{"_id":"68a214d5a6d0c69a8e062360","slug":"more-cries-of-joy-were-heard-in-government-hospitals-than-in-private-hospitals-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1011-153385-2025-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: निजी की जगह सरकारी अस्पतालों में अधिक गूंजी किलकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: निजी की जगह सरकारी अस्पतालों में अधिक गूंजी किलकारी
Sun, 17 Aug 2025 11:13 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 17 Aug 2025 11:13 PM IST
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। पहले जहां लोग प्रसव के लिए निजी अस्पतालों की ओर ज्यादा रुख करते थे, वहीं अब सरकारी अस्पतालों पर भी भरोसा बढ़ने लगा है। मुफ्त दवाएं, जांच, एंबुलेंस सुविधा और प्रशिक्षित डॉक्टर-नर्सों की उपलब्धता ने गर्भवती महिलाओं का विश्वास सरकारी अस्पतालों की ओर खींचा है।
पिछले कुछ समय में सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। महिलाएं अब बिना झिझक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का चयन कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना और जननी सुरक्षा योजना जैसी सरकारी योजनाओं ने भी महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इन योजनाओं के तहत प्रसव पर आने वाले खर्च का बोझ परिवारों पर नहीं पड़ता, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि पहले मरीजों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने से डर लगता था। उन्हें लगता था कि यहां न तो अच्छी देखभाल होगी और न ही सुरक्षित प्रसव, लेकिन अब स्थिति बदली है। आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और समय पर इलाज ने लोगों की सोच को बदल दिया है। इसके साथ ही अस्पतालों में साफ-सफाई और नवजात शिशु की देखभाल की सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में 65,682 प्रसव हुए, जबकि निजी अस्पतालों में महज 3023 डिलीवरी हुईं हैं। वहीं बीते अप्रैल माह से जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में 15,954, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ 881 प्रसव ही कराए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ती डिलीवरी का एक और कारण है कि यहां प्रसव सामान्य रूप से कराने की कोशिश की जाती है। प्राइवेट अस्पतालों में अक्सर सीजेरियन डिलीवरी के मामलों की संख्या अधिक रहती है, जिससे कई बार महिलाओं को मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है। वहीं सरकारी अस्पतालों में आवश्यक होने पर ही सीजेरियन का सहारा लिया जाता है। संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
अवैध रूप से चले रहे अस्पतालों में प्रसव की नहीं गिनती
जिले में अवैध रूप से कई अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में मोटे कमीशन के लालच में आशाएं व दलाल प्रसव के लिए प्रसूताओं को भेज देते हैं। इन अस्पतालों में होने वाले प्रसव की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास भी नहीं है और न ही विभाग इन अस्पतालों को बंद करा पा रहा है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
बीते तीन माह में जिला महिला अस्पताल में हुए प्रसव
माह प्रसव
अप्रैल 355
मई 505
जून 536
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं के लिए सुविधा बढ़ी हैं। बेहतर इलाज के लिए लोग प्राइवेट की जगह सरकारी अस्पताल को हो चुन रहे हैं। इसलिए सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं।
डॉ. अमित गुप्ता, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
विज्ञापन
पिछले कुछ समय में सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। महिलाएं अब बिना झिझक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का चयन कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना और जननी सुरक्षा योजना जैसी सरकारी योजनाओं ने भी महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इन योजनाओं के तहत प्रसव पर आने वाले खर्च का बोझ परिवारों पर नहीं पड़ता, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।
विज्ञापन
डॉक्टरों का कहना है कि पहले मरीजों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने से डर लगता था। उन्हें लगता था कि यहां न तो अच्छी देखभाल होगी और न ही सुरक्षित प्रसव, लेकिन अब स्थिति बदली है। आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और समय पर इलाज ने लोगों की सोच को बदल दिया है। इसके साथ ही अस्पतालों में साफ-सफाई और नवजात शिशु की देखभाल की सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में 65,682 प्रसव हुए, जबकि निजी अस्पतालों में महज 3023 डिलीवरी हुईं हैं। वहीं बीते अप्रैल माह से जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में 15,954, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ 881 प्रसव ही कराए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ती डिलीवरी का एक और कारण है कि यहां प्रसव सामान्य रूप से कराने की कोशिश की जाती है। प्राइवेट अस्पतालों में अक्सर सीजेरियन डिलीवरी के मामलों की संख्या अधिक रहती है, जिससे कई बार महिलाओं को मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है। वहीं सरकारी अस्पतालों में आवश्यक होने पर ही सीजेरियन का सहारा लिया जाता है। संवाद
अवैध रूप से चले रहे अस्पतालों में प्रसव की नहीं गिनती
जिले में अवैध रूप से कई अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में मोटे कमीशन के लालच में आशाएं व दलाल प्रसव के लिए प्रसूताओं को भेज देते हैं। इन अस्पतालों में होने वाले प्रसव की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास भी नहीं है और न ही विभाग इन अस्पतालों को बंद करा पा रहा है।
बीते तीन माह में जिला महिला अस्पताल में हुए प्रसव
माह प्रसव
अप्रैल 355
मई 505
जून 536
जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं के लिए सुविधा बढ़ी हैं। बेहतर इलाज के लिए लोग प्राइवेट की जगह सरकारी अस्पताल को हो चुन रहे हैं। इसलिए सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं।
डॉ. अमित गुप्ता, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल