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ठोकरों में जियो कम, सीमेंट बैग का ज्यादा इस्तेमाल
महबूब आलम पलियाकलां।
Updated Sun, 18 Jun 2017 11:39 PM IST
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घोटाले
- फोटो : अमर उजाला
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मानकों में लापरवाही के चलते बनने से पहले ही ध्वस्त होने लगा निर्माण
करोड़ों की लागत पानी में बह जाने की प्रबल हुई शंकाएं, अधिकारी मौन
करोड़ों रुपये की लागत से कई थारू गांवों को बचाने की योजना में घोटाले की खबरें तो आम हो चुकी हैं, इसमें जियो बैग भी ढंग से नहीं लगाए जा रहे हैं। जियो बैग की बजाय खाली सीमेंट की बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वह भी कार्ययोजना के विपरीत नदी के भीतर की बजाय ऊपरी जमीनी सतह पर यह बोरियां लगाई जा रही हैं। जिससे कटानरोधी कार्य का मकसद ही अधूरा रह जा है। मानकों की गुणवत्ता में खामियों के चलते करोड़ों रुपये पानी में बह जाने की आशंका बढ़ गई है।
बता दें कि अर्से से नेपाली मोहाना नदी थारू गांव ढाकिया नझोटा, सौनहा, बंदरभरारी आदि दर्जनों गांवों की जमीनों को कटान कर अपने आगोश में ले रही है। इन गांवों का वजूद इससे खतरे में पड़ गया है। इसको बचाने के लिए वर्ष 2015 में शासन ने ढकिया नझौटा के बीच 796.37 लाख, सौनहा और बंदरभरारी के बीच 633.92 लाख रुपये की कटान रोधी परियोजना को मंजूरी दी। मंजूरी के बाद सिंचाई महकमे ने कार्य शुरू करा दिया लेकिन ठोकरों के निर्माण में मानक विहीन कार्य के आरोप लगने लगे। कटान के लिए लगाए जाने वाले बैग भी ढंग से नहीं लगाए जा रहे हैं। जियो बैग की जगह पर सीमेंट बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि जियो बैग सौ से डेढ़ सौ रुपये का होता है जबकि सीमेंट बैग में सीमेंट की बोरियां दो से तीन रुपये में मिल जाती हैं जबकि उसमें बालू भरकर कार्य चलाया जाता है। हल्के पानी में में ही सीमेंट बैग क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिससे कटानरोधी कार्य का मकसद पूरा होने की संभावना खत्म हो गई है।
पहाड़ी नदियों में विशेष तरीके से होता है कार्य
पहाड़ी नदियों की स्थिति आम नदियों से अलग होती है। कहा जाता है कि इनका वेग आम नदियों से कहीं ज्यादा होता है। जिसको देखते हुए कार्य के मानक अलग और विशेष होते हैं। लेकिन यहां तो पहाड़ी नदी होने के बाद भी आम नदियों जैसा कार्य भी नहीं हो रहा है।
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घालमेल की सीएम से जांच कराने की मांग
पीसीसी सदस्य रिसाल अहमद ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि सीमेंट की बोरियों में बालू भरकर ठोकरें बनाई जा रही हैं, जो कि निर्माण के समय ही बोरी फट गईं हैं। इससे प्रतीत होता है कि पहाड़ी नदी को निर्माणाधीन तटबंध कटान से नहीं रोक पाएगा तथा इसमें शासकीय धन का दुरुपयोग होगा। पत्र में कहा गया है कि तटबंध बनाने का जो मानक बनाया गया है वह शासकीय धन का दुरुपयोग करने एवं भारी भरकम कमीशनखोरी को देखते हुए बनाया गया है। मुख्यमंत्री से निर्माणाधीन तटबंध की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा बोल्डर युक्त तटबंध बनवाने की मांग पीसीसी सदस्य ने की है।
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करोड़ों की लागत पानी में बह जाने की प्रबल हुई शंकाएं, अधिकारी मौन
करोड़ों रुपये की लागत से कई थारू गांवों को बचाने की योजना में घोटाले की खबरें तो आम हो चुकी हैं, इसमें जियो बैग भी ढंग से नहीं लगाए जा रहे हैं। जियो बैग की बजाय खाली सीमेंट की बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वह भी कार्ययोजना के विपरीत नदी के भीतर की बजाय ऊपरी जमीनी सतह पर यह बोरियां लगाई जा रही हैं। जिससे कटानरोधी कार्य का मकसद ही अधूरा रह जा है। मानकों की गुणवत्ता में खामियों के चलते करोड़ों रुपये पानी में बह जाने की आशंका बढ़ गई है।
बता दें कि अर्से से नेपाली मोहाना नदी थारू गांव ढाकिया नझोटा, सौनहा, बंदरभरारी आदि दर्जनों गांवों की जमीनों को कटान कर अपने आगोश में ले रही है। इन गांवों का वजूद इससे खतरे में पड़ गया है। इसको बचाने के लिए वर्ष 2015 में शासन ने ढकिया नझौटा के बीच 796.37 लाख, सौनहा और बंदरभरारी के बीच 633.92 लाख रुपये की कटान रोधी परियोजना को मंजूरी दी। मंजूरी के बाद सिंचाई महकमे ने कार्य शुरू करा दिया लेकिन ठोकरों के निर्माण में मानक विहीन कार्य के आरोप लगने लगे। कटान के लिए लगाए जाने वाले बैग भी ढंग से नहीं लगाए जा रहे हैं। जियो बैग की जगह पर सीमेंट बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि जियो बैग सौ से डेढ़ सौ रुपये का होता है जबकि सीमेंट बैग में सीमेंट की बोरियां दो से तीन रुपये में मिल जाती हैं जबकि उसमें बालू भरकर कार्य चलाया जाता है। हल्के पानी में में ही सीमेंट बैग क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिससे कटानरोधी कार्य का मकसद पूरा होने की संभावना खत्म हो गई है।
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पहाड़ी नदियों में विशेष तरीके से होता है कार्य
पहाड़ी नदियों की स्थिति आम नदियों से अलग होती है। कहा जाता है कि इनका वेग आम नदियों से कहीं ज्यादा होता है। जिसको देखते हुए कार्य के मानक अलग और विशेष होते हैं। लेकिन यहां तो पहाड़ी नदी होने के बाद भी आम नदियों जैसा कार्य भी नहीं हो रहा है।
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घालमेल की सीएम से जांच कराने की मांग
पीसीसी सदस्य रिसाल अहमद ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि सीमेंट की बोरियों में बालू भरकर ठोकरें बनाई जा रही हैं, जो कि निर्माण के समय ही बोरी फट गईं हैं। इससे प्रतीत होता है कि पहाड़ी नदी को निर्माणाधीन तटबंध कटान से नहीं रोक पाएगा तथा इसमें शासकीय धन का दुरुपयोग होगा। पत्र में कहा गया है कि तटबंध बनाने का जो मानक बनाया गया है वह शासकीय धन का दुरुपयोग करने एवं भारी भरकम कमीशनखोरी को देखते हुए बनाया गया है। मुख्यमंत्री से निर्माणाधीन तटबंध की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा बोल्डर युक्त तटबंध बनवाने की मांग पीसीसी सदस्य ने की है।