लखीमपुर कांड: पूरे मामले की होगी न्यायिक जांच, मृतक के आश्रितों को मिलेंगे 45-45 लाख और सरकारी नौकरी
भाकियू नेता राकेश टिकैत और पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारियों के बीच वार्ता के बाद सहमति बन गई। किसानों के शव रखकर चल रहे धरने को भी समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दसवें संस्कार तक मांगों पर अमल नहीं हुआ तो महापंचायत होगी।
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इसके साथ ही मृत किसानों के परिजन को 45 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। किसान नेता टिकैत ने मंच से धरना समाप्ति की घोषणा की और कहा कि अगर दसवां संस्कार तक मांगों पर अमल नहीं हुआ तो महापंचायत करके बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप की भी रविवार के घटनाक्रम में मौत की जानकारी सोमवार पुलिस अधिकारियों ने दी।
मामले में रविवार रात को मृतक किसान पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र के खिलाफ हत्या और बलवा सहित कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। मृत भाजपा नेता के परिचितों की ओर से भी अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है।
रविवार को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र की गाड़ी से चार किसानों की मौत के बाद तिकुनिया कस्बे में देर रात और सोमवार सुबह भारी संख्या किसान एकत्र हो गए। राकेश टिकैत के दिल्ली से पहुंचने के साथ ही जनपद के आसपास के जिलों में भी हाईवे जाम करके प्रदर्शन किए गए। किसानों की मांग थी कि मृतक किसानों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और मंत्री के बेटे को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। साथ ही केंद्रीय मंत्री को बर्खास्त करने की मांग भी किसानों ने की।
छह दौर की चली वार्ता के बाद बनी बात
शासन की ओर से भेजे गए अधिकारियों ने तिकुनिया के अग्रसेन इंटर कॉलेज में चार किसानों के शव रखकर प्रदर्शन कर रहे लोगों से सुबह होते ही बातचीत शुरू कर दी। सोमवार सुबह चार बजे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र तिकुनिया पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की।
उसके बाद सुबह साढ़े पांच बजे से बैठकों का दौर शुरू हुआ। तिकुनिया स्थित गुरु नानकदेव सिख एकेडमी में हुई पहली मीटिंग करीब एक घंटे चली। इसमें राकेश टिकैत के अलावा अन्य किसान नेताओं से कमिश्नर लखनऊ रंजन कुमार, आईजी लक्ष्मी सिंह, डीएम अरविंद चौरसिया और एसपी विजय ढुल मौजूद रहे। पांच दौर की वार्ता तक किसान अड़े रहे, हालांकि छठे दौर में दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनी और मीडिया के सामने इसकी घोषणा की गई।
कुल आठ की ही मौत: एडीजी (कानून व्यवस्था)
रविवार को बवाल में आठ लोगों की मौत की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई थी। इसमें चार किसान, एक मंत्री के बेटे की गाड़ी का चालक और तीन भाजपा कार्यकर्ता बताए गए थे। पत्रकार की मौत की जानकारी होने के बाद यह आंकड़ा नौ बताया जाने लगा। हालांकि एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने साफ किया कि इस प्रकरण में कुल आठ लोगों की ही मौत हुई है। मरने वालों में चार किसानों के अलावा दो भाजपा कार्यकर्ता, एक चालक और एक पत्रकार शामिल हैं।