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महेशपुर के जंगल में मिला  बाघिन शावक का शव

Fri, 24 Feb 2017 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो ममरी (खीरी)।
अमर उजाला ब्यूरो ममरी (खीरी)। Updated Fri, 24 Feb 2017 11:20 PM IST
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Maheshpur found in woods The body of the tigress cub
बाघिन शावक का शव - फोटो : अमर उजाला
10 माह की है बाघिन शावक, जांच में जुटे वन अधिकारी
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 वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर क्षेत्र में बाघिन शावक का शव मिला है। रेंजर एसएन यादव का मानना है कि आपसी संघर्ष में शावक की मौत हुई है। उसके सभी अंग, नाखून सुरक्षित हैं। उम्र दस माह आंकी जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया है।
शुक्रवार की सुबह महेशपुर जंगल से सटे साहबगंज कॉलोनी निवासी मीरसिंह के खेत से बाघिन का शव देखे जाने की वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना पर घटनास्थल का एसडीओ गोला आरएन मिश्रा ने भी निरीक्षण किया। रेंजर ने बताया कि इन दिनों मीटिंग का मौसम चल रहा है। अनुमान है, किसी टाइगर ने बाघिन को दबोचना चाहा होगा, जिसके साथ 10 माह का शावक होगा। अपने इरादे में विफल रहने और बाघिन के भागने पर उसने आक्रामक होकर मादा शावक को गर्दन पकड़ कर मार डाला होगा। मृत मिले शावक की गर्दन पर बाघ के दांतों के निशान मिले हैं। मौका मुआयना करने गए एसडीओ ने भी ऐसी ही आशंका जताई है। घटनास्थल पर बाघ के पगचिह्न और संघर्ष के निशान पाए गए हैं। एसडीओ और रेंजर ने बताया कि सही स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही साफ होगी। उन्होंने शावक के शिकार से इनकार किया है। यह भी बताया कि शावक के वियोग में बाघिन घटनास्थल के इर्दगिर्द गन्ने के खेतों में विचरण कर रही है। वनकर्मियों ने साहबगंज के ग्रामीणों को खेतों में न जाने की सलाह दी है।
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प्रथम दृष्टया प्रणय संघर्ष में बाघिन की मौत प्रतीत हो रही है। शव का बारीकी से परीक्षण किया गया तो सभी अंग  सुरक्षित मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो  जाएगा।
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-अखिलेश पांडेय, डीएफओ
 

एक बार फिर सामने आई महकमे की लाचारी
आपसी संघर्ष में मौत कहकर पल्ला झाड़ रहे वन अफसर
सात साल के अंदर मारे गए दो शावक, दो बाघ और दो तेंदुए

  दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी, मोहम्मदी और दुघवा टाइगर  रिजर्व में शामिल किशनपुर सेंक्च्युरी वन क्षेत्र में पिछले पांच सालों के अंदर बाघिन के एक नर और एक मादा शावक, एक युवा बाघ और दो तेंदुए की  अस्वाभाविक मौतों से महकमे की लाचारी सामने आई है। वजह है बाघों की मॉनीटरिंग पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ऐसी मौतों के बाद वन अधिकारी बड़ी ही साफगोई से आपसी संघर्ष की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन आपसी संघर्ष और  सड़क दुर्घटना में होने वाली बाघ और तेंदुओं की मौतों को रोकने में  महकमा लाचार साबित होता है।
 मालूम हो कि दो वर्ष पहले दुधवा टाइगर  रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी रेंज की कटैया बीट में बाघ और बाघिन के आपसी  संघर्ष के चलते बाघ ने लभग आठ माह के नर बच्चे पर हमला कर उसे मार दिया  था। इसी कड़ी में दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज की महेशपुर बीट  में दक्षिण कठिना कंपार्टमेंट में शनिवार हुई आपसी संघर्ष की घटना में बाघ ने बाघिन के साथ मौजूद दो बच्चों में एक लगभग दस माह के मादा बच्चे पर हमला  कर मार डाला। बाघिन के साथ मौजूद नर बच्चा किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां  से भाग निकला। इसके अलावा इसी रेंज में सितंबर 2013 में बाघ ने एक तेंदुए  पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था।
दिसंबर 2015 में साउथ खीरी  डिवीजन के मैलानी रेंज की मैलानी खास बीट में भीरा-मैलानी मार्ग पर 30  जनवरी 2015 को जंगल से निकले तेंदुए की वाहन की वाहन से टकराने पर मौत हो  गई थी। इसी कड़ी और इसी रेंज में वर्ष 2007 और 2015 में  भरिगवां और  गदनियां बीट में क्रमश: तेंदुआ और बाघ के बाहनों से टकराने पर मौत हो गई  थी।  इसके अलावा वर्ष 2008 में मैलानी और किशनपुर सेंक्चुरी के मध्य खीरी  ब्रांच नहर में एक बाघ का शव पानी में उतराता हुआ मिला था। पानी के तेज  बहाव के चलते बाघ का शव उतराता हुआ फरधान पहुंच गया। सूचना पर हरकत  में आए वन विभाग के गोला रेंज कर्मियों ने नहर से बाघ के शव को बमुश्किल  निकाला। हर साल हो रही  बाघों और तेंदुओं की मौतों से वन विभाग पर सवालिया निशान लग रहा है। इन  दुर्लभ वन्यजीवों की अस्वाभाविक मौतों को रोकने में विभाग नाकाम साबित हो रहा  है।

 
इन दिनों है बाघ-बाघिन का मीटिंग सीजन
उधर उप्र वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ वीपी सिंह का कहना है इन दिनों बाघ-बाघिन का मीटिंग सीजन है। बाघिन के आकर्षित न होने से बाघिन पर दबाव बनाने के लिए बाघ गुस्से में आकर उसके संग मौजूद  बच्चों पर हमला कर मार डालता है। जंगल के अंदर आपसी संघर्ष के चलते निर्दोष  बच्चों की जान चली जाती है।
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