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पर्चियों के लाले, किसानों को मिलें नहीं दे रही भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:31 PM IST
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- फोटो : getty images
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14 दिन पूर्व तक छह मिलों पर 307.45 करोड़ बकाया
बजाज की तीन मिलों पर ही 253.50 करोड़ बाकी
अजबापुर, ऐरा, कुंभी मिलें पर्ची देने में कर रही मनमानी
शासन के दावे के बावजूद पेराई सत्र 2016-17 में गन्ना किसानों के सामने समस्याएं जस की तस बनी हुई है। गन्ने का जीपीएस सर्वे और खतौनी जमा कराए जाने से पारदर्शिता लाने की बात कही जा रही थी। बजाज ग्रुप समेत चार मिलें किसानों को भुगतान नहीं कर रहीं हैं, जिससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर गन्ने की तोल कराने के लिए किसानों को पर्चियां नहीं मिल रहीं हैं, जिसमें अजबापुर, ऐरा और कुंभी मिल क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
जिले में नौ चीनी मिलें किसानों से गन्ना खरीदकर पेराई कर रही हैं। ज्यादातर मिलों ने नवंबर में पेराई प्रारंभ कर दी थी, जिससे अब तक (26 दिसंबर) सभी मिलों ने किसानों से 969 करोड़ 32 लाख 53 हजार रुपये कीमत का गन्ना खरीद चुकी हैं, जिसके सापेक्ष गन्ना एक्ट के मुताबिक 677 करोड़ 46 हजार रुपये भुगतान की देनदारी मिलों पर बनी है। अब तक मिलों ने 58 फीसदी यानी 394 करोड़ 97 लाख 80 हजार रुपये भुगतान किया है। लिहाजा बजाज ग्रुप की गोला पर 83 करोड़ 49 लाख 79 हजार, पलिया पर 100 करोड़ 78 लाख 58 हजार, खंभारखेड़ा पर 69 करोड़ 22 लाख 48 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह ऐरा मिल पर 46 करोड़ 14 लाख सात हजार, बेलरायां पर छह करोड़ 38 लाख 92 हजार और संपूर्णानगर पर एक करोड़ 41 लाख 59 हजार रुपये बकाया है। जबकि भुगतान करने में अव्वल मानी जा रही अजबापुर, ऐरा और कुंभी मिलें किसानों को पर्ची जारी करने में मनमानी कर रही हैं। सूत्र बताते हैं कि लघु एवं सीमांत किसानों को अब तक एक या दो पर्चियां ही जारी की गई हैं। जबकि गन्ना माफिया मिल कर्मियों से सांठगाठ करके धड़ल्ले से अपनी पर्चियां जारी करा रहे हैं। इससे किसानों को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। मसलन गन्ने का खेत खाली न होने से गेहूं की बुआई पिछड़ रही है। छोटे किसान पर्चियां जारी कराने के लिए समितियों और मिलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें समस्या से निजात नहीं मिल रही है।
चार मिलों पर दो करोड़ से अधिक ब्याज की देनदारी
चालू पेराई सत्र में गन्ना एक्ट के नियम मुताबिक किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान न करने से चार मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिल पर दो करोड़ 12 लाख 14 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बन गई है। जबकि पिछले पेराई सत्र 2015-16 का सभी नौ मिलों पर 36 करोड़ 14 लाख 73 हजार रुपये ब्याज बकाया है।
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पलिया मिल ने पिछले वर्ष का बकाया गन्ना मूल्य का पूर्ण भुगतान कर दिया है। चालू सत्र में जिन मिलों ने समय से भुगतान नहीं किया है, उन्हे किसानों को ब्याज देना पड़ेगा। किसानों को पर्चियां जारी न किए जाने के मामले में जांच कराएंगे।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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बजाज की तीन मिलों पर ही 253.50 करोड़ बाकी
अजबापुर, ऐरा, कुंभी मिलें पर्ची देने में कर रही मनमानी
शासन के दावे के बावजूद पेराई सत्र 2016-17 में गन्ना किसानों के सामने समस्याएं जस की तस बनी हुई है। गन्ने का जीपीएस सर्वे और खतौनी जमा कराए जाने से पारदर्शिता लाने की बात कही जा रही थी। बजाज ग्रुप समेत चार मिलें किसानों को भुगतान नहीं कर रहीं हैं, जिससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर गन्ने की तोल कराने के लिए किसानों को पर्चियां नहीं मिल रहीं हैं, जिसमें अजबापुर, ऐरा और कुंभी मिल क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
जिले में नौ चीनी मिलें किसानों से गन्ना खरीदकर पेराई कर रही हैं। ज्यादातर मिलों ने नवंबर में पेराई प्रारंभ कर दी थी, जिससे अब तक (26 दिसंबर) सभी मिलों ने किसानों से 969 करोड़ 32 लाख 53 हजार रुपये कीमत का गन्ना खरीद चुकी हैं, जिसके सापेक्ष गन्ना एक्ट के मुताबिक 677 करोड़ 46 हजार रुपये भुगतान की देनदारी मिलों पर बनी है। अब तक मिलों ने 58 फीसदी यानी 394 करोड़ 97 लाख 80 हजार रुपये भुगतान किया है। लिहाजा बजाज ग्रुप की गोला पर 83 करोड़ 49 लाख 79 हजार, पलिया पर 100 करोड़ 78 लाख 58 हजार, खंभारखेड़ा पर 69 करोड़ 22 लाख 48 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह ऐरा मिल पर 46 करोड़ 14 लाख सात हजार, बेलरायां पर छह करोड़ 38 लाख 92 हजार और संपूर्णानगर पर एक करोड़ 41 लाख 59 हजार रुपये बकाया है। जबकि भुगतान करने में अव्वल मानी जा रही अजबापुर, ऐरा और कुंभी मिलें किसानों को पर्ची जारी करने में मनमानी कर रही हैं। सूत्र बताते हैं कि लघु एवं सीमांत किसानों को अब तक एक या दो पर्चियां ही जारी की गई हैं। जबकि गन्ना माफिया मिल कर्मियों से सांठगाठ करके धड़ल्ले से अपनी पर्चियां जारी करा रहे हैं। इससे किसानों को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। मसलन गन्ने का खेत खाली न होने से गेहूं की बुआई पिछड़ रही है। छोटे किसान पर्चियां जारी कराने के लिए समितियों और मिलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें समस्या से निजात नहीं मिल रही है।
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चार मिलों पर दो करोड़ से अधिक ब्याज की देनदारी
चालू पेराई सत्र में गन्ना एक्ट के नियम मुताबिक किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान न करने से चार मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिल पर दो करोड़ 12 लाख 14 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बन गई है। जबकि पिछले पेराई सत्र 2015-16 का सभी नौ मिलों पर 36 करोड़ 14 लाख 73 हजार रुपये ब्याज बकाया है।
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पलिया मिल ने पिछले वर्ष का बकाया गन्ना मूल्य का पूर्ण भुगतान कर दिया है। चालू सत्र में जिन मिलों ने समय से भुगतान नहीं किया है, उन्हे किसानों को ब्याज देना पड़ेगा। किसानों को पर्चियां जारी न किए जाने के मामले में जांच कराएंगे।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी