{"_id":"575564f24f1c1b081d9c528b","slug":"lohia-was-distributed-to-10-housing-apatron","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपात्रों को बांट दिए 10 लोहिया आवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपात्रों को बांट दिए 10 लोहिया आवास
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 06 Jun 2016 10:07 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजुआ की ग्राम पंचायत पड़रिया तिलकापुर का मामला
सीडीओ ने दिए 24.50 लाख की वसूली के आदेश
इंदिरा के बजाय दे दिए लोहिया आवास
बिजुआ ब्लाक की ग्राम पंचायत पड़रिया तिलकापुर में 10 अपात्रों को लोहिया आवास दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें शिकायत पर सीडीओ ने जांच कराई थी। आरोपों की पुष्टि होने के बाद सीडीओ अमित सिंह बंसल ने लाभार्थियों से रिकवरी के आदेश दिए हैं, जिनसे प्रति आवास 2.45 लाख यानी कुल 24.50 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। इस मामले में तत्कालीन बीडीओ, पटल सहायक, सेक्टर एडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया हैै, जिनके खिलाफ एक-एक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।
ग्राम पंचायत पड़रिया तिलकापुर में वर्ष 2014-15 में लोहिया आवासों का निर्माण कराया गया था, जिसमें प्रति आवास 2.45 लाख रुपये लाभार्थी को दिए गए थे। आवासों का निर्माण पूरा होने के बाद सत्यापन भी करा लिया गया था। इसके बाद पड़रिया तिलकापुर निवासी रामकिशोर ने अपात्रों को लोहिया आवास दिए जाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में रिट दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सीडीओ को दिए थे। सीडीओ ने त्रिस्तरीय कमेटी से जांच कराई, तो 10 लाभार्थियों के नाम बीपीएल सूची में दर्ज मिले। जबकि लोहिया आवास सिर्फ उन्हीं लाभार्थी को दिए जा सकते हैं, जिनका बीपीएल सूची में नाम नहीं हैै। बीपीएल के आधार पर इंदिरा आवास दिए जाने का प्रावधान है। लिहाजा सीडीओ अमित सिंह बंसल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिजुआ के तत्कालीन बीडीओ सुनील कुमार, पटल सहायक, सेक्टर एडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी की एक-एक वेतन वृद्धि स्थाई तौर पर रोक दी हैै। जबकि अपात्र पाए गए लाभार्थी पिंकी देवी पत्नी रामसमुझ, रानी पत्नी रावेंद्र, तुलसा पत्नी खेमकरन, पूनम पत्नी राजकुमार, गुजरिया पत्नी कौशल, फूलमती पत्नी गिरिजा दयाल, जुगराता पत्नी रामदयाल, सरोज पत्नी अर्जुनलाल, रामरानी पत्नी रामपाल और गीता देवी पत्नी राजकुमार से धनराशि की वसूली करने के आदेश सीडीओ ने दिए हैं।
पीडी ने बनाई जांच कमेटी
इस मामले में लाभार्थियों की पुन: जांच के लिए पीडी दिनेश सिंह ने त्रिस्तरीय जांच कमेटी बनाई गई है, जिसमें एसडीएम गोला विनोद गुप्ता, उपायुक्त एनआरएलएम अजय पांडेय और बीडीओ बिजुआ शामिल हैैं। इस मामले में ब्लाक स्तर पर दोष पाया गया है, जिन्होंने बीपीएल सूूची चेक नहीं की या फिर जानबूझकर तथ्यों को छिपाया। जांच रिपोर्ट आने पर पुन: दोषियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे।
विज्ञापन
वसूली को लेकर अफसरों में मतभिन्नता
इस पूरे मामले में लाभार्थियों पर कोई दोष सिद्ध नहीं होता है, क्योंकि बीपीएल सूची में नाम होने के कारण 10 लाभार्थी अपात्र हुए हैं। उनकी आर्थिक स्थिति वसूली करने के लायक नहीं हैं। हालांकि गाइड लाइन के मुुताबिक सीडीओ ने लाभार्थियों से वसूली के आदेश दिए हैी। वहीं पीडी दिनेेश सिंह ने लाभार्थियों को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि इस गड़बड़ी के लिए तत्कालीन बीडीओ, पटल सहायक, एडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी सीधे तौर पर दोषी हैैं। इसलिए लाभार्थियों के बजाय इन दोषी अधिकारियों से धनराशि की वसूली की जानी चाहिए। गौरतलब है कि आवास आवंटन से पूर्व त्रिस्तरीय कमेटी स्थलीय जांच और सत्यापन करती है।
