सीडीओ