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Lakhimpur Kheri News: इमरजेंसी ओपीडी के पास फेंका जा रहा मेडिकल कचरा
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल प्रशासन मेडिकल वेस्ट को लेकर गंभीरता नहीं बरत रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मेडिकल कचरे को यहां-वहां खुले में ही फेंक रहे हैं। स्थिति यह है कि इमरजेंसी के पास से लेकर पीछे के रास्ते तक कई जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दुर्गंध से लोगों को जीना तक दूभर है। इससे बीमारी से निजात पाने के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों पर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा हैै।
जिला अस्पताल में रोजाना 14 से 15 सौ तक ओपीडी होती है, जबकि 100 से अधिक मरीज इमरजेंसी की ओपीडी में पहुंचते हैं। इसमें गंभीर घायल से लेकर अन्य आपात चिकित्सा के लिए आने वाले मरीज होते हैं। रोजाना करीब आठ से दस ऑपरेशन भी किए जाते हैं, लेकिन ऑपरेशन कक्ष से लेकर ओपीडी से निकलने वाले मेडिकल कचरे को लेकर अस्पताल स्टाफ लापरवाही बरत रहा है।
इसी वजह से कर्मचारी इमरजेंसी के पास से लेकर उसके पीछे तक मेडिकल वेस्ट फेंक रहे हैं। पिछले दिनों बारिश के बाद भीगने से उठती दुर्गंध से मरीजों का ही नहीं, बल्कि इमरजेंसी में तैनात स्टाफ तक का बैठना मुश्किल है। इसकी वजह से वार्ड में भर्ती मरीजों में संक्रमण फैलने का भी खतरा मंडरा रहा है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि एक बेड से निकलने वाला औसतन 250 ग्राम कूड़ा ऐसा होता है, जिसका निस्तारण हर हाल में जरूरी है। नहीं तो इसके अंदर मौजूद वायरस संक्रमण का कारण बनते हैं। इनके खुले में डाले जाने से वायु और जल प्रदूषण का खतरा बढ़ता है।
बॉयोमेडिकल वेस्ट ले जाने की जिम्मेदारी लखनऊ की एक कंपनी की है। इमरजेंसी के पास जो कचरा पड़ा है, वह सामान्य वेस्ट है। सामान्य वेस्ट से खतरा नहीं है। इसे नगर पंचायत उठवाती है।
रजनी मशीह, मेट्रन, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में रोजाना 14 से 15 सौ तक ओपीडी होती है, जबकि 100 से अधिक मरीज इमरजेंसी की ओपीडी में पहुंचते हैं। इसमें गंभीर घायल से लेकर अन्य आपात चिकित्सा के लिए आने वाले मरीज होते हैं। रोजाना करीब आठ से दस ऑपरेशन भी किए जाते हैं, लेकिन ऑपरेशन कक्ष से लेकर ओपीडी से निकलने वाले मेडिकल कचरे को लेकर अस्पताल स्टाफ लापरवाही बरत रहा है।
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इसी वजह से कर्मचारी इमरजेंसी के पास से लेकर उसके पीछे तक मेडिकल वेस्ट फेंक रहे हैं। पिछले दिनों बारिश के बाद भीगने से उठती दुर्गंध से मरीजों का ही नहीं, बल्कि इमरजेंसी में तैनात स्टाफ तक का बैठना मुश्किल है। इसकी वजह से वार्ड में भर्ती मरीजों में संक्रमण फैलने का भी खतरा मंडरा रहा है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि एक बेड से निकलने वाला औसतन 250 ग्राम कूड़ा ऐसा होता है, जिसका निस्तारण हर हाल में जरूरी है। नहीं तो इसके अंदर मौजूद वायरस संक्रमण का कारण बनते हैं। इनके खुले में डाले जाने से वायु और जल प्रदूषण का खतरा बढ़ता है।
बॉयोमेडिकल वेस्ट ले जाने की जिम्मेदारी लखनऊ की एक कंपनी की है। इमरजेंसी के पास जो कचरा पड़ा है, वह सामान्य वेस्ट है। सामान्य वेस्ट से खतरा नहीं है। इसे नगर पंचायत उठवाती है।
रजनी मशीह, मेट्रन, जिला अस्पताल