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Lakhimpur Kheri News: मोहाना की धार बनी दोहरी मुसीबत, घर बचाएं या खेती
Fri, 28 Aug 2026 11:47 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 28 Aug 2026 11:47 PM IST
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मोहाना नदी पार से आते खैरटिया अनूपनगर निवासी किसान गुरूबख्श सिंह और जरनैल सिंह आदि। संवाद
निघासन। नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना और कर्णाली नदी का जलस्तर बढ़ने से जसनगर में कटान तेज हो गई है। नदी आबादी की ओर बढ़ रही है। कई पक्के मकान इसकी जद में आ गए हैं। समय रहते बचाव नहीं हुआ तो कई परिवारों के आशियाने नदी में समा सकते हैं।
प्रशासन ने कटान की जद में आने वाले मकान पहले ही खाली करा लिए हैं। प्रभावित परिवारों को अभी स्थायी जगह नहीं मिल सकी है। एसडीएम यदुवीर सिंह मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। आबादी बचाने के लिए नदी किनारे पत्थरों का जाल और बोरियां लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
मोहाना नदी के उस पार खेत होने के कारण खैरटिया अनूपनगर समेत आसपास के गांवों के किसान जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर खेतों तक पहुंच रहे हैं। खाद, पानी और फसल की देखभाल के लिए उन्हें तेज धार पार करनी पड़ती है।
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खैरटिया अनूपनगर निवासी किसान गुरुवचन सिंह ने बताया कि उनकी जमीन नदी के उस पार है। खेतों में खाद-पानी और अन्य जरूरी काम के लिए नाव से नदी पार करनी पड़ती है। किसान वीर सिंह ने बताया कि पालतू पशुओं के लिए चारा और घास की व्यवस्था करने के लिए भी नाव से नदी पार करनी पड़ती है।
किसानों ने सरकार से पुराने तटबंध और रेलवे लाइन को सुरक्षित करने, तटबंध पक्का कराने तथा मोहाना नदी पर स्थायी पुल बनवाने की मांग की है।
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पुराने तटबंध पर भी खतरा
मोहाना नदी का पानी अंग्रेजों के जमाने में बनी मैलानी-गोंडा रेलवे लाइन और कौड़ियाला-मंझरा मार्ग के किनारे तक पहुंच गया है। नदी पूरे उफान पर है और तटबंध को काटने की स्थिति में पहुंच गई है। ग्रामीणों के अनुसार, पुराना तटबंध टूटा तो तराई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। शारदा नदी के उत्तरी बंधे तक असर पहुंचने की आशंका भी ग्रामीण जता रहे हैं।
एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि जसनगर में कटान पर लगातार नजर रखी जा रही है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर कैंप कर रही है। कटान की जद में आने वाले मकान पहले ही खाली कराए गए हैं। आबादी सुरक्षित रखने के लिए नदी किनारे पत्थरों का जाल और बोरियां लगाई जा रही हैं। जरूरत के अनुसार अन्य बचाव कार्य भी कराए जाएंगे। ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है।
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प्रशासन ने कटान की जद में आने वाले मकान पहले ही खाली करा लिए हैं। प्रभावित परिवारों को अभी स्थायी जगह नहीं मिल सकी है। एसडीएम यदुवीर सिंह मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। आबादी बचाने के लिए नदी किनारे पत्थरों का जाल और बोरियां लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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मोहाना नदी के उस पार खेत होने के कारण खैरटिया अनूपनगर समेत आसपास के गांवों के किसान जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर खेतों तक पहुंच रहे हैं। खाद, पानी और फसल की देखभाल के लिए उन्हें तेज धार पार करनी पड़ती है।
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खैरटिया अनूपनगर निवासी किसान गुरुवचन सिंह ने बताया कि उनकी जमीन नदी के उस पार है। खेतों में खाद-पानी और अन्य जरूरी काम के लिए नाव से नदी पार करनी पड़ती है। किसान वीर सिंह ने बताया कि पालतू पशुओं के लिए चारा और घास की व्यवस्था करने के लिए भी नाव से नदी पार करनी पड़ती है।
किसानों ने सरकार से पुराने तटबंध और रेलवे लाइन को सुरक्षित करने, तटबंध पक्का कराने तथा मोहाना नदी पर स्थायी पुल बनवाने की मांग की है।
पुराने तटबंध पर भी खतरा
मोहाना नदी का पानी अंग्रेजों के जमाने में बनी मैलानी-गोंडा रेलवे लाइन और कौड़ियाला-मंझरा मार्ग के किनारे तक पहुंच गया है। नदी पूरे उफान पर है और तटबंध को काटने की स्थिति में पहुंच गई है। ग्रामीणों के अनुसार, पुराना तटबंध टूटा तो तराई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। शारदा नदी के उत्तरी बंधे तक असर पहुंचने की आशंका भी ग्रामीण जता रहे हैं।
एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि जसनगर में कटान पर लगातार नजर रखी जा रही है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर कैंप कर रही है। कटान की जद में आने वाले मकान पहले ही खाली कराए गए हैं। आबादी सुरक्षित रखने के लिए नदी किनारे पत्थरों का जाल और बोरियां लगाई जा रही हैं। जरूरत के अनुसार अन्य बचाव कार्य भी कराए जाएंगे। ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है।

मोहाना नदी पार से आते खैरटिया अनूपनगर निवासी किसान गुरूबख्श सिंह और जरनैल सिंह आदि। संवाद