विज्ञापन
सीडीओ ने दिए 24.50 लाख की वसूली के आदेश
इंदिरा के बजाय दे दिए लोहिया आवास
बिजुआ ब्लाक की ग्राम पंचायत पड़रिया तिलकापुर में 10 अपात्रों को लोहिया आवास दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें शिकायत पर सीडीओ ने जांच कराई थी। आरोपों की पुष्टि होने के बाद सीडीओ अमित सिंह बंसल ने लाभार्थियों से रिकवरी के आदेश दिए हैं, जिनसे प्रति आवास 2.45 लाख यानी कुल 24.50 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। इस मामले में तत्कालीन बीडीओ, पटल सहायक, सेक्टर एडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया हैै, जिनके खिलाफ एक-एक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।
ग्राम पंचायत पड़रिया तिलकापुर में वर्ष 2014-15 में लोहिया आवासों का निर्माण कराया गया था, जिसमें प्रति आवास 2.45 लाख रुपये लाभार्थी को दिए गए थे। आवासों का निर्माण पूरा होने के बाद सत्यापन भी करा लिया गया था। इसके बाद पड़रिया तिलकापुर निवासी रामकिशोर ने अपात्रों को लोहिया आवास दिए जाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में रिट दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सीडीओ को दिए थे। सीडीओ ने त्रिस्तरीय कमेटी से जांच कराई, तो 10 लाभार्थियों के नाम बीपीएल सूची में दर्ज मिले। जबकि लोहिया आवास सिर्फ उन्हीं लाभार्थी को दिए जा सकते हैं, जिनका बीपीएल सूची में नाम नहीं हैै। बीपीएल के आधार पर इंदिरा आवास दिए जाने का प्रावधान है। लिहाजा सीडीओ अमित सिंह बंसल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिजुआ के तत्कालीन बीडीओ सुनील कुमार, पटल सहायक, सेक्टर एडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी की एक-एक वेतन वृद्धि स्थाई तौर पर रोक दी हैै। जबकि अपात्र पाए गए लाभार्थी पिंकी देवी पत्नी रामसमुझ, रानी पत्नी रावेंद्र, तुलसा पत्नी खेमकरन, पूनम पत्नी राजकुमार, गुजरिया पत्नी कौशल, फूलमती पत्नी गिरिजा दयाल, जुगराता पत्नी रामदयाल, सरोज पत्नी अर्जुनलाल, रामरानी पत्नी रामपाल और गीता देवी पत्नी राजकुमार से धनराशि की वसूली करने के आदेश सीडीओ ने दिए हैं।
विज्ञापन
पीडी ने बनाई जांच कमेटी
इस मामले में लाभार्थियों की पुन: जांच के लिए पीडी दिनेश सिंह ने त्रिस्तरीय जांच कमेटी बनाई गई है, जिसमें एसडीएम गोला विनोद गुप्ता, उपायुक्त एनआरएलएम अजय पांडेय और बीडीओ बिजुआ शामिल हैैं। इस मामले में ब्लाक स्तर पर दोष पाया गया है, जिन्होंने बीपीएल सूूची चेक नहीं की या फिर जानबूझकर तथ्यों को छिपाया। जांच रिपोर्ट आने पर पुन: दोषियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे।
विज्ञापन
वसूली को लेकर अफसरों में मतभिन्नता
इस पूरे मामले में लाभार्थियों पर कोई दोष सिद्ध नहीं होता है, क्योंकि बीपीएल सूची में नाम होने के कारण 10 लाभार्थी अपात्र हुए हैं। उनकी आर्थिक स्थिति वसूली करने के लायक नहीं हैं। हालांकि गाइड लाइन के मुुताबिक सीडीओ ने लाभार्थियों से वसूली के आदेश दिए हैी। वहीं पीडी दिनेेश सिंह ने लाभार्थियों को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि इस गड़बड़ी के लिए तत्कालीन बीडीओ, पटल सहायक, एडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी सीधे तौर पर दोषी हैैं। इसलिए लाभार्थियों के बजाय इन दोषी अधिकारियों से धनराशि की वसूली की जानी चाहिए। गौरतलब है कि आवास आवंटन से पूर्व त्रिस्तरीय कमेटी स्थलीय जांच और सत्यापन करती है।