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मलेरिया विभाग: एडीएमओ से लेकर फील्ड वर्कर तक नहीं
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लखीमपुर खीरी। बारिश के मौसम में मच्छरों की भरमार है। इनसे निपटने में मलेरिया विभाग नाकाम है, क्योंकि विभाग में स्टाफ का अभाव है।
जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में सहायक मलेरिया अधिकारी के दो पद हैं। यह दोनों पद पिछले कई साल से रिक्त हैं। दवाओं का छिड़काव करने से लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए 26 फील्ड वर्करों की जगह सिर्फ चार की ही तैनाती है। नतीजा यह है कि जलभराव वाली जगहों पर नियमित दवा का छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है।
विभाग में लैब टेक्नीशियन के दो पद हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ एक की ही है। जबकि, सुपीरियर फील्ड वर्कर भी छह की जगह महज तीन ही तैनात हैं। विभागीय लोग बताते हैं कि कर्मचारियों की सीमित संख्या करीब 50 लाख की आबादी वाले जिले के लिए नाकाफी हैं।
मलेरिया के लक्षण
सिर दर्द व उल्टी आना।
सर्दी व कंपकंंपी के साथ तेज बुखार।
बुखार हर रोज या एक दिन छोड़कर आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
ये उपाय करें
बुखार होने पर खून की जांच करवाएं।
मलेरिया की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे बाहें और टांगें ढकी रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
नीम-हकीमों के चक्कर में न पड़ें।
वर्ष- मलेरिया रोगी
2022-103
2023- 134
यह आंकड़े 14 सितंबर तक के हैं।
31 अगस्त तक जिले में मिले मलेरिया रोगी
नकहा-16
रमियाबेहड़- दो
पलिया- दो
कुंभी- पांच
मोहम्मदी-11
मितौली- पांच
बेहजम-13
फरधान- आठ
फूलबेहड़- पांच
लखीमपुर शहर-11
स्टाफ का है भारी टोटा
ऑफिस में स्टाफ की बेहद कमी है। कुल 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यरत हैं। जबकि फील्ड वर्कर 26 में से मात्र चार हैं। जबकि इनका मुख्य रोल होता है। हालांकि इसके बावजूद पूरे जिले मे मच्छरों की रोकथाम से लेकर मरीज मिलने के बाद उस पर निरोधात्मक कार्रवाई कराई जाती है।
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हरिशंकर, जिला मलेरिया अधिकारी
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जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में सहायक मलेरिया अधिकारी के दो पद हैं। यह दोनों पद पिछले कई साल से रिक्त हैं। दवाओं का छिड़काव करने से लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए 26 फील्ड वर्करों की जगह सिर्फ चार की ही तैनाती है। नतीजा यह है कि जलभराव वाली जगहों पर नियमित दवा का छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है।
विभाग में लैब टेक्नीशियन के दो पद हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ एक की ही है। जबकि, सुपीरियर फील्ड वर्कर भी छह की जगह महज तीन ही तैनात हैं। विभागीय लोग बताते हैं कि कर्मचारियों की सीमित संख्या करीब 50 लाख की आबादी वाले जिले के लिए नाकाफी हैं।
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मलेरिया के लक्षण
सिर दर्द व उल्टी आना।
सर्दी व कंपकंंपी के साथ तेज बुखार।
बुखार हर रोज या एक दिन छोड़कर आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
ये उपाय करें
बुखार होने पर खून की जांच करवाएं।
मलेरिया की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे बाहें और टांगें ढकी रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
नीम-हकीमों के चक्कर में न पड़ें।
वर्ष- मलेरिया रोगी
2022-103
2023- 134
यह आंकड़े 14 सितंबर तक के हैं।
31 अगस्त तक जिले में मिले मलेरिया रोगी
नकहा-16
रमियाबेहड़- दो
पलिया- दो
कुंभी- पांच
मोहम्मदी-11
मितौली- पांच
बेहजम-13
फरधान- आठ
फूलबेहड़- पांच
लखीमपुर शहर-11
स्टाफ का है भारी टोटा
ऑफिस में स्टाफ की बेहद कमी है। कुल 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यरत हैं। जबकि फील्ड वर्कर 26 में से मात्र चार हैं। जबकि इनका मुख्य रोल होता है। हालांकि इसके बावजूद पूरे जिले मे मच्छरों की रोकथाम से लेकर मरीज मिलने के बाद उस पर निरोधात्मक कार्रवाई कराई जाती है।
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हरिशंकर, जिला मलेरिया अधिकारी