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‘...लाडले ये आपके कुंवारे रह जाएंगे’
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 11 Jan 2016 10:53 PM IST
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विश्व हिंदी दिवस के मौके पर राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में सरस्वती पैलेस में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। अनिल अमल के संयोजन में हुए इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता उमेश मिश्र ने की। कवि सम्मेलन में ओज के कवि कमल आग्नेय और श्याम त्रिवेदी पंकज ने राष्ट्रवाद की रचना पढ़ी तो पूरा पांडाल वंदेमातरम् के उद्घोष से गूंज उठा।
कवियत्री व्याख्या मिश्रा ने मां सरस्वती की वंदना पेश करने के बाद कन्या भ्रूण हत्या पर अपनी मर्मस्पर्शी रचना पेश की-बेटियों की कोख में जो मारना न बंद हुआ, लाडले ये आपके कुंवारे रह जाएंगे। सौरभ पांडेय ने आज की कृतघ्न पीढ़ी पर लानत भेजते हुए पढ़ा- पुत्र मोह में जिन्होंने प्राण तक त्याग दिए बेटे आज उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं। कमल आग्नेय ने भारत की रक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए- सब कुछ जल कर खाक हुआ पठानकोट के हीटर में, छप्पन इंची सीना सिकुड़ा छप्पन सेंटीमीटर में। अमित अनपढ़ ने व्यंग्य किया-जापान के राजा को जैसे गीता भेंट की,अब पाक के पीएम को जूता भेंट कीजिए।
हरदोई से आए कवि श्याम त्रिवेदी पंकज ने कहा कि कर्णधार ही निकल पड़े जब वतन जलाने की खातिर, ऐसी औलादों ज्यादा कोख बांझ हो अच्छा है। इनके अलावा डॉ. ओंकार नरायण दुबे, शाश्वत, अभिषेक, राजेंद्र तिवारी कंटक, शिवा अवस्थी, विजय बादल और विकास सहाय ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
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कार्यक्रम में प्रभु अग्रवाल, महावीर प्रसाद, कृष्ण गोपाल शेखर, ज्ञान स्वरूप शुक्ला, डॉ.सुरेश चंद्र गुप्ता, आचार्य संजय मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, आर्येंद्र पाल सिंह, आनंद अवस्थी, राजीव तिवारी, राजकुमार त्रिवेदी, डॉ. राकेश शर्मा, एनके मिश्र, ओपी श्रीवास्तव, नरपत जैन, डॉ. सत्येंद्र द्विवेदी, शिवकांत मिश्र, मनीष मिश्र, सुनीता शुक्ला, डॉ. अजय आगा आदि लोग मौजूद रहे।
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कवियत्री व्याख्या मिश्रा ने मां सरस्वती की वंदना पेश करने के बाद कन्या भ्रूण हत्या पर अपनी मर्मस्पर्शी रचना पेश की-बेटियों की कोख में जो मारना न बंद हुआ, लाडले ये आपके कुंवारे रह जाएंगे। सौरभ पांडेय ने आज की कृतघ्न पीढ़ी पर लानत भेजते हुए पढ़ा- पुत्र मोह में जिन्होंने प्राण तक त्याग दिए बेटे आज उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं। कमल आग्नेय ने भारत की रक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए- सब कुछ जल कर खाक हुआ पठानकोट के हीटर में, छप्पन इंची सीना सिकुड़ा छप्पन सेंटीमीटर में। अमित अनपढ़ ने व्यंग्य किया-जापान के राजा को जैसे गीता भेंट की,अब पाक के पीएम को जूता भेंट कीजिए।
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हरदोई से आए कवि श्याम त्रिवेदी पंकज ने कहा कि कर्णधार ही निकल पड़े जब वतन जलाने की खातिर, ऐसी औलादों ज्यादा कोख बांझ हो अच्छा है। इनके अलावा डॉ. ओंकार नरायण दुबे, शाश्वत, अभिषेक, राजेंद्र तिवारी कंटक, शिवा अवस्थी, विजय बादल और विकास सहाय ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
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कार्यक्रम में प्रभु अग्रवाल, महावीर प्रसाद, कृष्ण गोपाल शेखर, ज्ञान स्वरूप शुक्ला, डॉ.सुरेश चंद्र गुप्ता, आचार्य संजय मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, आर्येंद्र पाल सिंह, आनंद अवस्थी, राजीव तिवारी, राजकुमार त्रिवेदी, डॉ. राकेश शर्मा, एनके मिश्र, ओपी श्रीवास्तव, नरपत जैन, डॉ. सत्येंद्र द्विवेदी, शिवकांत मिश्र, मनीष मिश्र, सुनीता शुक्ला, डॉ. अजय आगा आदि लोग मौजूद रहे।