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Lakhimpur Kheri News: मैगलगंज मार्ग पर निजी बस संचालकों का कब्जा, एक भी निगम की बस नहीं

Thu, 28 Mar 2024 03:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2024 03:36 AM IST
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Magalganj route is occupied by private bus operators, not a single corporation bus
लखीमपुर खीरी। जिले में परिवहन व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। लखनऊ, गोला, धौरहरा मार्ग को छोड़कर जिले के अन्य किसी भी मार्ग पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो रहा है। जिले के पांच रूट पर निजी बस संचालकों का कब्जा है। इसमें पलिया, निघासन, मैगलगंज आदि शामिल हैं। इन मार्ग पर भी रोडवेज बसों का संचालन शुरू हो जाए तो यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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लखीमपुर डिपो के पास 88 अनुबंधित बसें हैं, जो सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक चलती हैं। इसमें सबसे ज्यादा सीतापुर, लखनऊ रूट की बसें हैंं। इसके बाद धौरहरा, गोला और शाहजहांपुर के लिए कुछ बसें हैं। लखीमपुर में परिवहन निगम का वर्कशाॅप न होने से यहां एक भी रोडवेज बस नहीं है। यहां पर बसें अनुबंधित हैं, जिनके रूट पहले से ही निर्धारित हैं।
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निर्धारित रूट के अलावा अन्य किसी रूट यह बसें नहीं चलाई जा रहीं हैं। जिला मुख्यालय से मैगलगंज रूट पर रोज हजारों संख्या में सवारियों का आना-जाना रहता है, लेकिन रोडवेज की एक भी बस नहीं है। इस रूट पर सभी निजी बसों का ही संचालन है। इन रूट पर रोडवेज बसों के संचालन की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अफसरों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। निजी बसों का आलम यह है कि जब तक बस सवारियों से फुल नहीं होती तब तक नहीं चलाई जाती है। इसकी वजह से यात्रियों का खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर इस रूट पर रोडवेज बसों का संचालन हो जाए तो यात्रियों को काफी लाभ मिलेगा।
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छाउछ बस अड्डा तक पहुंचना भी चुनौती

बेहजम, कस्ता, मितौली, औरंगाबाद और मैगलगंज जाने के लिए छाउछ से बस पकड़नी होती है। छाउछ बस अड्डा रोडवेज से काफी दूर है, जहां तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ट्रैफिक के बीच ओवरब्रिज पार करते हुए छाउछ बस अड्डा पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग जाते हैं। ओवरब्रिज पार जाने के लिए जल्दी वाहन भी नहीं मिलते हैं। यात्रियों को टुकड़ियों में सवारी से जाना पड़ता है।

मैगलगंज से होकर गुजरती हैं दिल्ली डिपो की बसें
दिल्ली डिपो की बस रोजाना दिल्ली से लखीमपुर पहुंचती हैं। सवारियों के उतारने के बाद वे वापस दिल्ली के लिए रवाना होती हैं। लखीमपुर डिपो से यह बस करीब साढ़े तीन बजे निकलती है, जो बेहजम, कस्ता, मितौली, औरंगाबाद होते हुए मैगलगंज जाती है। कचहरी में तारीख और मार्केट करने आए अधिकांश लोग इन बसों से ही लौटते हैं।

नए मार्गों पर बस संचालन से रोडवेज का बढ़ेगा राजस्व

लखीमपुर डिपो की 88 बसें रोजाना 29 से 30 हजार किलोमीटर चलती हैं, जिनसे रोजाना 11 से 12 लाख रुपये राजस्व प्राप्त होता है। अगर रोडवेज कुछ नए रूट पर बसों का संचालन शुरू कर दे तो रोडवेज का राजस्व और भी बढ़ सकता है। मैगलगंज मार्ग पर बड़ी संख्या में सवारियां हैं। अगर रोडवेज बसें इस मार्ग पर चलती हैं तो रोजाना तीन से चार लाख रुपये की आय बढ़ेगी।


हमारे पास सभी अनुबंधित बसें हैं, जिनके मार्ग उच्च अधिकारी ही तय करते हैं। तय रूट पर ही बसों का संचालन किया जाता है। बिना अनुमति नए रूटों पर बसों का संचालन नहीं कर सकते। -मुकेश मेहरोत्रा, एआरएम
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